Representations of cryptocurrency Bitcoin are seen in this picture illustration taken June 7, 2021. REUTERS/Edgar Su/Illustration

बचाव। जांच। आजादी। बाद में। हस्तक्षेप।

लाना आजादी सबसे अधिक करने के लिए कमजोर

मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में हमें सशक्त बनाएं अपना बिटकॉइन (बीटीसी), एथेरियम (ईटीएच), बिटकॉइन कैश (बीसीएच), लिटकोइन (एलटीसी), पॉलीगॉन (मैटिक), या डॉगकोइन (डीओजीई) दान करके, या कोई अन्य समर्थित क्रिप्टोक्यूरेंसी।

कृपया विजेट पर उल्लिखित ब्लॉकचेन पर सूचीबद्ध सटीक क्रिप्टोकरेंसी ही भेजें। कोई अन्य क्रिप्टोकरेंसी (परत 2, लिपटे टोकन, एनएफटी या अन्य ईआरसी -20 टोकन सूचीबद्ध नहीं सहित) न भेजें क्योंकि ये असमर्थित हैं और इसके परिणामस्वरूप दान हानि हो सकती है। को किए गए सभी क्रिप्टोक्यूरेंसी दान The Exodus Road अप्रतिदेय हैं।

कर जानकारी और अन्य प्रश्नों के लिए, आप नीचे क्रिप्टो दान करने के बारे में अधिक जान सकते हैं।

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हमारे बारे में The Exodus Road

हमारे पास एक ऐसी दुनिया के लिए एक विजन है जिसमें इंसानों को क्रिप्टोकरेंसी का आगमन कभी खरीदा, बेचा या शोषित नहीं किया जाता है। अपनी स्थापना के बाद से, हमने मानव तस्करी के 1700 से अधिक बचे लोगों के बचाव और 900 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी का जश्न मनाया है।

हस्तक्षेप

मानव तस्करी अपराध से लड़ने के लिए कानून प्रवर्तन के साथ साझेदारी करना।

प्रशिक्षण शिक्षा

कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए समुदायों को लैस करना।

बचे लोगों को सशक्त बनाना क्योंकि वे स्वतंत्रता की ओर बढ़ते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपकी धन वापसी नीति क्या है?

को किए गए सभी क्रिप्टोक्यूरेंसी दान The Exodus Road अप्रतिदेय हैं। The Exodus Road फिएट के लिए प्राप्त सभी क्रिप्टो का आदान-प्रदान करता है ताकि दान किए गए सभी टोकन को जल्द से जल्द काम पर लगाया जा सके। हम सक्षम नहीं हैं यदि आपने अपना विचार बदल दिया है तो धनवापसी दें, गलत क्रिप्टोकरेंसी भेजी , या गलत निर्णय लिया। The Exodus Road दान के बदले में क्रिप्टोक्यूरेंसी एयरड्रॉप, सामान या सेवाओं के किसी भी रूप की पेशकश नहीं करता है, नहीं करता है और कभी नहीं करेगा।

आप कौन सी क्रिप्टोकरेंसी स्वीकार कर सकते हैं?

हम निम्नलिखित क्रिप्टोकरेंसी स्वीकार करते हैं: बिटकॉइन (BTC) एथेरियम (ETH) यूएसडी कॉइन (USDC) दाई (DAI) डॉगकोइन (DOGE) बेसिक अटेंशन टोकन (BAT) एथेरियम नेम सर्विस (ENS) 0x (ZRX) 1 इंच (1INCH) Aave (AAVE) अल्केमिक्स (ALCX) Amp (एएमपी) अंकर नेटवर्क (एएनकेआर) एपकोइन (एपीई) एपीआई3 (एपीआई3) ऑडियस (ऑडियो) एक्सी इन्फिनिटी शार्ड्स (एएक्सएस) बैलेंसर (बीएएल) बैंकर नेटवर्क टोकन (बीएनटी) बार्नब्रिज (बॉन्ड) बिटकॉइन कैश (बीसीएच) चेनलिंक (लिंक) सिविक (CVC) कंपाउंड (COMP) कर्व (CRV) Decentraland (MANA) DeFI पल्स इंडेक्स (DPI) डोगेलॉन मार्स (ELON) एनजिन कॉइन (ENJ) फैंटम (FTM) Fetch AI (FET) फाइलकोइन (FIL) गाला (GALA) जेमिनी डॉलर (GUSD) इंजेक्टिव प्रोटोकॉल (INJ) Keep3r (KP3R) Kyber नेटवर्क (KNC) लीडो (LDO) लिक्विडिटी USD (LUSD) लिक्विडिटी (LQTY) लिटकोइन (LTC) लाइवपीयर (LPT) लूपिंग (LRC) मैजिक इंटरनेट मनी (MIM) मेकर ( MKR) मेपल फाइनेंस (MPL) मास्क नेटवर्क (MASK) मेरिट सर्कल (MC) मिरर प्रोटोकॉल (MIR) मॉस कार्बन क्रेडिट (MCO2) न्यूमेरेयर (NMR) आर्किड (OXT) पैक्स गोल्ड (PAXG) पॉलीगॉन-ईआरसी 20 (MATIC) क्वांट ( QNT) रेडिकल (RAD) रैली (RLY) Raydium (RAY) Ren (REN) रेंडर टू केन (RNDR) कृपाण (SBR) शीबा इनु (SHIB) स्केल (SKL) स्मूथ लव पोशन (SLP) सोलाना (SOL) सोमनियम स्पेस (CUBE) स्पेल टोकन (SPELL) Storj (STORJ) सुशी स्वैप (SUSHI) सिंथेटिक्स (SNX) तेजोस (XTZ) ग्राफ़ (GRT) सैंडबॉक्स (SAND) UMA (UMA) Uniswap (UNI) रैप्ड सेंट्रीफ्यूज (wCFG) वर्ष.वित्त (YFI) Zcash (ZEC)

India At 2047: भारत कैसे क्रिप्टो सेक्टर पर रख रहा है सतर्क रुख, अन्य देशों को लेनी चाहिए सीख

Looking Ahead, [email protected]: भारत ने अब तक क्रिप्टो करेंसी के नियामक के लिए मिलेजुले संकेतों की पेशकश की है और समय लिया है ताकि यह उद्योग के साथ-साथ निवेशकों के हितों की रक्षा भी कर सके.

By: प्रशांत कुमार | Updated at : 10 Aug 2022 05:00 PM (क्रिप्टोकरेंसी का आगमन IST)

Edited By: Meenakshi

Crypto Regulation: क्रिप्टोकरेंसी सुर्खियों में हैं जब से सुप्रीम कोर्ट ने 2020 की शुरुआत में उन पर पूर्ण प्रतिबंध हटा दिया है. 2021 में एक्सचेंजों और तेजी से बढ़ते बाजारों के प्रसार के साथ, क्रिप्टोकरेंसी के नाम से कोई अनजान नहीं है. भारत में देर से प्रवेश करने के बावजूद क्रिप्टो दुनिया को खुले हाथों से अपनाया और आज लगभग 27 मिलियन भारतीय हैं जो क्रिप्टो संपत्ति रखते हैं, मुख्यतः टियर II और टियर III शहरों में. बता दें कि देश में एक्टिव डीमैट खातों की संख्या भी इससे थोड़ी ही ज्यादा है जो देश में दशकों से मौजूद हैं.

क्रिप्टो के क्षेत्र में केंद्र ने अभी तक क्या कदम उठाए हैं
क्रिप्टोकरेंसी ऐसेट करेंसी और टेक्नोलॉजी का एक बहुत ही दिलचस्प संकेत है. वित्त मंत्रालय द्वारा अब तक उठाए गए कदमों को करीब से देखने से पता चलता है कि हमारे करेंसी रेगुलेटर तीन पहलुओं को अलग तरह से देखते हैं. ऐसा लगता है कि यह मूल कारण है कि भारत ने अब तक क्रिप्टो करेंसी के नियामक के लिए मिलेजुले संकेतों की पेशकश की है और समय लिया है ताकि यह उद्योग के साथ-साथ निवेशकों के हितों की रक्षा भी कर सके.

देश में क्रिप्टो पर टैक्स का उठा कदम
यदि हम पिछले केंद्रीय बजट के दौरान की गई सभी घोषणाओं को करीब से देखें तो पाएंगे कि ज्यादातर शोर क्रिप्टो ऐसेट्स के टैक्सेशन के आसपास रहा है. हालांकि क्रिप्टो पर टैक्स एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है जिसे तब से आरबीआई ने भी इसे बार-बार दोहराया है. फिर भी ये कहना ज्यादा सही होगा कि ब्लॉकचेन पर बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी, करेंसी के मौजूदा डिजिटल संस्करण की तुलना में एडवांस्ड हैं और भारत (हमेशा की तरह) एक नई तकनीक को अपनाने के लिए खुले मन से तैयार है.

वैध डिजिटल ऐसेट के रूप में सामने आ रही है क्रिप्टो
एक और पहलू देखें तो इसे एक संपत्ति के रूप में मानने और इस पर टीडीएस और टैक्स लगाने से ये वैध ऐसेट के रूप में स्थापित हो सकता है. हालांकि यह तर्क दिया जा सकता है कि क्या दरें ऊंची या कम) हैं? क्या नीति निर्माताओं को उन्हें एसटीसीजी और एलटीसीजी के समान व्यवहार करना चाहिए, क्रिप्टो पर टैक्सेशन इसे अनुमोदित करने का रेगुलेटर का तरीका है. इससे इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि अब यह किसी के लिए व्यापार करने और क्रिप्टो के मालिक होने के लिए पूरी तरह से वैध है. ये शुरुआती दिन हैं और समय बीतने के साथ और बढ़ती समझ के साथ, टैक्सेशन धीरे-धीरे अधिक निवेशक अनुकूल हो जाएगा.

निवेशकों को ना हो परेशानी
यह हमें एक मुद्रा के रूप में क्रिप्टो के तीसरे पहलू को भी सामने लाता है जिसमें कुछ देशों के विपरीत हमारे रेगुलेटर मजबूत रहे हैं. क्रिप्टो करेंसीज मूल्य का एक अत्यधिक लिक्विड भंडार हैं, और हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यह भारत और विदेशों में समान रूप से निवेशकों को ट्रीट कर सके. साथ ही ये पक्का कर सके कि क्रिप्टो की सहज कमी की कोई परेशानी नहीं है

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भारत और क्रिप्टो-आगे क्या भविष्य है
वित्त मंत्री ने पिछले महीने क्रिप्टो पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बारे में बात की थी. भारत को अपने पड़ोसियों सिंगापुर और दुबई से आगे नहीं देखना चाहिए ये वो दो देश हैं जो अब सही तरीके से क्रिप्टो क्रांति का नेतृत्व करने में सबसे आगे हैं. क्रिप्टोकरेंसी एक बहुत ही दिलचस्प दोहरे व्यवहार को प्रदर्शित करता है जिसमें एक तरफ यह सभी को दिखाई देता है, लेकिन दूसरी ओर यह तब तक जिम्मेदार नहीं है जब तक यह ब्लॉकचेन पर आधारित रहता है. ये ही असल में विवाद की जड़ है और सरकार को ढांचा तैयार करना चाहिए, एक्सचेंजों के साथ साझेदारी करनी चाहिए और लाइसेंस जारी करना चाहिए ताकि हमारी (और अन्य) जैसी कंपनियां हमारे नियामकों की सुविधा के रूप में कार्य कर सकें और भारत को ब्लॉकचेन तकनीक के साथ आगे ला सकें.

अन्य देशों में क्रिप्टो की स्थिति
क्रिप्टो को अब तक विभिन्न देशों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है. अल साल्वाडोर अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ बिटकॉइन को लीगल टेंडर के रूप में अपनाने वाला पहला देश बन गया, हालांकि, इसे भारी नुकसान हुआ. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और कई क्रेडिट एजेंसियों की आलोचनाओं के बावजूद, मध्य अमेरिकी राष्ट्र ने बीटीसी को अपने राष्ट्रीय रिजर्व में जोड़ना जारी रखा और यहां तक ​​​​कि बिटकॉइन सिटी नामक एक क्रिप्टो ट्रेडिंग हब स्थापित करने की योजना का खुलासा किया. हालांकि, हाल ही में बीटीसी की कीमतों में गिरावट और कुल क्रिप्टो बाजार में गिरावट के कारण, देश के निवेश का मूल्य कम हो रहा है जिनकी अनुमानित रूप से कीमत 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा है. दूसरी ओर चीन है, जो क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और इसके विभिन्न पहलुओं पर नाटकीय रूप से अपने रुख से पलटा है, इतना अधिक कि क्रिप्टो व्यापारियों और खनिकों को अंततः देश से बाहर जाना पड़ा और अपने व्यवसाय को जारी रखने के लिए अन्य दक्षिण एशियाई देशों में ठिकाने स्थापित करने पड़े.

भारत के लिए क्रिप्टो पर सतर्कता अच्छी साबित हुई
क्रिप्टोक्यूरेंसी और इसके विभिन्न पहलुओं के लिए भारत के सतर्क दृष्टिकोण को अन्य सरकारों के लिए सीखने की अवस्था के रूप में माना जा सकता है. इस क्षेत्र को पूरी तरह से अपनाने या बैन करने का फैसला लेने से पहले समर्पित रिसर्च करनी बेहद जरूरी है जो भारत सरकार कर रही है.

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Published at : 10 Aug 2022 04:44 PM (IST) Tags: India Nirmala Sitharaman Cryptocurrency Bitcoin RBI FM digital currency Dogecoin Tether India at 2047 Crypto Regulation हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: India-at-2047 News in Hindi

क्रिप्टोकरेंसी से बिलकुल अलग है आरबीआई की डिजिटल करेंसी, जानिए दोनों के बीच का मुख्य अंतर और खासियत

Digital Currency: आरबीआई रिटेल और होलसेल सेगमेंट में इस्तेमाल के लिए फेजवाइज तरीके से डिजिटल करेंसी पेश करेगा। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के जरिए होगी।

क्रिप्टोकरेंसी से बिलकुल अलग है आरबीआई की डिजिटल करेंसी, जानिए दोनों के बीच का मुख्य अंतर और खासियत

Representations of cryptocurrency Bitcoin are seen in this picture illustration taken June 7, 2021. REUTERS/Edgar Su/Illustration

भारत को जल्द ही अपनी डिजिटल करेंसी मिलने वाली है। इसको लेकर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने अपनी योजना का खुलासा किया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबि शंकर ने गुरुवार को कहा कि रिजर्व बैंक फेसवाइज तरीके से डिजिटल करेंसी पेश करने की योजना बना रहा है। सबसे पहले डिजिटल करेंसी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया जाएगा।

देश में डिजिटल करेंसी को लेकर लंबे समय से तैयारी चल रही है। आरबीआई भी काफी समय से डिजिटल करेंसी लाने की बात कर रहा है। इसको लेकर कई बार संकेत दिए जा चुके हैं। दुनिया के कई अन्य देश भी डिजिटल करेंसी लाने की तैयारी कर रहे हैं। आज हम आपको डिजिटल करेंसी के बारे वह सबकुछ बताने जा रहे हैं जो आप जानना चाहते हैं। साथ ही हम आपको डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी के बीच अंतर भी बताएंगे..

क्या होती है डिजिटल करेंसी?: यह एक प्रकार से प्रचलित करेंसी का वर्चुअल रूप होता है। इसको केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) भी कहा जाता है। डिजिटल करेंसी को केवल केंद्रीय बैंक जारी करता है। इसे सरकार की मान्यता प्राप्त होती है। फिजिकल करेंसी के मुकाबले इसकी वैल्यू में कोई अंतर नहीं होता है। उदाहरण के लिए 10 रुपए के नोट और 10 रुपए क्रिप्टोकरेंसी का आगमन की डिजिटल करेंसी की वैल्यू बराबर होगी। डिजिटल करेंसी में बिना किसी रुकावट लेन-देन भी किया जा सकता है।

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क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी?: क्रिप्टोकरेंसी एक अलग प्रकार की करेंसी होती है। यह अलग-अलग प्रकार की होती है। इसे वर्चुअल करेंसी भी कहा जाता है। सभी क्रिप्टोकरेंसी की वैल्यू अलग-अलग होती है और इसकी कीमतों में उतार चढ़ाव होता रहता है। क्रिप्टोकरेंसी मान्यता प्राप्त नहीं है। पिछले कुछ सालों में क्रिप्टोकरेंसी का चलन बढ़ा है। इस समय पूरी दुनिया में करीब 4 हजार क्रिप्टोकरेंसी चलन में हैं। इसमें बिटकॉइन सबसे पॉपुलर क्रिप्टोकरेंसी है। भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी का चलन तेजी से बढ़ा है।

डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी में प्रमुख अंतर

  • डिजिटल करेंसी को केंद्रीय बैंक जारी करता है। क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग के जरिए तैयार की जाती है।
  • डिजिटल करेंसी को केंद्रीय बैंक और उस देश की सरकार से मान्यता प्राप्त होती है। क्रिप्टोकरेंसी के पास केंद्रीय बैंक या सरकार की मान्यता नहीं होती है।
  • डिजिटल करेंसी की वैल्यू स्थिर रहती है। क्रिप्टोकरेंसी की वैल्यू में बहुत उतार-चढ़ाव होता है।
  • डिजिटल करेंसी को संबंधित देश की मुद्रा में बदला जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी में ऐसा नहीं हो पाता है।

अंतरमंत्रालीय समिति ने की थी डिजिटल करेंसी की सिफारिश: वित्त मंत्रालय ने 2017 में एक उच्च स्तरीय अंतरमंत्रालयी समिति की सिफारिश की थी। इस समिति को वर्चुअल या क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी पॉलिसी और कानूनी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए कहा गया था। इस समिति ने देश में फिजिकल करेंसी की तरह डिजिटल करेंसी लाने की सिफारिश की थी।

RBI ने लॉन्च किया ‘डिजिटल रुपया’ (e₹), समझिए क्या होंगे इसके फायदे

RBI Digital Rupee: भारतीय रिजर्व बैंक ने आज 1 नवंबर को अपनी डिजिटल करेंसी ‘डिजिटल रुपया’ को लॉन्च कर दिया है। केंद्रीय बैंक (RBI) ने अभी होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए डिजिटल रुपया (E-Rupee) जारी किया है। यह फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। शुरुआती दौर में डिजिटल रुपया सरकारी प्रतिभूतियों में द्वितीयक बाजार लेन-देन निपटाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Key Points

– भारत सरकार ने 01 फरवरी, 2022 को वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में डिजिटल रुपया लाने की घोषणा की
– 30 मार्च, 2022 को सीबीडीसी जारी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में संशोधनों को सरकार ने राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से अधिसूचित की
– 01 नवंबर, 2022 को होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए डिजिटल रुपया (e₹) लांच

पायलट प्रोजेक्ट

इस टेस्टिंग के तहत सरकारी सिक्योरिटीज में सेकेंडरी मार्केट लेनदेन का निपटान किया जाएगा। आरबीआई ने ‘केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा’ लाने की अपनी योजना की दिशा में कदम बढ़ाते हुए डिजिटल रुपये का पायलट टेस्टिंग शुरू करने का फैसला किया है।

आरबीआई ने केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के बारे में पेश अपनी संकल्पना रिपोर्ट में कहा था कि यह डिजिटल मुद्रा लाने का मकसद मुद्रा के मौजूदा स्वरूपों का पूरक तैयार करना है। इससे यूजर्स को मौजूदा भुगतान प्रणालियों के साथ अतिरिक्त भुगतान विकल्प मिल पाएंगे।

डिजिटल करेंसी में 9 बैंक शामिल

थोक खंड (Wholesale Transactions) के लिए होने वाले डिजिटल करेंसी के पायलट प्रोजेक्ट में नौ बैंक होंगे। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचएसबीसी बैंक शामिल हैं। ये बैंक गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में लेनदेन के लिए इस डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करेंगे. इसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC का नाम दिया गया है और भारत की ये पहली डिजिटल करेंसी आपके लिए बहुत कुछ बदलने वाली है।

क्या है CBDC

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) किसी केंद्रीय बैंक की तरफ से उनकी मौद्रिक नीति के अनुरूप नोटों का डिजिटल स्वरूप है। इसमें केंद्रीय बैंक पैसे छापने के बजाय सरकार के पूर्ण विश्वास और क्रेडिट द्वारा समर्थित इलेक्ट्रॉनिक टोकन या खाते जारी करता है। क्रिप्टोकरेंसी का आगमन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी डिजिटल एक करेंसी कानूनी टेंडर है। यह फिएट मुद्रा के समान है और फिएट करेंसी के साथ इसे वन-ऑन-वन एक्सचेंज किया जा सकता है। सीबीडीसी, दुनिया भर में, वैचारिक, विकास या प्रायोगिक चरणों में है।

दो तरह की होगी CBDC

– Retail (CBDC-R): Retail CBDC संभवतः सभी को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी
– Wholesale (CBDC-W) : इसे सिर्फ चुनिंदा फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए डिजाइन किया गया है

पिछले दिनों RBI ने क्रिप्टोकरेंसी का आगमन इस बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) का उद्देश्य मुद्रा के मौजूदा रूपों को बदलने के बजाय डिजिटल मुद्रा को उनका पूरक बनाना और उपयोगकर्ताओं को भुगतान के लिए एक अतिरिक्त विकल्प देना है। इसका मकसद किसी भी तरह से मौजूदा भुगतान प्रणालियों को बदलना नहीं है.। यानी आपके लेन-देन पर इसका कोई असर नहीं होने वाला है।

RBI को सीबीडीसी की शुरूआत से कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है, जैसे कि नकदी पर निर्भरता कम होना, मुद्रा प्रबंधन की कम लागत और निपटान जोखिम में कमी। यह आम जनता और व्यवसायों को सुरक्षा और तरलता के साथ केंद्रीय बैंक के पैसे का एक सुविधाजनक, इलेक्ट्रॉनिक रूप प्रदान कर सकता है और उद्यमियों को नए उत्पाद और सेवाएं बनाने के लिए एक मंच प्रदान कर सकता है।

डिजिटल करेंसी के फायदे

देश में आरबीआई की डिजिटल करेंसी (E-Rupee) आने के बाद आपको अपने पास कैश रखने की जरूरत नहीं होगी। डिजिटल करेंसी आने से सरकार के साथ आम लोगों और बिजनेस के लिए लेनदेन की लागत कम हो जाएगी। ये फायदे भी होंगे

बिजनेस में पैसों के लेनदेन का काम हो जाएगा आसान।

CBDC द्वारा मोबाइल वॉलेट की तरह सेकंडों में बिना इंटरनेट के ट्रांजैक्शन होगा

चेक, बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन का झंझट नहीं रहेगा।
नकली करेंसी की समस्या से छुटकारा मिलेगा।

पेपर नोट की प्रिंटिंग का खर्च बचेगा
एक डिजिटल मुद्रा की जीवन रेखा भौतिक नोटों की तुलना में अनिश्चित होगी

CBDC मुद्रा को फिजिकल तौर पर नष्ट करना, जलाया या फाड़ा नहीं जा सकता है

अन्य क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में डिजिटल रुपये का एक अन्य प्रमुख लाभ यह है कि इसे एक इकाई द्वारा विनियमित किया जाएगा, जिससे बिटकॉइन जैसी अन्य आभासी मुद्राओं से जुड़े अस्थिरता जोखिम को कम किया जा सकेगा।

क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल रुपी में अंतर

क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह से प्राइवेट है। इसे कोई मॉनिटर नहीं करता और इस पर किसी सरकार या सेंट्रल बैंक का कंट्रोल नहीं होता। ऐसी करेंसी गैरकानूनी होती हैं। लेकिन, RBI की डिजिटल करेंसी पूरी तरह से रेगुलेटेड है, जिसके सरकार की मंजूरी होगी। डिजिटल रुपी में क्वांटिटी की भी कोई सीमा नहीं होगी। फिजिकल नोट वाले सारे फीचर डिजिटल रुपी में भी होंगे। लोगों को डिजिटल रुपी को फिजिकल में बदलने की सुविधा होगी। क्रिप्टोकरेंसी का भाव घटता-बढ़ता रहता है, लेकिन डिजिटल रुपी में ऐसा कुछ नहीं होगा।

अर्थव्यवस्था को होगा फायदा

भारत में मुद्रा का डिजिटलीकरण मौद्रिक इतिहास में अगला मील का पत्थर है। ट्रांजेक्शन कॉस्ट घटने के अलावा CBDC की सबसे खास बात है कि RBI का रेगुलेशन होने से मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग, फ्रॉड की आशंका नहीं होगी। इस डिजिटल करेंसी से सरकार की सभी अधिकृत नेटवर्क के भीतर होने वाले ट्रांजेक्शंस तक पहुंच हो जाएगी। सरकार का बेहतर नियंत्रण होगा कि पैसा कैसे देश में प्रवेश करता है क्रिप्टोकरेंसी का आगमन और प्रवेश करता है, जो उन्हें भविष्य के लिए बेहतर बजट और आर्थिक योजनाओं के लिए जगह बनाने और कुल मिलाकर अधिक सुरक्षित वातावरण बनाने की अनुमति देगा।

डिजिटल रुपया (e ₹) प्रणाली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगी, जिसका बड़ा सकारात्मक असर पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

क्या Bitcoin समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी आज भी देश में प्रतिबंधित है? सरकार ने दी पूरी जानकारी

Cryptocurrency in India: क्या यह सच है कि प्रतिबंध के बावजूद देश में क्रिप्टोकरेंसी का अवैध कारोबार आज भी जारी है, अगर हां , तो क्या सरकार का इसमें शामिल जोखिम को देखते हुए इस संबंध में सख्त दिशानिर्देश जारी करने का विचार है.

क्या Bitcoin समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी आज भी देश में प्रतिबंधित है? सरकार ने दी पूरी जानकारी

क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि बिटक्वॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया की सरकार करेंसी छापेगी तो इसकी वैल्यू में गिरावट आएगी. इसके कारण महंगाई दर बढ़ेगी. उन्होंने जिम्बावे जैसे देशों का उदाहरण दिया और कहा कि वहां महंगाई दर दस हजार पर्सेंट से भी ज्यादा है. वहां ब्रेड की कीमत आज 50 पाउंड है तो कल इसकी कीमत 500 पाउंड हो जाती है. ऐसे में अगर एक ब्रेड की कीमत 1 बिटक्वॉइन फिक्स की जाती है और रोजाना आधार पर यही रेट रहता है तो लोग ऐसी किसी क्रिप्टोकरेंसी को एक्सेप्ट करेंगे. मुझे लगता है कि ऐसे ही कारणों के कारण क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता बढ़ गई है. दूसरे पहलुओं को लेकर उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी के कारण दुनिया भर की सरकारें और सेंट्रल बैंक इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें पावर में कमी महसूस हो रही है.

एक बार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर फिर से चर्चाएं तेज हो गई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के प्रतिबंध को लेकर नया कानून लाने जा रहा है. इस कानून के बाद किसी भी ट्रेडिंग पर जुर्माना लगाएगा जाएगा. साथ ही, यहां तक ​​कि इस तरह की डिजिटल संपत्ति भी रखेगा. हाल में इसको लेकर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है.

सबसे पहले जानते हैं क्रिप्टोकरेंसी के बारे में…

डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. बिटकॉइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो.

बिटकॉइन (Bitcoin) भी क्रिप्टोकरेंसी है. इसे सातोशी नकामोति ने 2008 में बनाया था. हालांकि आजतक यह नहीं पता चल पाया है कि सातोशी नकामोति कौन है.

इसे पहली बार 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया था. इसको कोई बैंक या सरकार कंट्रोल नहीं करती है.

भारत में रिजर्व बैंक ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाज़त दे दी है. यानी भारत में भी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त हो सकती है.

क्रिप्टोकरेंसी का मुनाफा काफ़ी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता.

साल 2009 में जब बिटकॉइन को लांच किया गया था तब उसकी वैल्यू 0 डॉलर थी. 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची. लेकिन आज एक बिटकॉइन का रेट करीब 43 लाख रुपये के करीब है.

आइए जानें सरकार का क्या कहना है?

वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में बताया कि बिटकॉइन, सहित सभी क्रिप्टोकरेंसी के साथ जुड़े जोखिमों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 अप्रैल , 2018 को एक परिपत्र के माध्यम से देश की सभी संस्थाओं को सलाह दी है कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कोई भी काम नहीं करें.

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 04 मार्च , 2020 को अपने एक फैसले में 2018 के डब्ल्यूपी ( सी ) सं . 528 और 2018 के डब्ल्यूपी ( सी ) सं . 373 में दिनांक 06 अप्रैल , 2018 के उपर्युक्त परिपत्र को खारिज कर दिया है.

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2018-19 के बजट भाषण में यह घोषणा की गई कि सरकार क्रिप्टो करेंसियों को वैध मुद्रा या सिक्का नहीं मानती और इन क्रिप्टो के उपयोग को समाप्त करने के लिए सरकार सभी उपाय करेगी.

सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने हेतु ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी का सक्रिय रूप से उपयोग करके उसका पता लगाएगी.

अब क्या है सरकार की तैयारी

क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने को लेकर केंद्र सरकार ने एक कमेटी बनाई है. देश में अभी प्रचलित सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. सिर्फ सरकार के पास ही इसे चलाने का अधिकार होगा.

इसको लेकर विशिष्ट कार्रवाई करने के प्रस्ताव के लिए सचिव ( आर्थिक कार्य ) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय स्तरीय समिति का गठन किया गया है.

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