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ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ

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ट्रेडिंग अकाउंट सेटिंग कैसे बदलें

हॉय प्राइवेट एरिया आपको अपनी ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ लाइव अकाउंट सेटिंग्स में बदलाव का अनुरोध करने की अनुमति देता है.

आप खाता प्रकार और खाता लाभ उठा सकते हैं, अपने लाइव खातों की सूची के साथ पृष्ठ पर आवश्यक खाते के साथ लाइन पा सकते हैं। ऐसा करने के लिए, नीचे दिए गए निर्देशों का पालन करें:

  • लेफ्ट-पैरामीटर के मूल्य पर क्लिक करें और उस सूची में नए मूल्य का चयन करें जो खुलता है.
  • आप लाइन के नीचे दाएं छोर पर "वी" और "एक्स" प्रतीकों के साथ दो बटन देखेंगे - "वी" प्रतीक पर क्लिक करें और पैरामीटर परिवर्तन के लिए एक अनुरोध कंपनी के बैक ऑफिस में भेजा जाएगा; लाइन में पैरामीटर का वर्तमान मूल्य अनुरोध संख्या द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा (इस नंबर पर क्लिक करने से अनुरोध की स्थिति के साथ एक खिड़की खुलेगी, साथ ही अनुरोध रद्द करने की संभावना होगी)। हस्ताक्षर «X» पर क्लिक करने से अनुरोध रद्द हो जाएगा.

आप मानक से शुरुआत (या माइक्रो) तक खाते के प्रकार को बदल सकते हैं, या इसके विपरीत (लेकिन आप फिक्स्ड ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ स्प्रेड उपप्रकार को फ्लोटिंग स्प्रेड में नहीं बदल सकते हैं, और इसके विपरीत)। इसके अलावा, आप मेटाट्रेडर 5 खातों के लिए हेजिंग उपप्रकार को जाल में नहीं बदल सकते हैं, और इसके विपरीत।.

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मानक से शुरुआत (या माइक्रो) में स्विच करते समय, शुरुआत (या माइक्रो) खाते की स्वीकार्य अधिकतम इक्विटी पर विचार करना आवश्यक है.

आप डेमो खाते के खाते का लाभ बदल सकते हैं। इसके अलावा, आप के अंत में मेनू बार पर "डिलीट अकाउंट" फ़ंक्शन द्वारा डेमो खाते को हटा सकते हैं

ये अनुरोधों को कंपनी के काम के घंटों (आमतौर पर 10-15 मिनट के भीतर) के दौरान कंपनी के बैक-ऑफिस द्वारा माना जाता है.

आप आपके अनुरोध की स्थिति "अनुरोध" अनुभाग में देख सकते हैं। अनुरोध का विवरण देखने के लिए "देखें सभी अनुरोध " लिंक का पालन करें।.

ट्रेडिंग अकाउंट में लाखों ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ रुपए के नुकसान से बचना है तो गलती से भी न भूलें इन टिप्स को

हाल के दिनों में फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आपको इनसे बचकर रहने की जरूरत है। अगर आप थोड़ी सी भी चूक होगी तो आपको लाखों रुपए का चूना लग सकता है। आजकल शेयर मार्केट में ट्रेडिंग में सभी लोगों.

ट्रेडिंग अकाउंट में लाखों रुपए के नुकसान से बचना है तो गलती से भी न भूलें इन टिप्स को

हाल के दिनों में फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आपको इनसे बचकर रहने की जरूरत है। अगर आप थोड़ी सी भी चूक होगी तो आपको लाखों रुपए का चूना लग सकता है। आजकल शेयर मार्केट में ट्रेडिंग में सभी लोगों की दिलचस्पी होती है और आप में से बहुत लोग शेयर बाजार में ट्रेडिंग भी करते होंगे, आपके ट्रेडिंग अकाउंट में काफी स्टॉक्स होंगे और उनकी वैल्यू भी काफी होगी। ऐसे में अगर आप सावधानी नहीं रखेंगे तो आपको लाखों रुपए का नुकसान होने की आशंका है। हम आपको बता रहे हैं, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते समय किन बातों को गलती से भी नहीं भूलना चाहिए-

> केवल ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ रेजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के साथ ही व्यवहार/अनुबंध करें - जिस ब्रोकर के साथ आप लेन-देन कर रहे हों, उसके रेजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जाँच कर लें।

> फिक्सड/गारंटीकृत/नियमित रिटर्न/कैपिटल प्रोटेक्शन प्लान्स से सावधान रहें। ब्रोकर या उनके औथोरइज्ड व्यक्ति या उनका कोई भी प्रतिनिधि/कर्मचारी आपके इन्वेस्ट पर फिक्सड/गारंटीकृत/नियमित रिटर्न/कैपिटल प्रिजरवेसन देने के लिए औथोरइज्ड नहीं है या आपके द्वारा दिये गए पैसो पर ब्याज का भुगतान करने के लिए आपके साथ कोई लोन समझौता करने के लिए औथोरइज्ड नहीं है। कृपया ध्यान दें कि आपके खाते में इस प्रकार का कोई व्यवहार पाए जाने पर आपका दिवालिया/निष्कासित ब्रोकर संबंधी दावा निरहन कर दिया जाएगा।

> कृपया आपने 'केवाईसी' (KYC) पेपर में सभी जरूरी जानकारी खुद भरें और ब्रोकर से अपने 'केवाईसी' पेपर की नियम अनुसार साइन की हुई प्रति प्राप्त करें। उन सभी शर्तों की जांच करें जिन्हें आपने सहमति और स्वीकृति दी है।

> सुनिश्चित करें कि आपके स्टॉक ब्रोकर के पास हमेशा आपका नया और सही कांटैक्ट डिटेल हो जैसे ईमेल आईडी/मोबाइल नंबर। ईमेल और मोबाइल नंबर जरूरी है और एक्सचेंज रिकॉर्ड में अपडेट के लिए आपको अपने ब्रोकर को मोबाइल नंबर देना होगा। यदि आपको एक्सचेंज/डिपॉजिटरी से नियमित रूप से संदेश नहीं मिल रहे हैं, तो आपको स्टॉक ब्रोकर/एक्सचेंज के पास इस मामले को उठाना चाहिए।

> इलेक्ट्रॉनिक (ई-मेल) कॉन्ट्रैक्ट नोट्स/फाइनेंशियल डिटेल्स का चयन सिर्फ तभी करें जब आप खुद कंप्यूटर के जानकार हों और आपका अपना ई-मेल अकाउंट हो और आप उसे प्रतिदिन/नियमित देखते हो।

> आपके द्वारा किए गए ट्रेड के लिए एक्सचेंज से प्राप्त हुए किसी भी ईमेल/एसएमएस को अनदेखा न करें। अपने ब्रोकर ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ से मिले कॉन्ट्रैक्ट नोट/अकाउंट के डिटेल से इसे वेरिफ़ाई करें। यदि कोई गड़बड़ी हो, तो अपने ब्रोकर को तुरंत इसके बारे में लिखित रूप से सूचित करें और यदि स्टॉक ब्रोकर जवाब नहीं देता है, तो एक्सचेंज/डिपॉजिटरी को तुरंत रिपोर्ट करें।

> आपके द्वारा निश्चित की गई अकाउंट के सेटलमेंट कि फ्रिक्वेन्सी की जांच करें। यदि आपने करेंट अकाउंट (running account) का ऑप्शन चुना है, तो कृपया कन्फ़र्म करें कि आपका ब्रोकर आपके अकाउंट का नियमित रूप से सेटलमेंट करता है और किसी भी स्थिति में 90 दिनों में एक बार ( यदि आपने 30 दिनों के सेटलमेंट का विकल्प चुना है तो 30 दिन) डिटेल्स भेजता है । कृपया ध्यान दें कि आपके ब्रोकर द्वारा डिफॉल्ट होने की स्थिति में एक्सचेंज द्वारा 90 दिनों से अधिक की अवधि के दावे एक्सैप्ट नहीं किए जाएंगे।

> डिपॉजिटरी से प्राप्त जॉइंट अकाउंट की जानकारी (Consolidated Account Statement- CAS) नियमित रूप से वेरिफ़ाई करते रहें और अपने ट्रेड/लेनदेन के साथ सामंजस्य स्थापित करें।

> कन्फ़र्म करें कि पे-आउट की तारीख से 1 वर्किंग डे के भीतर आपके खाते में धनराशि/सिक्योरिटी (शेयर) का पेमेंट हो गया हो। कन्फ़र्म करें कि आपको अपने ट्रेड के 24 घंटों के भीतर कॉन्ट्रैक्ट नोट मिलते हों।

> एनएसई की वेबसाइट पर ट्रेड वेरिफिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है जिसका उपयोग आप अपने ट्रेड के वेरिफिकेशन के लिए कर सकते हैं।

> ब्रोकर के पास अनावश्यक बैलेंस न रखें। कृपया ध्यान रहे कि ब्रोकर के दिवालिया निष्कासित होने पर उन खानों के दावे स्वीकार नहीं होंगे जिनमें 90 दिन से कोई ट्रेड ना हुआ हो।

> ब्रोकर्स को सिक्यूरिटि के ट्रांसफर को मार्जिन के रूप में स्वीकार करने की अनुमति नहीं है। मार्जिन के रूप में दी जाने वाली सिक्योरिटी ग्राहक के अकाउंट में ही रहनी चाहिए और यह ब्रोकर को गिरवी रखी जा सकती हैं। ग्राहकों को किसी भी कारण से ब्रोकर या ब्रोकर के सहयोगी या ब्रोकर के औथोरइज्ड व्यक्ति के साथ कोई सिक्यूरिटी रखने की अनुमति नहीं है। ब्रोकर केवल कस्टमर द्वारा बेची गई सिक्योरिटी के डिपोजिट करने के लिए ग्राहकों से संबंधित सिक्योरिटी ले सकता है।

> भारी मुनाफे का वादा करने वाले शेयर/सिक्योरिटी में व्यापार करने का लालच देकर ईमेल और एसएमएस भेजने वाले धोखेबाजों के झांसे में न आएं। किसी को अपना यूजर आईडी और पासवर्ड ना दें। आपके सारे शेयर या बैलेंस शून्य हो सकता है। यह भी हो सकता है कि आपके खाते में बड़ी राशि की वसूली निकल आए।

> पीओए (पावर ऑफ अटॉर्नी) देते समय सावधान रहें - सभी अधिकार जिनका स्टॉक ब्रोकर प्रयोग कर सकते हैं और समय सीमा जिसके लिए पीओए मान्य है, इसे स्पष्ट रूप से बताएँ। यह ध्यान रहे कि सेबी/एक्सचेंजों के अनुसार पीओए अनिवार्य / आवश्यक नहीं है।

> ब्रोकर द्वारा रिपोर्ट किए गए फंड और सिक्योरिटी बैलेंस के बारे में साप्ताहिक आधार पर एक्सचेंज द्वारा भेजे गए मैसेजों की जांच करें और यदि आप इसमें कोई अंतर पाते हैं, तो तुरंत एक्सचेंज को शिकायत करें।

> किसी के साथ पासवर्ड (इंटरनेट अकाउंट) शेयर न करें। ऐसा करना अपने सुरक्षित पैसे शेयर करने जैसा है।

> कृपया सेबी के रेजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के अलावा किसी औथोरइज्ड व्यक्ति या ब्रोकर के सहयोगी सहित किसी को भी ट्रेडिंग के उद्देश्य से फंड ट्रांसफर न करें।

डिस्क्लेमर- जानकारी आपको एनएसई से मिली सूचना के आधार पर है।

ट्रेडिंग क्या होती है? | ट्रेडिंग कैसे करें?

Trading kya hai in hindi

दोस्तों आप में से बहुत से लोग स्टॉक मार्केट में शेयर्स को खरीदने और बेचने का काम करते होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि ट्रेडिंग क्या होती है और इसके बारे में पूरी जानकारी है अगर नही?, तो आइये आज हम आपको ट्रेडिंग के बारे में पूरी जानकारी देते है तो जो कैंडिडेट इसके बारे में पूरी जानकारी चाहते है वो हमारे इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़े.

Trading kya hai in hindi

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Table of Contents

ट्रेडिंग क्या है (What is Trading in Hindi)

ट्रेडिंग एक तरह का बिज़नस ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ होता है किसी भी चीज़ को कम दाम में खरीदना और उसके दाम बढ़ जाने पर उसे बेच देना ट्रेडिंग कहलाता है. ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश्य किसी भी चीज़ को खरीद कर कम समय में लाभ कमाना होता है, इसीलिए ट्रेडिंग सबसे ज्यादा शेयर मार्किट में की जाती है और लोग डेली शेयर पर ट्रेडिंग करके हजारों और लाखों रूपये कमाते है.

Stock Market Trading भी इसी तरह का होता है जहाँ हम किसी वस्तु को खरीदते और बिक्री में फायदा लेते हैं ठीक उसी तरह स्टॉक मार्केट में वस्तु की जगह कंपनियों के शेयर को खरीद और बिक्री करके प्रॉफिट कमाया जाता है, ट्रेडिंग का समय 1 साल होता है यानि कि 1 साल के अंदर शेयर को खरीदना और बेचना होता है लेकिन अगर एक साल के बाद खरीदे गये शेयर्स को बेचते हैं तो इसे निवेश कहा जाता है यह एक तरह का ऑनलाइन बेस्ड बिजनेस होता है.

उदाहरण- अगर हम शेयर मार्केट में शेयर्स खरीदते हैं तो कोई दूसरा व्यक्ति उन शेयर्स को बेच रहा होगा. मान लीजिए कि आपने किसी होलसेल स्टोर से कोई सामान 50 खरीदा और उसके बाद में उसका दाम बढ़ने पर आपने उसे 60 रूपये में बेच दिया तो इसे ट्रेडिंग कहा जायेगा. वैसे तो Trading को काफी रिस्की कहा जाता है क्योंकि इसमें किसी को ये नही पता होता है कि कुछ समय बाद शेयर के भाव में क्या उतार-चढाव आएगा.

ट्रेडिंग कैसे करें?

ट्रेडिंग करना बहुत ही आसान होता है, ट्रेडिंग करने के लिए आपके पास ट्रेडिंग अकाउंट एवं डिमैट अकाउंट होना चाहिए, क्युकी ट्रेडिंग अमाउंट एवं डिमैट अकाउंट के बिना आप ट्रेडिंग नही कर सकते हैं. उसके बाद आपको ट्रेडिंग अकाउंट की मदद से शेयर मार्केट से शेयर को कम दामों में खरीदना होता है और उस शेयर की कीमत बढ़ जाने पर उसे ज्यादा दाम में बेच कर मुनाफा कमाना होता है.

शेयर मार्केट ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते है?

शेयर मार्केट ट्रेडिंग मुख्यतः 4 तरह की होती है?

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday trading)

इंट्राडे ट्रेडिंग एक ऐसी ट्रेडिंग होती है जो एक ही दिन के अंदर की जाती है, इसमें एक ही दिन के अंदर शेयर्स को मार्केट में खरीदा और बेचा जाता हैं. एक ही दिन के अंदर की जाने वाली इस ट्रेडिंग को हम इंट्राडे ट्रेडिंग या फिर डे ट्रेडिंग भी कह सकते है.

स्विंग ट्रेडिंग (Swing trading)

स्विंग ट्रेडिंग मे शेयर्स को खरीदकर कुछ दिनो या ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ कुछ हप्तो के अंदर बेचा जाता है इसे ट्रेडिंग किंग भी कहा जाता है. ये ट्रेडिंग इंट्राडे की तरह नही होती है लेकिन इसमे आप अपना टारगेट प्राईस लगाकर नुकसान और फायदे को आसानी से झेल सकते है, स्विंग ट्रेडिंग, इंट्राडे ट्रेडिंग और स्कैलपिंग ट्रेडिंग से काफी अलग होता है. क्योंकि स्विंग ट्रेडिंग को हम 1 दिन या 1 हफ्ते या फिर 1 महीने के लिए भी करते हैं.

शॉर्ट ट्रम ट्रेडिंग (Short term trading)

जब कोई ट्रेडिंग कुछ हप्तो से लेकर कूछ महिनो की होती है उसे शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग कहते है शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग मे एक एक्टिव ट्रेड इन्वेस्टमेंट होता है इसमें आपको अपने स्टॉक पर नजर रखनी होती है तभी आप अपने स्टॉक को मिनीमाइज कर सकते है.

लॉंग टर्म ट्रेडिंग (Long term trading)

जब कोई ट्रेडिंग एक साल या उससे ज्यादा समय में की जाती है तो उसे लॉंग टर्म ट्रेडिंग कहते है.

इसे भी पढ़े?

आज आपने क्या सीखा?

हमे उम्मीद है कि हमारा ये (Trading kya hai in hindi) ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ आर्टिकल आपको काफी पसन्द आया होगा और आपके लिए काफी यूजफुल भी होगा क्युकी इसमे हमने आपको ट्रेडिंग से रिलेटेड पूरी जानकारी दी है.

हमारी ये (Trading kya hai in hindi) जानकारी कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगो के साथ भी जरुर शेयर कीजियेगा.

TRADING ACCOUNT कैसे ओपन किया जाता है,

Zerodha

सबसे ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ पहली बात जो हमें याद रखनी चाहिए कि ट्रेडिंग अकाउंट स्टॉक ब्रोकर के पास खोला जाता है, और सभी स्टॉक ब्रोकर एक रजिस्टर्ड कंपनी होती है, और SEBI के अनुसार भारत में अभी तक लगभग 8 हजार स्टॉक ब्रोकर कम्पनी रजिस्टर्ड है,

ऐसे में अगर हमें ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करना है तो सबसे पहले हमें ये तय करना होता है कि हम किस ब्रोकर के पास अपना ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करे, आप नीचे दिए गए लिंक पर सभी रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर की लिस्ट को देख सकते है-

और इन सभी स्टॉक ब्रोकर में से हमें तय करना होगा कि हम किस ब्रोकर के पास अपना अकाउंट ओपन करे, किसी अन्य आर्टिकल में हम देखेंगे ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ की स्टॉक ब्रोकर का चुनाव कैसे करे,

फ़िलहाल यहाँ अगर आप एक बार ये तय कर लेते है कि आपको XYZ, किस ब्रोकर के पास अपना ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करना है, फिर आप उस कंपनी के नजदीकी ब्रांच ऑफिस में जाकर अकाउंट ओपनिंग फॉर्म भर कर दे सकते है, साथ आपको अपने कुछ KYC के DOCUMENTS और बैंक अकाउंट की डिटेल्स देनी होती है,

दूसरी तरफ आजकल अकाउंट ओपन करने के लिए आप स्टॉक ब्रोकर कम्पनी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म और और KYC डाक्यूमेंट्स की SCANNNED COPIES को आप उस फॉर्म के साथ अपलोड कर सकते है, और बाद में आप कूरियर की मदद से अपनी SELF ATTESTED KYC डाक्यूमेंट्स और ओरिजिनल FORM कम्पनी के पास भेज सकते है, और स्टॉक ब्रोकर कंपनी जैसे ही आपके डाक्यूमेंट्स को वेरीफाई कर लेती है, और फिर आपका ट्रेडिंग अकाउंट ओपन कर ट्रेडिंग अकाउंट के लाभ दिया जाता है,

यहाँ एक बात और ध्यान रखने वाली बात है कि, अधिंकाश केस में स्टॉक ब्रोकर कम्पनी ट्रेडिंग अकाउंट और DEMAT ACCOUNT साथ ही साथ ओपन कर देती है,

ट्रेडिंग अकाउंट को हम कैसे काम में लेते है,

ट्रेडिंग अकाउंट की मदद से ही हम स्टॉक मार्केट में किसी स्टॉक को खरीदने या बेचने का आर्डर अपने स्टॉक ब्रोकर को देते है,और फिर हमारा स्टॉक ब्रोकर हमारे आर्डर को स्टॉक एक्सचेंज तक पहुचाता है, और हमारा आर्डर कम्पलीट होने पर स्टॉक ब्रोकर हमें आर्डर कम्पलीट होने का कन्फर्मेशन और डिटेल्स भेज देता है,

आज ये सभी कम ऑनलाइन होता है, और इन्टरनेट की मदद से हमें स्टॉक ब्रोकर द्वारा दिए गए सॉफ्टवेयर की हेल्प से हम अपने ट्रेडिंग अकाउंट में लोग इन करके, उसमे फण्ड को पहले ऐड करते है, फिर स्टॉक खरीदने का आर्डर दे सकते है, और आर्डर कम्पलीट होने पर हमारे ट्रेडिंग अकाउंट से पैसे कट जाते है, और हमें स्टॉक मिल जाते है,

ठीक इसी तरह जब हम स्टॉक बेचते है, तो स्टॉक बेचने पर मिलने वाली धनराशी हमारे ट्रेडिंग अकाउंट में जमा हो जाती है,

TRADING ACCOUNT खोलने के लिए आवश्यक DOCUMENTS

TRADING ACCOUNT ओपन करने के लिए स्टॉक ब्रोकर कम्पनी द्वारा मांगे जाने वाले सामान्य डाक्यूमेंट्स

  1. Pan card
  2. Photographs: Passport Size Photograph
  3. Address proof: आधार कार्ड /Voter id/Pass port/Driving license
  4. Income proof: Recent six months bank statement, ITR Form-16, recent pay slip any one
  5. Bank proof: Cancel cheque

TRADING ACCOUNT फ़ीस कितना होता है,

ट्रेडिंग अकाउंट का फीस, सभी स्टॉक ब्रोकर का अलग अलग हो सकती है, अगर सामान्य बात की जाये तो 200 से लेकर 1000 रूपये या उस से ज्यादा भी हो सकता है,

ऐसे में हमें ट्रेडिंग अकाउंट ओपन करते समय, स्टॉक ब्रोकर का चुनाव करते समय ही स्टॉक ब्रोकर द्वारा अकाउंट खोलने के चार्जेज और ब्रोकरेज चार्ज और उसके द्वारा दी जाने वाली सारी सुविधाओं का ध्यान पहले ही रखना चाहिए,

जिस से की हमें ज्यादा फीस या ब्रोकरेज न देने पड़े.

अगर पोस्ट अच्छा लगा तो नीचे अपना कमेंट या सवाल जरुर लिखे,

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