Photo:INDUSTRIAL PRODUCTION

मुंबई की लाइफ स्टाइल सबसे बेस्ट, चेन्नै में महिलाओं से सबसे अच्छा व्यवहार, जानें रिसर्च में पटना के लिए क्या?

आईआईटी-बॉम्बे (IIT-Bombay) के शोधकर्ताओं ने भारत के शहरों में रहने वाले लोगों की जीवन शैली की एक लिस्ट (Urban Quality of life Index) जारी की है। इसमें भारत में लैंगिक एमएसीडी के साथ संकेतक की समानता समानता का भी जिक्र किया गया है। इसके तहत चेन्नै को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगहों में सबसे ऊपर रखा गया है, जबकि बिहार के पटना शहर को सबसे कम अनुकूल बताया गया है।

Mumbai life

हाइलाइट्स

  • आईआईटी-बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने भारत के शहरों में रहने वाले लोगों की जीवन शैली की जारी की लिस्ट
  • चेन्नै को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगहों में सबसे ऊपर रखा, बिहार के पटना शहर को सबसे कम अनुकूल बताया
  • लाइफ स्टाइल की बात करें तो कुल मिलाकर 14 शहरों की लिस्ट में मुंबई सबसे ऊपर, इसके बाद दिल्ली, कोलकाता और चेन्नै

लाइफ स्टाइल की बात करें तो कुल मिलाकर 14 शहरों की लिस्ट में मुंबई सबसे ऊपर है। इसके बाद दिल्ली, कोलकाता और चेन्नै का नंबर आता है। वहीं लैंगिक समानता की बात करें तो केवल चेन्नै, कोलकाता और मुंबई औसत स्कोर से आगे हैं, जबकि इंदौर, जयपुर और पटना औसत से नीचे हैं।

जयपुर में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर सबसे अधिक
एल्सेवियर पत्रिका में छापे एक लेख में कहा गया है, 'महिलाएं शहरों का अलग तरह से अनुभव करती हैं। स्थायी शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की जरूरतों को पूरा करना आवश्यक हो जाता है।' रिसर्च में पाया गया कि जयपुर में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर सबसे अधिक है, वहीं चेन्नै में सबसे कम है।

पुरुषों और महिलाओं के बीच साक्षरता दर में अंतर कोलकाता में सबसे कम
रिसर्च में पाया गया कि पुरुषों और महिलाओं के बीच साक्षरता दर में अंतर जयपुर में सबसे अधिक (13.2%) और कोलकाता में सबसे कम (5.4%) है। महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर पटना में सबसे अधिक है। यह शहरी औसत 73 के चार गुना से अधिक है।

पटना में केवल 36% शहरी घरों में ही ट्रीटेड पानी का उपयोग
शहरों की लाइफस्टाइल में बिजली, पानी, शिक्षा मूल बातें हैं। रिसर्च के अनुसार, पटना में केवल 36% शहरी घरों में ही ट्रीटेड पानी का उपयोग होता है। पुणे में साक्षरता सबसे अधिक (91%) और आश्चर्यजनक रूप से हैदराबाद में सबसे कम (83%) थी।

Navbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म. पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐप

World Humanitarian Day 2022: हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में इन मानव मूल्यों का रखा जाना चाहिए ध्यान

World Humanitarian Day: विश्व मानवीय दिवस को दुनिया भर में मानवीय कार्यों और मूल्यों को प्रोत्साहित करने के रूप में भी देखा जाता है. इस खास दिन को मनाए जाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीडिश प्रस्ताव के आधार पर किया गया है

World Humanitarian Day 2022: हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में इन मानव मूल्यों का रखा जाना चाहिए ध्यान

World Humanitarian Day: विश्व मानवीय दिवस हर साल 19 अगस्त को मनाया जाता है.

World Humanitarian Day 2022: विश्व मानवीय दिवस हर साल 19 अगस्त को मनाया जाता है. इस खास दिन पर उन लोगों को याद किया जाता है, जिन्होंने मानवीय उद्देश्यों के चलते दूसरों की मदद के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी. विश्व मानवीय दिवस को दुनिया भर में मानवीय कार्यों और मूल्यों को प्रोत्साहित करने के रूप में भी देखा जाता एमएसीडी के साथ संकेतक की समानता है. इस खास दिन को मनाए जाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीडिश प्रस्ताव के आधार पर किया गया है. इसके तहत किसी इमरजेंसी की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र देशों द्वारा आपस में सहायता के लिए मानवीय आधार पर पहल की जा सकती है. इस दिन को मुख्य रूप से साल 2003 में संयुक्त राष्ट्र के बगदाद, इराक स्थित मुख्यालय पर हुए हमले की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया था.

यह भी पढ़ें

यह दुनिया में मानवीय कार्यों एवं मानव-मूल्यों को प्रेरित करने वाली भावना का जश्न मनाने का भी एक अवसर है. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है जो दूसरों की सहायता करने में विपरीत परिस्थितियों को डटकर सामना कर रहें हैं और मानवता की रक्षा के लिये प्रतिबद्ध हैं. आज हम आपको बता रहें हैं कि, एक हेल्थ प्रोफेशनल के तौर पर आपको किन मानव मूल्यों को ध्यान में रखना चाहिए.

1) मरीज की स्थिति को समझना

करुणा मानवीय संबंधों के केंद्र में होनी चाहिए, करुणा का अर्थ है कि, दूसरों की स्थिति को समझना. एक हेल्थ फ्रोफेशनल को मरीज के स्वास्थ्य को बढ़ाने और दुखों को दूर करने के लिए आवश्यक उपचार और देखभाल के लिए खुद को प्रतिबद्ध करना चाहिए. इसके अलावा एक हेल्थ प्रोफेशनल में देखभाल करने की क्षमता, सहानुभूति की क्षमता, आत्म-जागरूकता की क्षमता, मदद करने और ठीक करने की प्रेरणा होना बेहद आवश्यक है.

2) अपने पेशेंट के लिए सम्मान

एक हेल्थ प्रोफेशनल को अपने मरीज का सम्मान करना चाहिए. इसके अलावा मरीज के दृष्टिकोण, उनकी सलाह, इच्छा और विश्वास का भी सम्मान करना चाहिए. वहीं मरीज या उनके परिजनों के भाषाई अंतर और गोपनीयता का सम्मान करना भी बेहद जरूरी है. वहीं एक हेल्थ प्रोफेशनल को अपनी टीम के सभी सदस्यों एमएसीडी के साथ संकेतक की समानता और सहयोगियों का सम्मान करना चाहिए साथ ही उनसे विनम्रता से पेश आना चाहिए.

flpg1g6o

3) ईमानदारी और विश्वसनीयता

हेल्थ प्रोफेशनल्स को अपने पेशेंट के प्रति ईमानदारी और विश्वसनीयता रखना बहुत ही आवश्यक है. हेल्थ प्रोफेशनल्स को ईमानदारी के साथ-साथ मरीज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही के लिए भी प्रतिबद्ध होना चाहिए. हेल्थ प्रोफेशनल्स को अपने रोगी की देखभाल और भलाई के लिए कार्य करना चाहिए. साथ ही ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि, मरीज को कभी कोई नुकसान न पहुंचें.

4) एक्सीलेंस के लिए प्रतिबद्धता

हेल्थ प्रोफेशनल्स को स्वास्थ्य एमएसीडी के साथ संकेतक की समानता सेवाओं के सभी पहलुओं में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए. उत्कृष्टता के बिना, चाहे कितनी भी अच्छी मंशा क्यों न हो, मरीज को बिल्कुल ठीक करने के प्रयास कम पड़ जाते हैं. हेल्थ प्रोफेशनल्स को अपने पेशेंट्स को सबसे प्रभावी देखभाल प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए. इसके अलावा रोगी के हित के लिए सर्वोत्तम सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए.

5) स्वास्थ्य सेवाओं में न्याय

एक हेल्थ प्रोफेशनल को स्वास्थ्य सेवाओं में न्याय के मूल्यों को अपनाना चाहिए. हेल्थ फ्रोफेशनल्स को कभी एमएसीडी के साथ संकेतक की समानता भी अपने मरीजों में असमानता या भेदभाव नहीं करनी चाहिए. उन्हें अपने पेशेंट्स को इलाज देने और ठीक करने में पूरा न्याय करना चाहिए. इसके अलावा अपने पेशे से भी पूरा न्याय किया जाना चाहिए. अपने पेशे में हर काम पूरी ईमानदारी व जबावदेही के साथ किया जाना चाहिए.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

सरकार और नागरिक सहभागिता के माध्यम से डिजिटल असमानता को समाप्त करना

भारत में डिजिटल सेवाओं और प्रौद्योगिकियों के प्रति जागरूकता और .

भारत में डिजिटल सेवाओं और प्रौद्योगिकियों के प्रति जागरूकता और इसकी पहुंच में कमी है। सरकार और विभिन्न हितधारक कैसे इस डिजिटल असमानता को कम करने में मदद कर सकते हैं?

3716192003694785a8140e6fe039042d

नया क्या है

अपने सपनों के डिजिटल इंडिया की अपनी पेंटिंग साझा करें।

परीक्षा पे चर्चा प्रतियोगिता 2023

चर्चा में

MyGov आइडिया बॉक्स

नानवॉयलेंट कम्यूनिकेशन पर ओरियंटेशन कोर्स

और एक नए भारत के निर्माण की दिशा में योगदान करना जारी रखें

© मेरी सरकार सेल द्वारा सामग्री का स्वामित्व, अपडेट और प्रबंधन किया जाता है। माईगव प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा डिजाइन, विकसित और होस्ट किया गया है। यह वेबसाइट माईगव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की है।

औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर लगातार दूसरे महीने घटी, जून में 4 महीने के निचले स्‍तर 2 प्रतिशत पर रही

जून महीने में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले साल के 6.90 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 1.20 प्रतिशत पर आ गई।

Edited by: India TV Paisa Desk
Updated on: August 09, 2019 19:13 IST

Industrial production growth slows to 4-month low of 2 pc in June- India TV Hindi

Photo:INDUSTRIAL PRODUCTION

Industrial production growth slows to 4-month low of 2 pc in June

नई दिल्‍ली। खनन और विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण जून महीने में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर गिरकर दो प्रतिशत पर आ गई। आधिकारिक आंकड़ों में शुक्रवार को इसकी जानकारी दी गई। पिछले साल जून में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) सात प्रतिशत की दर से बढ़ा था। इससे पहले आईआईपी की वृद्धि का निचला स्तर फरवरी में 0.20 प्रतिशत रहा था। आईआईपी मार्च में 2.7 प्रतिशत, अप्रैल में 4.30 प्रतिशत और मई में 4.60 प्रतिशत की दर से बढ़ा था।

मार्च में महंगाई बढ़कर हुई 2.86 प्रतिशत, फैक्‍ट्री उत्‍पादन में आई गिरावट

विनिर्माण गतिविधियों में सुस्‍ती, मार्च में औद्योगिक उत्‍पादन 23 माह के निचले स्‍तर 0.1% पर आया

मई में सुस्‍त पड़ी औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार, जून में खुदरा मुद्रास्‍फीति बढ़कर हुई 3.18 प्रतिशत

सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वित्त वर्ष की जून तिमाही में आईआईपी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 5.10 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 3.

60 प्रतिशत पर आ गई। जून महीने में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले साल के इसी माह के 6.90 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 1.20 प्रतिशत पर आ गई। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में इस बार जून में 6.5 प्रतिशत का संकुचन देखा गया। पिछले साल जून में इसमें 9.70 प्रतिशत की तेजी रही थी।

बिजली उत्पादन की वृद्धि दर भी 8.50 प्रतिशत से घटकर 8.20 प्रतिशत पर आ गई। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर 6.50 प्रतिशत से कम होकर 1.60 प्रतिशत पर आ गई। उपभोक्ता आधारित वर्गीकरण को देखें तो प्राथमिक वस्तुओं में 0.5 प्रतिशत की तथा माध्यमिक वस्तुओं में 12.4 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। निर्माण संबंधित वस्तुओं में 1.8 प्रतिशत का संकुचन हुआ। विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से आठ औद्योगिक समूहों जून महीने में सकारात्मक वृद्धि रही।

वृद्धि तेज करने के उपायों पर सरकार, आरबीआई के विचार मिलते-जुलते

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के विषय में भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की सोच में समानता है और इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने शुक्रवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते से वह कर उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में उद्योगपतियों से मिलेंगी और तुंरत मौके पर शिकायतों का निवारण करेंगी।

सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था में कुछ सुस्ती के बावजूद भारत सबसे तेजी से उभरती हई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। सरकार और आरबीआई आपस में तालमेल बैठाकर काम कर रहे हैं। यह व्यवस्था निवेश को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जरूरी प्रयास कर रहे हैं और इस संबंध में एक ही रास्ते पर हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई और सरकार के संबंधों में भारो और सौहार्द्र है। उन्होंने कहा कि सरकार कभी नहीं चाहेगी कि उद्योग क्षेत्र के लिए काई कठिनाई हो।

रेटिंग: 4.49
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 98