Active vs Passive Fund : कम लागत में लेना चाहते हैं ज्यादा मुनाफा, तो इस फंड में करें निवेश

Active vs Passive Funds: पिछले कुछ महीनों में निवेशकों इंट्रेस्ट पैसिव म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ा है. इसमें रिस्क कम होता है और लंबी अवधि में यह बेहतर रिटर्न देता है.

Active vs Passive Fund : कम लागत में लेना चाहते हैं ज्यादा मुनाफा, तो इस फंड में करें निवेश

Investment Tips : अगर आप शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करते हैं और इन डायरेक्ट रूप से निवेश करना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) इसका सबसे अच्छा तरीका पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स है. इसमें आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई रहता है जिसके कारण रिस्क भी कम रहता है. अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं तो रिटर्न मल्टी पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स फोल्ड होगा. म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं. पहला एक्टिव फंड और दूसरा पैसिव म्यूचुअल फंड. दोनों फंड में क्या अंतर है और निवेशकों को क्या करना चाहिए. इसके बारे में यहां पर आपको पूरी जानकारी दे जा रही है.

बता दें कि एक्टिव म्यूचुअल फंड में आपका पैसा फंड मैनेजर मैनेज करते हैं. किस सेक्टर के किस स्टॉक में पैसा लगाना है यह फंड मैनेजर के हाथ में होता है. दूसरी तरफ, पैसिव फंड बाजार को ट्रैक करता है. यह निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे इंडेक्स को ट्रैक करता है. ऐसे में जब बाजार में तेजी आती है तो पैसिव फंड का NAV यानी नेट असेट वैल्यु बढ़ जाती है. बता दें कि पैसिव फंड की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि इसका फंड मैनेजर नहीं होता है ऐसे में कॉस्ट बहुत कम होता है. लंबी अवधि में पैसिव फंड मोटा रिटर्न देते हैं. इस फंड की मदद से लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएट किया जा सकता है. इस फंड का डायवर्सिफिकेशन बहुत ज्यादा होता है जिसके कारण रिस्क कम होता है.

पैसिव फंड के प्रति बढ़ी है दिलचस्पी

पिछले कुछ महीनों में निवेशकों की रुचि पैसिव फंड की तरफ ज्यादा बढ़ी है. AMFI के हाल ही में आए आंकड़ों में इसके संकेत मिलते हैं. पैसिव फंड में मैनेजर की सक्रिय भूमिका नहीं होती है, इसलिए मैनेजमेंट फीस कम होने के चलते कम लागत होती है. एक्सपर्ट का कहना है कि एक्टिव फंड का टार्गेट मार्केट इंडेक्स से बेहतर रिटर्न प्राप्त करना होता है. वहीं, पैसिव फंड में निवेशक मार्केट इंडेक्स के हिसाब से रिटर्न की उम्मीद करते हैं. यही वजह है कि पैसिव फंड में एक्टिव म्यूचुअल फंड की तुलना में रिसर्च खर्च अधिक होता है, हालांकि एक्टिव की तुलना में कम लागत होती है. एक्टिव फंड में पैसिव की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है. जिसमें पैसों के ज्यादा नुकसान होने की उम्मीद रहती है.

Mutual Fund Tips: एक्टिव या पैसिव फंड में करें निवेश? जानिए कहां मिलेगा कम लागत पर ज्यादा मुनाफा

Active vs Passive Funds: पिछले कुछ महीनों में निवेशकों इंट्रेस्ट पैसिव म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ा है. इसमें रिस्क कम होता है और मार्केट इंडेक्स में शामिल कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाता है. लंबी अवधि में यह मोटा रिटर्न देता है.

Investment tips: अगर आप शेयर बाजार में इन डायरेक्ट रूप से निवेश करना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड इसका सबसे सही तरीका है. इसमें आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई रहता है पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स जिसके कारण रिस्क भी कम रहता है. अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेशित रहते हैं तो रिटर्न मल्टी फोल्ड होगा. म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं. पहला एक्टिव फंड और दूसरा पैसिव म्यूचुअल फंड. दोनों फंड में क्या अंतर है और निवेशकों को क्या करना चाहिए इसके बारे में जानते हैं Edelweiss एएमसी की सीईओ राधिका गुप्ता और वाइज इन्वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ हेमंत रुस्तगी से.

पैसिव फंड बाजार को ट्रैक करता है

एक्सपर्ट ने कहा कि एक्टिल म्यूचुअल फंड में आपका पैसा फंड मैनेजर मैनेज करते हैं. किस सेक्टर के किस स्टॉक में पैसा लगाना है यह फंड मैनेजर के हाथ में होता है. दूसरी तरफ, पैसिव फंड बाजार को ट्रैक करता है. यह निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे इंडेक्स को ट्रैक करता है. ऐसे में जब बाजार में तेजी आती है तो पैसिव फंड का NAV यानी नेट असेट वैल्यु बढ़ जाती है.

इसमें फंड मैनेजर नहीं होता है

पैसिव फंड की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि इसका फंड मैनेजर नहीं होता है ऐसे में कॉस्ट बहुत कम होता है. लंबी अवधि में पैसिव फंड मोटा रिटर्न देते हैं. इस फंड की मदद से लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएट किया जा सकता है. इस फंड का डायवर्सिफिकेशन बहुत ज्यादा होता है जिसके कारण रिस्क मिनिमम होता है.

पैसिव फंड के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है

एक्सपर्ट्स ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में निवेशकों की रुचि पैसिव फंड की तरफ बढ़ी है. AMFI के हाल ही में आए आंकड़ों में इसके संकेत मिलते हैं. पैसिव फंड में मैनेजर की सक्रिय भूमिका नहीं होती है, इसलिए मैनेजमेंट फीस कम होने के चलते कम लागत होती है.

मार्केट इंडेक्स से बेहतर रिटर्न की कोशिश

एक्सपर्ट का कहना है कि एक्टिव फंड का टार्गेट मार्केट इंडेक्स से बेहतर रिटर्न प्राप्त करना होता है. वहीं, पैसिव फंड में निवेशक मार्केट इंडेक्स के हिसाब से रिटर्न की उम्मीद करते हैं. यही वजह है कि पैसिव फंड में एक्टिव म्यूचुअल फंड की पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स तुलना में रिसर्च खर्च अधिक होता है, हालांकि, एक्टिव की तुलना में कम लागत होती है. एक्टिव फंड में पैसिव की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है.

सुविधा के हिसाब से करें निवेश

निवेश टिप्स को लेकर एक्सपर्ट ने कहा कि दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं. निवेश का फैसला रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से करना सही होता है. एक्टिव फंड में कुछ अधिक जोखिम होता है, जबकि पैसिव फंड में कम जोखिम और सस्ता भी है. पैसिव में फंड मैनेजर की भूमिका कम रहती है, वहीं एक्टिव फंड में रिस्क अधिक रहता है लेकिन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न संभव है.

Active vs Passive mutual funds: पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स कहां होगी दमदार इनकम, समझिए रिस्‍क-रिटर्न का कैलकुलेशन

Mutual fund risk and return: फंड मैनेजर म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम में आपके पैसे को एक्टिव या पैसिव दो तरीके से मैनेज करता है.

Active vs Passive mutual funds: अगर आप सीधे शेयर बाजार में निवेश से जुड़े जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं, तो म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम्‍स में निवेश बेहतर ऑप्‍शन है. म्‍यूचुअल फंड्स (mutual fund) में निवेश की अच्‍छी बात यह है कि इसमें एक डेडिकेटेड फंड मैनेजर निवेशक के पैसे को मैनेज करता है. इसमें फंड मैनजर यह तय करता है कि निवेशक के पैसे को किस एसेट क्‍लास (इक्विटी, गोल्‍ड, डेट, रीयल्‍टी) में कितना लगाना है. फंड मैनेजर म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम (mutual fund scheme) में आपके पैसे को एक्टिव या पैसिव दो तरीके से मैनेज करता है. अब यहां यह समझना जरूरी है कि एक्टिव फंड्स और पैसिव फंड्स की इन दो कैटेगरी में क्‍या फर्क है और निवेशक के लिए कहां ज्‍यादा रिटर्न मिलने की उम्‍मीद रहती है. साथ ही इनमें रिस्‍क फैक्‍टर क्‍या होते हैं.

Active vs Passive funds: क्‍या है इनमें अंतर

वेल्‍थ मैनेजमेंट कंपनी Fintoo के सीईओ मनीष पी. हिंगर का कहना है कि एक्टिव फंड्स ऐसे फंड्स होते हैं, जहां फंड मैनेजर फंड को एक्टिवली मैनेज करता है. इन फंड्स में फंड मैनेजर पोर्टफोलियो में खरीदने, बेचने या रीबैलेंसिंग पर तत्‍काल फैसले कर बाजार से बेहतर रिटर्न हासिल करने की कोशिश करता है. इसका मतलब कि एक्टिव रूप में मैनेज होने वाले फंड्स में फंड मैनेजर का रोल काफी ज्‍यादा होता है. वहीं, जब हम पैसिव फंड्स (passive funds) की बात करते हैं, तो इनमें फंड मैनेजर का ज्‍यादा रोल नहीं रहता है. वह सिर्फ एक इंडेक्‍स को दर्शाता है और कोई एक्टिव फैसले नहीं लेता है.

इसे ऐसे समझते हैं; इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स एक्टिव रूप से मैनेज होने वाले फंड हैं. जैसेकि इक्विटी फंड में फंड मैनेजर तय करेगा कि किस स्टॉक को कब पोर्टफोलियो में शामिल करना है, कब निकालना या कितने शेयर खरीदने हैं. वहीं, पैसिव फंड्स की बात करें तो इसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) या इंडेक्‍स फंड्स से समझ सकते हैं. ईटीएफ में फंड की परफॉर्मेंस इंडेक्स में होने वाले मूवमेंट के आधार ऊपर-नीचे होती है. इसमें फंड मैनेजर के पास कोई चेंज करने का अधिकार नहीं होता है.

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Active vs Passive funds: कहां ज्‍यादा रिस्‍क और ज्‍यादा रिटर्न

मनीष पी. हिंगर का कहना है कि एक्टिव फंड्स (active funds) का एक्‍सपेंश रेश्‍यो ज्‍यादा होता है. इनमें रिटर्न भी ज्‍यादा मिलने की उम्‍मीद रहती है. वहीं, एक्टिव फंड्स में रिस्‍क भी हाई रहता है. एक्टिव फंड्स चूंकि फंड मैनेजर की ओर से एक्टिव तरीके से मैनेज होते हैं, इसलिए इनमें बेंचमार्क इंडेक्‍स से ज्‍यादा मिलने की संभावना रहती है. दूसरी ओर, पैसिव फंड्स का एक्‍सपेंश रेश्‍यो काफी कम रहता है. इसलिए इनमें जोखिम और रिटर्न भी एक्टिव फंड्स के मुकाबले कम रहता है.

Active vs Passive funds: निवेश के लिए क्‍या बेहतर

मनीष हिंगर कहते हैं, निवेशक एक्विट फंड्स में पैसा लगाए या पैसिव फंड्स में, यह उसके जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है. अगर निवेशक में ज्‍यादा पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स रिस्‍क लेने की क्षमता है, तो वह एक्टिव फंड्स को चुन सकता है. इनमें उसे हमेशा बेंचमार्क इंडेक्‍स से ज्‍यादा रिटर्न मिलने की उम्‍मीद रहती है. वहीं, जो निवेशक कर रिस्‍क में बेहतर रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए पैसिव फंड्स बेहतर ऑप्‍शन हैं.

(डिस्‍क्‍लेमर: यहां किसी भी तरह से निवेश की सलाह पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स नहीं है. म्‍यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)

Active vs Passive Funds: जानें क्‍या है दोनों में अंतर और कहां निवेश करना होगा फायदेमंद

अधिकतर लोग म्‍यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. लेकिन उन्‍हें एक्टिव और पैसिव फंड के बारे में जानकारी नहीं होती है. इन दोनों तरह के निवेश के अपने फायदे हैं.

Active vs Passive Funds: जानें क्‍या है दोनों में अंतर और कहां निवेश करना होगा फायदेमंद

आज के समय में निवेशकों के पास भविष्‍य को वित्‍तीय रूप से सुरक्षित करने के लिए कई तरह के विकल्‍प मौजूद हैं. आमतौर पर जो लोग पहली बार निवेश करना शुरू करते हैं या स्‍टॉक मार्केट की समझ विकस‍ित करने की प्रक्रिया में होते हैं, वो म्‍यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) को चुनते हैं. इन्‍हीं म्‍यूचुअल फंड में दो बड़ी कैटेगरी है. इनमें से एक कैटेगरी का नाम एक्टिव फंड्स (Active Funds) और दूसरे का नाम पैसिव फंड्स (Passive Funds) है. आज हम आपको इसी बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं.

एक्टिस फंड्स: एक्टिव फंड मैनेजर का काम यह देखना होता है कि वे किस तरह से निवेश पर मुनाफा कमाएं. इसके लिए वे स्‍टॉक्‍स, बेंचमार्क और इंडेक्‍स की पूरी स्‍टडी करते हैं. आमतौर पर एक्टिव रूप से मैनेज किए जाने वाले फंड्स पर अधिक चार्ज लगता है. इसके लिए एनलिस्‍ट्स और रिसर्चर्स बेहद तत्‍परता से किसी स्‍टॉक को खरीदने या बेचने का फैसला लेते हैं. जिस फंड को किसी भी फंड मैनेजर द्वारा एक्टिवली मैनेज किया जाता है, उसे ही एक्टिव फंड कहते हैं.

पैसिव फंड्स: इस तरह के फंड में मार्केट इंडेक्‍स ट्रैक करने के बाद ही निवेश से जुड़े फैसले लिए जाते हैं. इसमें फंड मैनेजर किसी भी स्‍टॉक का फैसला असली एक्टिवली नहीं लिया जाता है. आमतौर पर, इसमें निवेश करना आसान होता है. इंडेक्‍स फंड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है, जिनके पास मार्केट को अच्‍छे से ट्रैक करने का समय नहीं होता है. इसके लिए ज्‍यादा रिसर्च की भी जरूरत नहीं होती है.

एक्टिव और पैसिव फंड्स में अंतर

  • एक्टिव फंड्स में निवेश करने का लक्ष्‍य मार्केट इंडेक्‍स से बेहतर रिटर्न प्राप्‍त करना होता है. वहीं, पैसिव फंड के निवेशक मार्केट इंडेक्‍स के हिसाब से ही होते हैं.
  • एक्टिव इन्‍वेस्टिंग में स्‍टॉक खरीद-बिक्री से जुड़े फैसले जल्‍दी लिए जाते हैं. छोटी अवधि में बाजार में तेजी का फायदा उठाया जाता है. जबकि पैसिव निवेश से पहले रिसर्च करने किया जाता है और चुने गए स्‍टॉक्‍स को लंबे समय तक होल्ड किया जाता है.
  • एक्टिव इन्‍वेस्टिंग में ज्‍यादा लेनदेन किया जाता है. पैसिव इन्‍वेस्टिंग की तुलना में एक्टिव इन्‍वेस्टिंग पर रिसर्च खर्च अधिक लगता है.
  • एक्टिव इन्‍वेस्टिंग पर कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स अधिक देना होता है. जबकि इसके पैसिव फंड पर कम कैपिटल टैक्‍स देना होता है.
  • एक्टिव रूप से इन्‍वेस्‍ट करना अधिक जोखिम भरा होता है लेकिन इसमें ज्‍यादा रिटर्न की संभावना भी होती है.

एक्टिव के मुकाबले पैसिव फंड्स का प्रदर्शन बेहतर

जानकारों की मानें तो रिटर्न में एक्टिव फंड्स के मुकाबले पैसिव फंड्स का प्रदर्शन बेहतर रहा है. पिछले साल में लॉर्ज कैप फंड्स ELSS फंड्स और मिड या स्मॉल कैप फंड्स का प्रदर्शन इनके बेंचमार्क की तुलना में क्रमश 100%, 80% और 53% कमजोर रहा था. पैसिव फंड्स का खर्च भी कम रहता है. यही कारण है कि निवेशकों को पैसिव फंड् में निवेश करना बेहतर विकल्‍प लगता है.

Active और Passive Mutual funds क्या है ?

Active और Passive Mutual Funds क्या है

Active Mutual Funds या फिर Passive Mutual Funds हमें किस में निवेश करना चाहिए ?

अगर आप यह सब सवाल के जवाब ढूंढ रहे है तो आप सही जगह पर आए है।

म्यूच्यूअल फंड्स में लम्बे समय के लिए निवेश करना बहुत ही बढ़िया तरीका है।

लेकिन अगर हम सही म्यूच्यूअल फंडस का चुनाव करे तभी हम अच्छा पैसा बना सकते है।

म्यूच्यूअल फंड्स का चुनाव करते वक्त हमारे मन में पैसिव फंड्स बनाम एक्टिव फंड्स अक्सर यह सवाल उठता है की हम कौनसे म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करे ?

Active Mutual Funds (in Hindi) या फिर Passive Mutual Funds.

इस लिए आज हम यह जानेंगे की Active Mutual Funds (in Hindi) और Passive Mutual Funds क्या होते है ?

Table of Contents

Active Mutual Funds क्या है ? :

Active Mutual Funds मे पैसो को किस समय और किन विकल्पों में या फिर कौनसे शेयर में निवेश करना है वह मैनेजर तय करता है।

Active Mutual Funds में फंड मैनेजर का लक्ष्य परिस्थिति के अनुसार निवेश कर के फंड जिस Index को follow कर रहा है उस से ज़्यादा रिटर्न देना होता है।

यह फंड में मैनेजर के साथ खोजकर्ता टीम (research team) होती है जो अलग अलग परिस्थिति के अनुसार किस समय कौनसे विकल्प मे ज्यादा मुनाफा मिल सकता है उसके बारे मे research करती है और fund manager को report देती है। जिस से Fund के निवेशको को अच्छे से अच्छा रिटर्न दिया जा सके और ज्यादा से ज्यादा निवेशक उस fund मे निवेश करे।

सामान्य म्यूच्यूअल फंड्स Active Mutual Funds के उदहारण है।

Passive Mutual Funds :

यह फंड अपने नाम की तरह ही Passively Managed होते है।

यानि फंड के पैसो का निवेश फंड के सूचक अंक में सामिल कंपनीओ में और उस अनुपात में ही होता है।

इस फंड का लक्ष्य लम्बे समय में फंड के सूचक अंक जितना रिटर्न लाना होता है।

ऐसे लक्ष्य के पीछे उनका विचार है की लम्बे समय में बाजार के सूचकांक से ज़्यादा रिटर्न कमाना मुस्किल है।

Index Funds और ETF Passive Mutual Funds के उदहारण है।

Active Mutual Funds (in Hindi) vs Passive Mutual Funds :

1) रिटर्न :

Passive Mutual Funds में मिलने वाला रिटर्न उस फंड के सूचक अंक के रिटर्न जितना या उस से कम ही होता है।

जबकी Active Mutual Funds में मिलने वाला रिटर्न ज्यादातर उस फंड के सूचक अंक के रिटर्न से ज़्यादा ही होता है। क्यूकी उसी के लिए तो Active Mutual Funds मे research team होती है जो अच्छे से अच्छा रिटर्न कहाँ मिल सकता है उसकी तलास मे रहती है।

2) Expense Ratio :

Passive Mutual Funds में Expense ratio बहुत ही कम होता है। क्यूकी उसमे Fund Manager को बहुत ज्यादा महेनत नहीं करनी होती और research team का भी कुछ काम नहीं होता। जिस से उनका शुल्क कम हो जाता है।

Active Mutual Funds in Hindi - Mutual Funds in Hindi

जबकी Active Mutual Funds में Expense ratio 2 प्रतिशत भी हो सकता है।

हमें कौनसे फंड में निवेश करना चाहिए ?

आप कौनसे फंड में निवेश करेंगे वो तो आपके बाजार के प्रति लक्ष्य पर निर्भर करता है।

दोनों तरह के फंड्स के अपने अपने लाभ और नुकसान है।

यदि आप Active Mutual Funds में निवेश करेंगे तो आपको ज़्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है।

लेकिन उन फंड्स में आपको फीस भी ज़्यादा देनी पड़ती है।

और अगर Passive Mutual Funds में निवेश करेंगे तो आपको कम रिटर्न मिलेगा लेकिन वह पर आपको फ़ीस भी बहुत कम देनी पड़ेगी।

Active Mutual Funds in Hindi - Mutual Funds in Hindi

इस लिए आप जीस भी फंड में निवेश करे तब यह सब कुछ ध्यान में रख कर ही करे।

उम्मीद करता हु की आपको Active Mutual Funds (in Hindi) के बारे में समझमे आ गया होगा।

आप कौनसे फंड में निवेश करना चाहते है वह हमें Comment Box में जरूर बताए।

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