विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम

Total CBM Resources

2,599.48

सीबीएम क्षमता का उपयोग करने के उद्देश्य से देश में मई, 2001 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक बोली के जरिए सीबीएम ब्लॉकों की पेशकश की गई थी। अभी तक सरकार ने चार बोली दौरों के तहत 30 सीबीएम ब्लॉक

State

Block

Operator

GIIP (BCM)

Ultimate Reserves
(BCM)

Balance Recoverable Reserves
(BCM)

Total (BCM)

294.814

75.589

72.477

राष्ट्रीय, निजी और संयुक्त उद्यम कंपनियों को प्रदान किए हैं। इसके अलावा, 2 सीबीएम ब्लॉक नामांकन आधार पर प्रदान किए गए थे और एक ब्लॉक विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) रूट के जरिए प्रदान किया गया था। ये सीबीएम ब्लॉक आंध्र प्रदेश, असम छत्तीस गढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिल नाडू और पश्चिम बंगाल राज्यों में हैं। दिनांक 01 अप्रैल, 2018 की स्थिति के अनुसार सीबीएम के मौजूद भंडार लगभग 280.3 बीसीएम (9.9 टीसीएफ) को विभिन्न प्रचालकों द्वारा प्रमाणित कर दिया गया है। सीबीएम भंडार के ब्लॉक-वार ब्यौरे निम्नानुसार हैं:

शेल गैस/तेल संसाधन

यह अनुमान है कि भारत में अनेक तलछटीय बेसिनों (गंगा के मैदान, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश तथा अन्य तटीय क्षेत्र) जिनमें हाइड्रोकार्बन पाए जाने वाले बेसिन – खंबात, असम-अराकान और दामोदर शामिल हैं, में शेल गैस और तेल के कुछ एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए अनुमान शेत तेल और गैस के लिहाज से प्रत्याशित हैं और निम्नानुसार हैं:
i. ओएनजीसी ने 5 बेसिनों नामत: खंबात, कृष्णा गोदावरी, कावेरी, गंगा और असम के लिए अगस्त, 2013 में 187.5 टीसीएफ शेल गैस संसाधनों का अनुमान लगाया है।
ii. सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) ने जुलाई, 2013 मेंमेंएक बेसिन नामत: गोडवाना के लिए 45.8 टीसीएफ शेल गैस संसाधनों का अनुमान लगाया है।
iii. जनवरी, 2011 में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएयजीएस) में तीन बेसिनों नामत: खंबात, केजी, और कावेरी में 6.1 टीसीएफ तकनीकी निकासी योग्य शेल गैस का अनुमान लगाया गया है।

गैस हाइड्रेट्स पूरे विश्व में गैर-पारंपरिक भावी ऊर्जा स्रोत हो सकता है। पूरे विश्व में गैस हाइड्रेट्स से गैस का उत्पादन अनुसंधान और विकास के चरण में है। यूएसए, जापान, रूस, चीन, जर्मनी और कोरिया इन प्रमाणित गैस हाइड्रेट्स भंडारों का दोहन करने के लिए एक प्रौद्योगिकी विकसित करने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। भारत में गैस हाइड्रेट संबंधी अनुसंधान और अन्वेषण कार्यकलाप राष्ट्रीय गैस हाइड्रेट कार्यक्रम (एनजीएचपी) के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किए जा रहे हैं। कृष्णा गोदावरी, महानदी, मन्नार की खाड़ी और अंडमान बेसिन में गैस हाइड्रेट की मौजूदगी प्रमाणित है।

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

भारत जीडीपी के संदर्भ में वि‍श्‍व की नवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है । यह अपने भौगोलि‍क आकार के संदर्भ में वि‍श्‍व में सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्‍या की दृष्‍टि‍ से दूसरा सबसे बड़ा देश है । हाल के वर्षों में भारत गरीबी और बेरोजगारी से संबंधि‍त मुद्दों के बावजूद वि‍श्‍व में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक के रूप में उभरा है । महत्‍वपूर्ण विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम समावेशी विकास प्राप्‍त करने की दृष्‍टि‍ से भारत सरकार द्वारा कई गरीबी उन्‍मूलन और रोजगार उत्‍पन्‍न करने वाले कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ।

इति‍हास

ऐति‍हासि‍क रूप से भारत एक बहुत वि‍कसि‍त आर्थिक व्‍यवस्‍था थी जि‍सके वि‍श्‍व के अन्‍य भागों के साथ मजबूत व्‍यापारि‍क संबंध थे । औपनि‍वेशि‍क युग ( 1773-1947 ) के दौरान ब्रि‍टि‍श भारत से सस्‍ती दरों पर कच्‍ची सामग्री खरीदा करते थे और तैयार माल भारतीय बाजारों में सामान्‍य मूल्‍य से कहीं अधि‍क उच्‍चतर कीमत पर बेचा जाता था जि‍सके परि‍णामस्‍वरूप स्रोतों का द्धि‍मार्गी ह्रास होता था । इस अवधि‍ के दौरान वि‍श्‍व की आय में भारत का हि‍स्‍सा 1700 ए डी के 22.3 प्रति‍शत से गि‍रकर 1952 में 3.8 प्रति‍शत रह गया । 1947 में भारत के स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात अर्थव्‍यवस्‍था की पुननि‍र्माण प्रक्रि‍या प्रारंभ हुई । इस उद्देश्‍य से वि‍भि‍न्‍न नीति‍यॉं और योजनाऍं बनाई गयीं और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्‍यम से कार्यान्‍वि‍त की गयी ।

1991 में भारत सरकार ने महत्‍वपूर्ण आर्थिक सुधार प्रस्‍तुत कि‍ए जो इस दृष्‍टि‍ से वृहद प्रयास थे जि‍नमें वि‍देश व्‍यापार उदारीकरण, वि‍त्तीय उदारीकरण, कर सुधार और वि‍देशी नि‍वेश के प्रति‍ आग्रह शामि‍ल था । इन उपायों ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को गति‍ देने में मदद की तब से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था बहुत आगे नि‍कल आई है । सकल स्‍वदेशी उत्‍पाद की औसत वृद्धि दर (फैक्‍टर लागत पर) जो 1951 - 91 के दौरान 4.34 प्रति‍शत थी, 1991-2011 के दौरान 6.24 प्रति‍शत के रूप में बढ़ गयी ।

कृषि‍

कृषि‍ भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ है जो न केवल इसलि‍ए कि‍ इससे देश की अधि‍कांश जनसंख्‍या को खाद्य की आपूर्ति होती है बल्‍कि‍ इसलि‍ए भी भारत की आधी से भी अधि‍क आबादी प्रत्‍यक्ष रूप से जीवि‍का के लि‍ए कृषि‍ पर नि‍र्भर है ।

वि‍भि‍न्‍न नीति‍गत उपायों के द्वारा कृषि‍ उत्‍पादन और उत्‍पादकता में वृद्धि‍ हुई, जि‍सके फलस्‍वरूप एक बड़ी सीमा तक खाद्य सुरक्षा प्राप्‍त हुई । कृषि‍ में वृद्धि‍ ने अन्‍य क्षेत्रों में भी अधि‍कतम रूप से अनुकूल प्रभाव डाला जि‍सके फलस्‍वरूप सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में और अधि‍कांश जनसंख्‍या तक लाभ पहुँचे । वर्ष 2010 - 11 में 241.6 मि‍लि‍यन टन का एक रि‍कार्ड खाद्य उत्‍पादन हुआ, जि‍समें सर्वकालीन उच्‍चतर रूप में गेहूँ, मोटा अनाज और दालों का उत्‍पादन हुआ । कृषि‍ क्षेत्र भारत के जीडीपी का लगभग 22 प्रति‍शत प्रदान करता है ।

उद्योग

औद्योगि‍क क्षेत्र भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लि‍ए विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम महत्‍वपूर्ण है जोकि‍ वि‍भि‍न्‍न सामाजि‍क, आर्थिक उद्देश्‍यों की पूर्ति के लि‍ए आवश्‍यक है जैसे कि‍ ऋण के बोझ को कम करना, वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश आवक (एफडीआई) का संवर्द्धन करना, आत्‍मनि‍र्भर वि‍तरण को बढ़ाना, वर्तमान आर्थिक परि‍दृय को वैवि‍ध्‍यपूर्ण और आधुनि‍क बनाना, क्षेत्रीय वि‍कास का संर्वद्धन, गरीबी उन्‍मूलन, लोगों के जीवन स्‍तर को उठाना आदि‍ हैं ।

स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात भारत सरकार देश में औद्योगि‍कीकरण के तीव्र संवर्द्धन की दृष्‍टि‍ से वि‍भि‍न्‍न नीति‍गत उपाय करती रही है । इस दि‍शा में प्रमुख कदम के रूप में औद्योगि‍क नीति‍ संकल्‍प की उदघोषणा करना है जो 1948 में पारि‍त हुआ और उसके अनुसार 1956 और 1991 में पारि‍त हुआ । 1991 के आर्थिक सुधार आयात प्रति‍बंधों को हटाना, पहले सार्वजनि‍क क्षेत्रों के लि‍ए आरक्षि‍त, नि‍जी क्षेत्रों में भागेदारी, बाजार सुनि‍श्‍चि‍त मुद्रा वि‍नि‍मय दरों की उदारीकृत शर्तें ( एफडीआई की आवक / जावक हेतु आदि‍ के द्वारा महत्‍वपूर्ण नीति‍गत परि‍वर्तन लाए । इन कदमों ने भारतीय उद्योग को अत्‍यधि‍क अपेक्षि‍त तीव्रता प्रदान की ।

आज औद्योगि‍क क्षेत्र 1991-92 के 22.8 प्रति‍शत से बढ़कर कुल जीडीपी का 26 प्रति‍शत अंशदान करता है ।

सेवाऍं

आर्थिक उदारीकरण सेवा उद्योग की एक तीव्र बढ़ोतरी के रूप में उभरा है और भारत वर्तमान समय में कृषि‍ आधरि‍त अर्थव्‍यवस्‍था से ज्ञान आधारि‍त अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में परि‍वर्तन को देख रहा है । आज सेवा क्षेत्र जीडीपी के लगभग 55 प्रति‍शत ( 1991-92 के 44 प्रति‍शत से बढ़कर ) का अंशदान करता है जो कुल रोजगार का लगभग एक ति‍हाई है और भारत के कुल नि‍र्यातों का एक ति‍हाई है

भारतीय आईटी / साफ्टेवयर क्षेत्र ने एक उल्‍लेखनीय वैश्‍वि‍क ब्रांड पहचान प्राप्‍त की है जि‍सके लि‍ए नि‍म्‍नतर लागत, कुशल, शि‍क्षि‍त और धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलनी वाली जनशक्‍ति‍ के एक बड़े पुल की उपलब्‍धता को श्रेय दि‍या जाना चाहि‍ए । अन्‍य संभावना वाली और वर्द्धित सेवाओं में व्‍यवसाय प्रोसि‍स आउटसोर्सिंग, पर्यटन, यात्रा और परि‍वहन, कई व्‍यावसायि‍क सेवाऍं, आधारभूत ढॉंचे से संबंधि‍त सेवाऍं और वि‍त्तीय सेवाऍं शामि‍ल हैं।

बाहय क्षेत्र

1991 से पहले भारत सरकार ने वि‍देश व्‍यापार और वि‍देशी नि‍वेशों पर प्रति‍बंधों के माध्‍यम से वैश्‍वि‍क प्रति‍योगि‍ता से अपने उद्योगों को संरक्षण देने की एक नीति‍ अपनाई थी ।

उदारीकरण के प्रारंभ होने से भारत का बाहय क्षेत्र नाटकीय रूप से परि‍वर्तित हो गया । वि‍देश व्‍यापार उदार और टैरि‍फ एतर बनाया गया । वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश सहि‍त वि‍देशी संस्‍थागत नि‍वेश कई क्षेत्रों में हाथों - हाथ लि‍ए जा रहे हैं । वि‍त्‍तीय क्षेत्र जैसे बैंकिंग और बीमा का जोरदार उदय हो रहा है । रूपए मूल्‍य अन्‍य मुद्राओं के साथ-साथ जुड़कर बाजार की शक्‍ति‍यों से बड़े रूप में जुड़ रहे हैं ।

आज भारत में 20 बि‍लि‍यन अमरीकी डालर (2010 - 11) का वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश हो रहा है । देश की वि‍देशी मुद्रा आरक्षि‍त (फारेक्‍स) 28 अक्‍टूबर, 2011 को 320 बि‍लि‍यन अ.डालर है । ( 31.विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम 5.1991 के 1.2 बि‍लि‍यन अ.डालर की तुलना में )

भारत माल के सर्वोच्‍च 20 नि‍र्यातकों में से एक है और 2010 में सर्वोच्‍च 10 सेवा नि‍र्यातकों में से एक है ।

केंद्र सरकार ने पेंशन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को _________ प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।

RBI Grade B Marksheet released for DEPR, DISM and General(DR) posts on 4th November 2022. Earlier, the RBI Grade B Final Result for these posts was declared. The RBI is conducting the RBI Grade B 2022 exam to recruit candidates for a total number of 294 vacancies. Candidates who are selected for the post will get a basic pay of Rs. 55,200/-. As the final result is released, the board will soon release the new notification for the RBI Grade B 2023 Recruitment.

डेली न्यूज़

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक अधिसूचना जारी कर विदेशी मुद्रा प्रबंधन (भारत के बाहर के किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का आदान-प्रदान अथवा उसे जारी करना) अधिनियम में अब तक किये गए 93 संशोधनों को एक ही अधिसूचना के अंतर्गत लाकर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम को सरल बना दिया है। विदित हो कि फेमा के मानदंडों को आसान बनाने से विदेशी निवेशकों के लिये देश में निवेश करना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • यह अधिनियम वर्ष 1999 से प्रभाव में आया था। वर्ष 1999 से अब तक इसमें 93 संशोधन हो चुके हैं।
  • कोई भी व्यक्ति जो भारत में निवेश करना चाहता है, इस अधिसूचना के माध्यम से यह जाने में सक्षम होगा कि वह किस कंपनी में तथा कैसे निवेश कर सकता हैं।
  • जारी नई अधिसूचना के तहत विदेशी निवेशों पर बनाए गए निम्नलिखित दो नियमों को एक साथ जोड़ दिया गया है-

→ FEMA 20 : इसे भारतीय कंपनी में किये गए विदेशी निवेश अथवा पार्टनरशिप अथवा सीमित देयता भागीदारी के रुप में जाना जाता है।
→ FEMA 24 : किसी पार्टनरशिप फर्म में हुए निवेश को FEMA 24 कहा जाता है।

  • इसमें में ‘लेट सबमिशन फी’ (late submission fee) का भी प्रावधान है। इसके अंतर्गत निवेशक को यह अनुमति होगी यदि उसे निवेश संबंधी सूचना जमा करने में कोई देरी होती है तो वह शुल्क का भुगतान करके इसके नियमों उल्लंघन करने से बचाव कर सकता है।
  • यदि इस संबंध में रिपोर्ट को समय पर जमा विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम नहीं किया जाता तो ज़िम्मेदार व्यक्ति अथवा संस्थान को लेट सबमिशन फी का भुगतान करना होगा जिसका निर्धारण केंद्र सरकार से विचार-विमर्श के बाद रिज़र्व बैंक द्वारा किउया जाएगा।
  • इसका प्रभाव व्यापक होगा क्योंकि अब तक रिज़र्व बैंक के पास जो भी उल्लंघन संबंधी मामले आते थे उनमें 60-70% मामले रिपोर्टिंग में हुई देरी के ही होते थे।
  • इसके अतिरिक्त, गैर- प्रवासी भारतीय से किसी गैर- प्रवासी को किया गया निवेश स्वचालित मार्ग के तहत लाया जाएगा और इसे दर्ज किया जाएगा। रिज़र्व बैंक को इससे संबंधित अनेक आवेदन प्राप्त हो रहे थे अतः इसने यह निर्णय लिया कि ऐसे निवेशों के लिये विनियामक की पूर्वानुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।

फेमा क्या है?

  • आर्थिक सुधारों तथा उदारीकृत परिदृश्‍य के प्रकाश में फेरा को एक नए अधिनियम द्वारा प्रतिस्‍थापित किया गया था, इसी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 कहा जाता है।
  • यह अधिनियम भारत में निवासी किसी व्‍यक्ति के स्‍वामित्‍वाधीन या नियंत्रण में रहने वाली भारत के बाहर की सभी शाखाओं, कार्यालयों तथा प्राधिकरणों पर लागू होता है।
  • फेमा की शुरुआत एक निवेशक अनुकूल विधान के रूप में की गई थी परन्तु यह एक अर्थ में पूर्णतया सिविल विधान है क्योंकि इसके उल्‍लघंन में केवल मौद्रिक शास्तियों तथा अर्थदंड का भुगतान करना ही शामिल है।
  • इसके तहत किसी व्‍यक्ति को सिविल कारावास का दंड तभी दिया जा सकता है यदि वह नोटिस विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम मिलने की तिथि से 90 दिन के भीतर निर्धारित अर्थदंड का भुगतान न करे परन्तु यह दंड भी उसे कारण बताओ नोटिस तथा वैयक्तिक सुनवाई की औपचारिकताओं के पश्‍चात् ही दिया जा सकता है।
  • फेमा को एक कठोर कानून (यानी फेरा) से उद्योग अनुकूल विधान अपनाने के लिये उपलब्ध कराई गई संक्रमण अवधि माना जा सकता है।
  • फेमा में केवल अधिकृत व्‍यक्तियों को ही विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूति में लेनदेन करने की अनुमति दी गई है। अधिनियम के अंतर्गत, ऐसे अधिकृत व्‍यक्ति का अर्थ अधिकृत डीलर, मनी चेंजर, विदेशी बैंकिंग यूनिट या कोई अन्‍य व्‍यक्ति जिसे उसी समय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत किया गया हो, से है।
  • फेमा के मुख्य उद्देश्‍य हैं:

→ विदेशी व्यापार तथा भुगतानों को आसान बनाना
→ विदेशी मुद्रा बाजार का अनुरक्षण और संवर्धन करना।

हमारी सहयोगी कंपनियां

इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनैंस कंपनी (यू.के) लिमिटेड को यूके कंपनी अधिनियम, 1985 के तहत फ़रवरी 2008 [कंपनी सं 6496661] में लन्दन में कंपनी रजिस्‍ट्रार इंग्लैंड तथा वेल्स से निगमित किया गया था जिसका उद्देश्‍य भारत में अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्‍वयन करने वाली भारतीय कंपनियों को ऋण प्रदान करना या ऐसे परियोजनाओं के लिए बाह्य वाणिज्यिक ऋणों को सह-वित्तपोषण करना है जो पूरी तरह से भारत के बाहर पूँजीगत व्यय के लिए है। कंपनी वित्तीय सेवाएँ प्राधिकरण, यू.के से पंजीकृत हैं जो अनुच्छेद-1 में यू.के. धनशोधन विनियमन, 2007 के अनुपालन के प्रयोजनार्थ वित्‍तीय संस्‍थान है| आई.आई.एफ.सी (यू.के) लिमिटेड की प्राधिकृत पूँजी 500 मिलियन अमरीकी डॉलर है तथा कंपनी की वर्तमान चुकता पूँजी 50 मिलियन अमरीकी डॉलर है|

http://www.iifc.org.uk

आईआईएफसीएल प्रोजेक्‍ट्स लिमिटेड

भारत में अवसंरचना क्षेत्र के संर्वधन एवं विकास के लिए केंद्र/राज्‍य सरकार, स्‍थानीय निकाय, परियोजना के विकासकों एवं अन्‍य पणधारकों को परामर्शी सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्‍य से फरवरी, 2012 में आईआईएफसीएल प्रोजेक्‍ट्स लि. (आईपीएल) की स्‍थापना की गयी थी।

यह कंपनी सड़क, राजमार्ग परियोजना, पत्‍तन, विमान पत्‍तन, अंतर्देशीय जलमार्ग या अंतर्देशीय पत्‍तन, जल आपूर्ति परियोजना, सिचाईं परियोजना, जल प्रशोधन प्रणाली, स्‍वच्‍छता तथा मल निर्यास प्रणाली या ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली, दूरसंचार सेवा, औद्योगिक पार्क या विशेष आर्थिक क्षेत्र, विद्युत, परिष्कृत कृषि-उत्पाद के संरक्षण तथा संग्रहण के लिए निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों का निर्माण इत्यादि जैसे अवसंरचना क्षेत्र के संपूर्ण क्षेत्र के लिए परामर्शी सेवाओं की मांग को पूरा करेगी| कंपनी उपरोक्‍त उल्लिखित क्षेत्रों में परियोजना मूल्‍यांकन, कर्ज समूहन, कार्य संपादन सलाहकार सेवाएं एवं परियोजना के विकास क्षेत्र में स्‍वयं को स्‍थापित करने की प्रक्रिया में है।

http://www.iifclprojects.com

आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटेड

आईआईएफसीएल ने आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड की स्‍थापना की एवं आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटेड (आईएएमसीएल) भी प्रवर्तित की। आईआईएमसीएल को म्‍यूचुअल फंड के माध्‍यम से स्‍थापित एसेट मैनेजमैंट कंपनी ऑफ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेब्‍ट फंड (आईडीएफ) के तौर कार्य करने के उद्देश्‍य से प्रवर्तित किया गया था। आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड का उद्देश्‍य भारत की अवसंरचना क्षेत्र में घरेलू व विदेशी निवेशकों को दीर्घावधि निवेश के लिए प्रभाव क्षेत्र (डोमेन) प्रदान करना है। आईआईएफसीएल एमएफ ने सेबी का अनुमोदन प्राप्‍त किया एवं आईआईएफसीएल को आईडीएफ के लिए एमएफ के एएमसी के तौर पर कार्य करने की भी मंजूरी दी गयी।

तदनुसार आईएएमसीएल ने म्‍यूचूअल फंड के माध्‍यम से लगभग 15 बिलियन रूपये के निवेश के साथ लगभग 1 बिलियन अमरीकी डॉलर की मूल निधि के लिए अन्‍य प्रयोजकों/निवेशकों के साथ आईआईएफसीएल म्‍यूचुअल फंड के तौर पर ज्ञात म्‍युचुअल फंड के माध्‍यम से एक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेब्‍ट फंड (आईडीएफ) की शुरूआत करने की प्रक्रिया प्रारंभ की। आईआईएफसीएल सेबी (म्‍युचुअल फंड) विनियमन, 1996 के अनुपालन में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेब्‍ट फंड विदेशी निवेश के संबंध में नियम और विनियम की योजनाओं में रणनीतिक निवेशकों के तौर पर अग्रणी बैंकों, गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों-अवसंरचना वित्‍त कंपनियों एवं बहुपक्षीय संस्‍थानों को आंमित्रित करने का इच्‍छुक रहता है।

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