यह भी प्रस्तुत किया गया कि विनियम समानता के अधिकार [अनुच्छेद 14] का भी उल्लंघन करते हैं, क्योंकि भारत में ऐसे कई बिजनेस हैं, जहां नागरिक बिना नियमन के परामर्श कर रहे हैं। इसके अलावा, आक्षेपित विनियम भी संविधान के भाग IV द्वारा गारंटीकृत राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के अनुसरण में नहीं हैं।

Corona Cases in India: 24 घंटे में सिर्फ 157 नए केस, एक्टिव मामलों में भी आई गिरावट

Equity Research Internship

Internship Description
Equity Research Training cum Internship
We are looking for candidates who're interested in Indian Stock market.
Qualification:
Any graduate from any discipline or any college student who's willing to learn about Indian stock market, MBA, CA, CFA, FRM students (anyone who's interested in gaining best in the industry hands on working experience in core finance domain)
Work from home
Weekly 12-13 hours you need to devote for the Internship
This is an Equity Research training come internship opportunity.
Here you'll be gaining best in the industry hands on working experience.
For the Training details you can visit our website:
www.equivaluesearch.com link is given below
https://equivaluesearch.com/equity-research-2/
Here We'll train you from the scratch.
Along with this there will be an unpaid internship opportunity where you can implement your learning and gain hands on working experience.
(There will be no stipend)
Duration: 6 weeks (1.5 months)
In this Equity Research Training cum Internship program we'll train you on 2 Sectors:
(a) Steel sector (b) Banking sector &
(c) Economic research
You'll be learning how to do
1. Economic Analysis (EIC Analysis)
2. Sectoral इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट Report writing
3. Equity Research Report Writing
4. Fundamental Analysis
5. Company result and news analysis etc.
Responsibilities:
1. Building equity research report
2. Covering daily news
3. Result analysis
4. Micro & macro analysis
5.EIC Analysis
6. Fundamental analysis
7. Sectoral Report writing
Perks:
After your इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट joining you'll receive an
1) Internship Offer letter
After the completion of the internship you'll receive an
2) Internship completion certificate
3) Letter of recommendation
You इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट can What's app your cv at:
9564867134
Please make sure you have gone through the internship details before applying for this opportunity.

मुक्त भाषण और व्यापार के अधिकार का उल्लंघन नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर लिस्टेड स्टॉक की जानकारी देने वाले एनालिस्टों के लिए SEBI की लाइसेंस की शर्त को बरकरार रखा

मुक्त भाषण और व्यापार के अधिकार का उल्लंघन नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर लिस्टेड स्टॉक की जानकारी देने वाले एनालिस्टों के लिए SEBI की लाइसेंस की शर्त को बरकरार रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से अपने रिसर्च एनालिस्टों के लिए, सोशल मीडिया पर स्टॉक से संबंधित सुझाव साझा करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता, रिसर्च एनालिस्टों के स्वतंत्र भाषण और व्यापार के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है।

जस्टिस रामचंद्र राव और जस्टिस हरमिंदर सिंह मदान की डिवीजन बेंच ने कहा कि उक्त आवश्यकता इंटरनेशल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटी कमीशंस (IOSCO) के उद्देश्यों और सिक्योरिटीज रेगुलेशन के सिद्धांतों के अनुरूप है- कि जो संस्थाएं निवेशकों को विश्लेषणात्मक या मूल्यांकन सेवाएं प्रदान करती हैं, उन्हें निरीक्षण और विनियमन के अधीन होना चाहिए..।

इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट

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म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले जान लें ये तीन रिस्क, फायदे में रहेंगे आप

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले जान लें ये तीन रिस्क, फायदे में रहेंगे आप

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) जैसे मार्केट लिंक्ड प्रोडक्ट में निवेश करते समय हम सभी को पहले इसमें हमेशा ही मौजूद रहने वाले जोखिमों को समझना होगा और फिर यह भी समझना होगा कि जोखिम को पूरी तरह से नष्ट या समाप्त नहीं किया जा सकता है, बल्कि इसे केवल कम या ट्रांसफर ही किया जा सकता है. रिस्क को ट्रांसफर करने का सीधा सा मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति आवश्यक सीमा तक रिटर्न (Return) प्राप्त करने के लिए अभी जोखिम नहीं लेता है. और अगर प्राप्त राशि सोची गई रकम से कम रह जाती है तो वह बाद में बहुत अधिक जोखिम उठा सकता है. दूसरी ओर जोखिम को कम करने का अर्थ है जहां तक संभव हो इसे कम करना और इस प्रकार परिणाम को सबसे बेहतर स्तर तक ले जाना.

स्ट्रैटेजी से कम करें रिस्क

पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड (PGIM India Mutual Fund) के सीईओ अजीत मेनन ने कहा, अलग-अलग प्रकार के जोखिमों की बात करें तो इक्विटी में शामिल जोखिमों को कम करने के लिए पर्याप्त रणनीतियां हैं. विभिन्न शेयरों, सेक्टर्स, निवेश शैलियों आदि पर पोर्टफोलियो को एक बिंदु तक डायवर्सिफाइड कर अव्यवस्थित जोखिम को कम किया जा सकता है, जबकि सिर्फ समय सीमा को बढ़ाकर और इक्विटी को पर्याप्त लंबे समय तक होल्ड कर ही व्यवस्थित जोखिम को एक हद तक कम किया जा सकता है. ये दोनों विचार पीजीआईएम इंडिया में हमारे पोर्टफोलियो निर्माण प्रक्रिया में शामिल हैं. हम कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों, कमाई के ट्रैक रिकॉर्ड और स्थिरता, दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य और पूंजी दक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हैं क्योंकि ये कुछ ऐसे कारक हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे पोर्टफोलियो में जोखिम काफी हद तक कम हो.

बिहेवियर रिस्क

तीसरे प्रकार का जोखिम जिसके बारे में विशेषज्ञ कम ही बात करते हैं, वह है बिहेवियर रिस्क. यह मनी मैनजर्स और इंन्वस्टर्स दोनों के रूप में हमारे पूर्वाग्रहों से संबंधित है. यह हमें डेटा को निष्पक्ष रूप से देखने से रोकता है और इस तरह त्रुटियां पैदा होती हैं. इनकी वजह से कभी-कभी पूंजी का स्थायी नुकसान हो सकता है. बेहतर रिटर्न की उम्मीद में उन शेयरों को होल्ड करने की प्रवृत्ति, जिनके फंडामेंटल में कमी आने के कारण उनके मूल्य में गिरावट आई है, ऐसा ही एक उदाहरण है. लोकप्रिय रूप से इसे डिसपोजीशन इफेक्ट के रूप में जाना जाता है, यहां हम अपने घाटे वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में रखते हुए अपने मुनाफे वाले शेयरों को बेचते हैं.

वास्तव में अन्य पहलू भी हैं जो हमारी मदद करते हैं जैसे इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट टीम जो कि आंतरिक रूप से अपने विभिन्न दृष्टिकोणों पर चर्चा करती है. यह बिहेवियर रिस्क में कमी लाने के लिए भी काम करती है, क्योंकि यहां विचारों पर विभिन्न प्रकार के दृष्टिकोण रखते हुए काफी गहन चर्चा की जाती है.

Explained: जानिए ऑटो सेक्टर में क्यों है मंदी, इस तरह है अच्छा मौका

Explained: जानिए ऑटो सेक्टर में क्यों है मंदी, इस तरह है अच्छा मौका

ऑटो सेक्टर में जारी मंदी की वजह से फिलहाल कई कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्श हैं। लंबी अवधि का नजरिया इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट रखने वाले निवेशकों के लिए यह खरीदारी का अच्छा मौका है, हालांकि इस सेक्टर में स्थिरता के लिए कुछ तिमाही और इंतजार करना पड़ सकता है।

दरअसल, वाहन बनाने वाली कंपनियों की मौजूदा मंदी ढांचागत नहीं, बल्कि चक्रीय है। ऐसा इएलिए है, क्योंकि भारतीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा है। ऐसा भी नहीं है कि ये फौरी दिक्कते हैं, जिनका निराकरण कुछ हफ्तों या महीनों में हो जाएगा। मौजूदा इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट हालात संकेत दे रहे हैं कि यह कमजोरी कुछ और तिमाही जारी रह सकती है। बावजूद इसके, निवेशकों को इसे एक मौके के तौर पर देखना चाहिए।

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