वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : [email protected]

सरकारी विज्ञापन का दावा और स्वाभाविक सवाल का जवाब नहीं

आज के अखबारों में उत्तर प्रदेश से संबंधित दो विज्ञापन हैं। एक उत्तर प्रदेश सरकार का दूसरा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का। दूसरा विज्ञापन केंद्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के मिशन का है। इस विज्ञापन में घोषणा की गई है, “12 नवंबर 2018, निर्मल गंगा की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम, वाराणसी शहर से अब 14 करोड़ लीटर प्रतिदिन दूषित पानी गंगा कौन से दलाल एसटीपी हैं? नदी में नहीं बहेगा।” सवाल उठता है कि वाराणसी का इतना पानी कहां कौन से दलाल एसटीपी हैं? जाएगा? इसके नीचे उतने ही बड़े अक्षरों में लिखा है, “नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री के कर कमलों द्वारा वाराणसी में सीवरेज परियोजनाओं का उद्घाटन, राम नगर में एसटीपी का शिलान्यास।”

इन बातों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मामला वाराणसी के सीवरेज को साफ करके गंगा में बहाने का है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि, “अब 14 करोड़ लीटर प्रतिदिन दूषित पानी गंगा नदी में नहीं बहेगा।” नहीं बहेगा तो इतने पानी का क्या किया जाएगा बताए बगैर बात पूरी नहीं होगी। इसलिए मानकर चला जाए कि सीवर के पानी को साफ करके गंगा में डालने की योजना है और यह बड़ा काम है। पर यही क्यों नहीं कहा जाए। इस तरह, “वाराणसी का प्रदूषित पानी या सीवर अब साफ करके गंगा में बहाया जाएगा”।

पहचान न खो दे पहाड़ों की नगरी

dungarpur

पहचान न खो दे पहाड़ों की नगरी
डूंगरपुर में भी गायब हो चुके हैं कई पहाड़
- खनन और आबादी विस्तार की भेंट चढ़ी कई डंूगरियां
डूंगरपुर.
पहाड़ों की नगरी के नाम से विख्यात डूंगरपुर जिला अपनी पहचान खोता जा रहा है। वैध, अवैध खनन और आबादी विस्तार के चलते एक के बाद एक पहाडिय़ां गायब हो रही हैं। हाल ही न्यायालय ने अरावली पर्वत शृंखला की कई पहाडिय़ां गायब होने की टिप्पणी की है। डूंगरपुर में तो यह स्थितियां बरसों से हो रही हैं, फिर भी शासन और प्रशासन आंखे मूंदे हुए हैं। उल्टे प्रशासन ही खनन एसटीपी (अल्पकालिन स्वीकृति) के नाम पर पहाड़ों को छलनी करने की स्वीकृतियां दे रहा है।
डूंगरपुर जिले में शहर के आसपास सहित दामड़ी, देवल, बिछीवाड़ा, चीखली, साबला, कौन से दलाल एसटीपी हैं? आसपुर सहित तकरीबन हर जगह पहाड़ों पर अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहे हैं। कहीं चुनाई पत्थर तो कहीं मिट्टी और कहीं क्रेशर गिट्टी के लिए पहाड़ के पहाड़ गायब कर दिए गए हैं।
डूंगरपुर सागवाड़ा मार्ग पर सरकण क्षेत्र में सडक़ के दोनों ओर देखते-देखते ही कई पहाडिय़ां जमीदोंज हो चुकी हैं। क्रेशर प्लान्ट संचालकों को नियमानुसार एक हैक्टेयर क्षेत्र की लीज जारी होती है, लेकिन कुछ ने आवंटित जमीन से कई अधिक क्षेत्र में खनन कर दिया। हालांकि बार-बार राजस्थान पत्रिका की ओर से समाचार प्रकाशित करने पर पिछले एक-डेढ़ साल में प्रशासन ने औपचारिकताएं पूर्ण कराकर एसटीपी जारी की हैं। डूंगरपुर जिले में क्रेशर की १२ लीज हैं। पिछले साल ३२ और इस साल ७ अल्पकालिन स्वीकृतियां जारी हुई हैं।
३९ केस, एक भी अवैध खनन का नहीं
खनन विभाग का काम अवैध खनन और परिवहन की मोनिटरिंग करना है, लेकिन विभागीय कार्मिकों की खनन माफिया से सीधी सांठगांठ है। जिले में इस साल कुल ३९ प्रकरण दर्ज हुए हैं, लेकिन इसमें से एक भी अवैध खनन का नहीं है, सभी अवैध परिवहन के हैं। इसमें भी ९९ प्रतिशत बजरी के हैं।
भूस्खलन का खतरा
शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित धनमाता पहाड़ी के पीछे अवैध खनन के चलते पहाडिय़ां छलनी हो चुकी हैं। इससे शहर पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा निजी खातेदारी जमीनों में भी बिना सक्षम स्वीकृति के पहाड़ काट दिए गए हैं। यही आलम मुरला गणेश मंदिर के आसपास भी है। वहां भी आबादी विस्तार के लिए कई पहाडिय़ों पर जेसीबी चल चुकी है।
कई जगह अवैध विस्फोट भी
खनन माफिया के हौंसले इतने बुलंद है कि कई जगह अवैध रूप से कौन से दलाल एसटीपी हैं? विस्फोट करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। खनन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोग आए दिन इन धमाकों से दहल उठते हैं।

नर्मदा में नहीं मिलेगा नालों का गंदा पानी, साठ फीसदी बने ट्रीटमेंट प्लांट

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5 एसटीपी प्लांट का लम्हेटा और भेड़ाघाट क्षेत्र में हो रहा है निर्माण
प्रभाकर मिश्रा@जबलपुर। नर्मदा को पंचवटी और लम्हेटाघाट में मिलने वाले नालों के गंदे पानी से मुक्ति मिलने वाली है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भेड़ाघाट के पंचवटी घाट में अभी तक नाले का गंदा पानी मिलता देखकर यहां आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक हैरान रह जाते थे। इन नालों का गंदा पानी नदी में मिलने से रोकने कौन से दलाल एसटीपी हैं? के लिए प्रदेश शासन की अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लगभग ग्यारह करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कर रही है। भेड़ाघाट और लम्हेटा क्षेत्र में पांच स्थान पर एसटीपी का प्लांट निर्माण किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पांचों प्लांट का निर्माण कार्य लगभग साठ प्रतिशत पूरा हो गया है। पांचों प्लांट के चालू हो जाने पर नर्मदा को 0.9 एमएलडी गंदा पानी मिलने से मुक्ति मिलेगी।
पांच स्थान पर मिलता है गंदा पानी
भेड़ाघाट नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले भेड़ाघाट के पंचवटी, लम्हेटा, लम्हेटाघाट, भड़पुरा, दलपतपुर में नालों का गंदा पानी नर्मदा में मिलता है। इनमें पंचवटी और लम्हेटा कौन से दलाल एसटीपी हैं? दोनों ऐसे प्वॉइंट हैं जहां ज्यादा मात्रा में गंदा पानी नर्मदा में मिलता है। इसके अलावा तीन और प्वाइंट पर रिहायशी इलाकों का गंदा पानी मिलता है। प्लांट के निर्माण से इन स्थानों पर मिलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट होगा। पानी का उपयोग उद्यानों से लेकर खेतों में सिंचाई के लिए हो सकेगा।
इनका कहना है-
25 साल तक की जनसंख्या को ध्यान में रखकर निर्माणनर्मदा में नाले-नालियों का गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए पांच एसटीपी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। निर्माणाधीन पांचों प्लांट की कुल क्षमता 0.9 एमएलडी है।
अभय जैन, प्रोजेक्ट प्रभारी

पानी बचाने के लिए भी हरियाणा का साथ देगा इजराइल, खेती को आगे बढ़ाने के लिए पहले से ही कर रहा काम

पानी बचाने के लिए भी हरियाणा का साथ देगा इजराइल, खेती को आगे बढ़ाने के लिए पहले से ही कर रहा काम

पानी बचाने के लिए धान की खेती को डिस्करेज कर रही हरियाणा सरकार अब जल संसाधन के क्षेत्र में इजराइल के साथ मिलकर काम करेगी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा में घटते जलस्तर और इजराइल में कम पानी की समस्या है, ऐसे में दोनों मिलकर तकनीक व अन्य विषयों पर काम कर सकते हैं. इससे हरियाणा व इजराइल में पानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. वो मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित अपने निवास स्थान पर जल संसाधन को लेकर इजराइल के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर रहे थे.

कृषि क्षेत्र में भी सहयोग कर रहा इजराइल

मनोहर लाल ने कहा कि इजराइल और हरियाणा दोनों ही पानी की चुनौती को समझते हैं. मुझे लगता है कि हमें मिलकर काम करने की जरूरत है. इजराइल पहले ही हरियाणा के साथ कृषि और बागवानी के क्षेत्र में सहयोग कर रहा है. हरियाणा में चार इंडो-इजराइल उत्कृष्टता केंद्र चल रहे हैं और पांचवा केंद्र भिवानी में बनाया जा रहा है. इसी तरह ड्रिप इरीगेशन में भारत की कुछ निजी कंपनियां इजराइल में कार्य कर रही हैं.

इजराइल के साथ मिलकर जल संसाधन एवं प्रबंधन विषय पर काम करने के लिए सीएम ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को एक टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि दोनों को एक दूसरे की तकनीक, अविष्कार और चुनौतियों से सीखने की जरुरत है. इसके लिए टास्क फोर्स काम करे. उन्होंने इजराइल के प्रतिनिधिमंडल का आह्वान किया कि वे ऐसे प्रोजेक्ट व प्लॉन हरियाणा में लेकर आएं जिससे पानी का सही इस्तेमाल किया जा सके. कम पानी में भी भूमि की ऊपजाऊ शक्ति को कायम रखा जा सके.

सुशासन दिवस के अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं

प्रश्न-25 दिसंबर‚ 2020 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा कई योजनाओं की घोषणा की गई। विकल्प में कौन से दलाल एसटीपी हैं? इस दिन घोषित योजनाओं में कौन योजना शामिल नहीं है?
(a) सूक्ष्म सिंचाई से हर खेत में पानी की योजना
(b) मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना
(c) हरियाणा जमा धन प्रत्याभूति योजना
(d) म्हारा गांव-जगमग गांव योजना
उत्तर—(d)
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