प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit – Indian Express)

Digital Currency Vs Cryptocurrency: डिजिटल करेंसी के क्या हैं फायदे? जानें क्रिप्टो करेंसी से कैसे अलग

नई दिल्ली: क्रिप्टो या डिजिटल मुद्राओं को लेकर दुनियाभर में दीवानगी है और भारत में भी एक अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में इसका देसी संस्करण पेश किया जाएगा, जो भौतिक रूप से प्रचलित मुद्रा के डिजिटल रूप को प्रतिबिंबित करेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में पेश आम बजट के मुताबिक ‘डिजिटल रुपया’ नामक यह मुद्रा, रिजर्व बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी किया जाएगा और इसे भौतिक मुद्रा के साथ बदला जा सकेगा.

वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट 2022-23 में डिजिटल रुपये को लेकर कई घोषणाएं की गई हैं. लेकिन कई लोग कंफ्यूज हैं कि अभी डिजिटल करेंसी को सरकार हां कर रही है लेकिन बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को ना क्यों कह रही है. इस अंतर को समझ कर ही हम डिजिटल करेंसी को समझते हैं.

डिजिटल और क्रिप्टो करेंसी में अंतर
विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल रुपये की अवधारणा बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी से प्रेरित है, लेकिन केंद्रीय बैंक के नियमों के साथ. यानी बिटक्वाइन अनियंत्रित होती है जबकि डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक की ओर से जारी की जाती है. क्रिप्टोकरेंसी का प्रबंधन एक कंप्यूटर एल्गोरिथम द्वारा किया जाता है. वहीं डिजिटल करेंसी को अथारिटी द्वारा नियंत्रित किया जाता है.

डिजिटल रुपये को सरकार की मान्यता मिली होती है. इसके साथ ही डिजिटल रुपया केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट में भी शामिल होगी और इसे देश की सॉवरेन करेंसी में बदला जा सकता है. प्रस्ताव है कि देश में डिजिटल करेंसी को बैंक नोट की परिभाषा में रखा जाए. इसके लिए RBI ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया है.

डिजिटल करेंसी के फायदे

  • तेज लेन-देन और नोट छापने की तुलना में कम खर्चीला
  • बाजार में करेंसी को सरकार सही से नियंत्रित कर पाएगी
  • बैंक खाते की जरूरत नहीं
  • ऑफलाइन लेन-देन संभव होगा.
  • हर डिजिटल रुपये पर सरकार की नजर होगी
  • कोई गैरकानूनी लेन-देन नहीं हो पाएगा

इसी के साथ आम बजट में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर लेन-देन को लेकर 30 प्रतिशत कर लगाने का फैसला लिया गया है. अपने बजट भाषण में सीतारमण ने ऐसी संपत्तियों को कर के दायरे में लाने के लिये इस संपत्ति की श्रेणी में एक सीमा से अधिक के लेन-देन पर एक प्रतिशत टीडीएस लगाने का भी प्रस्ताव किया.

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग ? जानिए क्रिप्टो माइनिंग का तरीका

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग ? जानिए क्रिप्टो माइनिंग का तरीका

क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) मैथड का उपयोग करने वाली क्रिप्टोकरेंसी के लिए ब्लॉकचेन में नए ट्रांजेक्शन को वैरिफाई करती है और जोड़ती है. इसमें प्रतियोगिता जीतने वाले माइनर को कुछ करेंसी / ट्रांजेक्शन फीस रिवार्ड के रूप में दी जाती है.

ज्यादातर लोग क्रिप्टो माइनिंग को केवल नए कॉइन बनाने का एक तरीका मानते हैं. हालांकि, क्रिप्टो माइनिंग का मतलब ब्लॉकचेन नेटवर्क पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन को वैलिडेट करना और उन्हें एक डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र में जोड़ना है. सबसे महत्वपूर्ण बात, क्रिप्टो माइनिंग एक डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क पर डिजिटल करेंसी के दोहरे खर्च (double-spending) को रोकती है.

इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं — क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) मैथड का उपयोग करने वाली क्रिप्टोकरेंसी के लिए ब्लॉकचेन में नए ट्रांजेक्शन को वैरिफाई करती है और जोड़ती है. इसमें प्रतियोगिता जीतने वाले माइनर को कुछ करेंसी / ट्रांजेक्शन फीस रिवार्ड के रूप में दी जाती है.

cryptocurrency mining

जैसा कि रोजमर्रा की बैंकिंग में होता है. फिजिकल करेंसी की तरह, जब एक मेंबर क्रिप्टोकरेंसी खर्च करता है, तो डिजिटल लेज़र को एक अकाउंट को डेबिट करके और दूसरे को क्रेडिट करके अपडेट किया जाना चाहिए. हालांकि, डिजिटल करेंसी के साथ समस्या यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को आसानी से हेरफेर किया जाता है. इसलिए, बिटकॉइन का डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र केवल वैरिफाइड माइनर्स को डिजिटल लेज़र पर ट्रांजेक्शन को अपडेट करने की अनुमति देता है. यह माइनर्स को नेटवर्क को दोहरे खर्च से बचाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी देता है.

इस बीच, नेटवर्क को सिक्योर करने में माइनर्स को उनके काम का रिवार्ड देने के लिए नए कॉइन बनाए जाते हैं. चूंकि डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र में सेंट्रलाइज्ड अथॉरिटी की कमी होती है, इसलिए ट्रांजेक्शन को वैलिडेट करने क्रिप्टो करेंसी के लिए माइनिंग प्रोसेस महत्वपूर्ण है. इसलिए, माइनर्स को ट्रांजेक्शन वैरिफिकेशन प्रोसेस में भाग लेकर नेटवर्क को सिक्योर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे नए बनाए गए कॉइन जीतने की संभावना बढ़ जाती है.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल वैलिफाइड क्रिप्टो माइनर ही ट्रांजेक्शन कर सकते हैं और वैलिडेट कर सकते हैं, एक प्रूफ-ऑफ-वर्क (proof-of-work - PoW) सर्वसम्मति प्रोटोकॉल लागू किया गया है. PoW किसी भी बाहरी हमले से नेटवर्क को सिक्योर रखता है.

अब ये प्रूफ-ऑफ-वर्क क्या है?

प्रूफ-ऑफ-वर्क एक ब्लॉकचेन सर्वसम्मति प्रोटोकॉल है, जिसके लिए एक गणितीय पहेली को हल करने के लिए एक माइनर की जरुरत होती है. बिटकॉइन और एथेरियम (वर्ज़न 2 से पहले) प्रूफ-ऑफ-वर्क मैथड का उपयोग करते हैं.

क्रिप्टो के अलावा, स्पैमर्स को रोकने के लिए, ईमेल के लिए PoW मैथड का एक बदलाव प्रस्तावित किया गया है. उदाहरण के लिए, यदि हर एक मैसेज को भेजे जाने से पहले केवल 15 सेकंड इंतजार करना पड़ता है, तो कंप्यूटर का उपयोग कभी भी हजारों मैसेज भेजने के लिए नहीं किया जा सकता है.

हालांकि, क्रिप्टो की दुनिया में प्रूफ-ऑफ-वर्क एक बहुत ही विवादास्पद विषय है. क्योंकि यह भारी मात्रा में बिजली का उपयोग करता है.

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क्यों करनी पड़ती है क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग?

जैसा कि अब आप जान ही गए होंगे कि क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग का उपयोग नए कॉइन बनाने के साथ-साथ मौजूदा ट्रांजेक्शन को वैलिडेट करने के लिए किया जाता है. ब्लॉकचेन की डिसेंट्रलाइज्ड प्रकृति धोखेबाजों को एक ही समय में एक से क्रिप्टो करेंसी अधिक बार क्रिप्टोकरेंसी खर्च करने की अनुमति दे सकती है, यदि कोई भी प्रमाणित ट्रांजेक्शन नहीं करता है. माइनिंग इस तरह की धोखाधड़ी को कम करती है और कॉइन में यूजर का विश्वास बढ़ाती है.

क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग के दो उद्देश्य हैं. यह नई क्रिप्टोकरेंसी तैयार करता है और यह ब्लॉकचेन पर मौजूदा क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन क्रिप्टो करेंसी की प्रामाणिकता की पुष्टि करता है.

ट्रांजेक्शन के एक ब्लॉक की पुष्टि करने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक माइनर की प्रतिपूर्ति (reimburse) की जाती है. और बदले में उन्हें नई तैयार की गई क्रिप्टोकरेंसी मिलती है.

कैसे होती है क्रिप्टो माइनिंग?

क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग के लिए विशेष सॉफ्टवेयर वाले कंप्यूटरों की जरुरत होती है जो विशेष रूप से जटिल, क्रिप्टोग्राफिक गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. टेक्नोलॉजी के शुरुआती दिनों में, बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को घरेलू कंप्यूटर पर एक साधारण सीपीयू चिप के साथ माइन किया जा सकता था. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, सीपीयू चिप्स बढ़ती कठिनाई के स्तर के कारण अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग में फैल होते नज़र आए.

आज के इस दौर में, क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग के लिए एक विशेष GPU या एक Application-Specific Integrated Circuit (ASIC) माइनर की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, माइनिंग रिग में GPU को हर समय एक विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन से जोड़ा जाना चाहिए. प्रत्येक क्रिप्टो माइनर को एक ऑनलाइन क्रिप्टो माइनिंग पूल का भी सदस्य होना आवश्यक है.

क्रिप्टो करेंसी की कब हुई थी शुरुआत, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान, समझिए पूरा हिसाब

इन दिनों जिस क्रिप्टो करेंसी का जलवा है, ये डिजिटल करेंसी है. इसे आप छू नहीं सकते, लेकिन हां अमीर जरूर हो सकते हैं. आमतौर पर इसका इस्तेमाल किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है.

क्रिप्टो करेंसी की कब हुई थी शुरुआत, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान, समझिए पूरा हिसाब

डिजिटल होती दुनिया में हर चीज वर्चुअल होती जी रही है. डिजिटल पेंमेट की सुविधा ने लोगों की लाइफ को काफी आसान बना दिया है. डिजिटल होते इस वर्ल्ड में क्रिप्टो करेंसी का क्रेज बढ़ गया है. दुनिया के हर एक देश की अपनी मुद्रा है. जैसे-भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर और ब्रिटेन में पाउंड. लेकिन इन दिनों जिस क्रिप्टो करेंसी का जलवा है, ये डिजिटल करेंसी है. इसे आप छू नहीं सकते, लेकिन हां अमीर जरूर हो सकते हैं. आइए अब समझ लेते हैं इस क्रिप्टो करेंसी का पूरा हिसाब.

कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी क्रिप्टो करेंसी एक इंडिपेंडेंट मुद्रा है. यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती. जैसे रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं का संचालन देश की सरकारें करती हैं, लेकिन क्रिप्टो करेंसी का संचलान कोई भी अथॉरिटी नहीं करती. यह एक डिजिटल करेंसी होती है. इसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है. आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है.

जापान के एक इंजीनियर ने की थी शुरुआत

सबसे पहले साल 2009 में क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत हुई थी, जो बिटकॉइन थी. जापान के इंजीनियर सतोषी नाकमोतो ने इसे बनाया था. शुरुआत में इसे कोई खास सफलता नहीं मिली, लेकिन धीरे-धीरे इसकी कीमत आसमान छूने लगी और ये पूरी दुनिया में छा गया.

क्रिप्टो करेंसी के क्या हैं फायदे और नुकसान

क्रिप्टो करेंसी के कई फायदे हैं और इसके नुकसान भी हैं. पहला फायदा ये है कि डिजिटल करेंसी होने के कारण धोखाधड़ी की गुंजाइश ना के बराबर है. दूसरा ये कि इसकी कोई नियामक संस्था नहीं है. इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों असर इसपर नहीं पड़ता. क्रिप्टोकरेंसी में मुनाफा अधिक होता है और ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. इसका सबसे बड़ा नुकसान है कि वर्चुअल करेंसी में भारी उतार-चढ़ाव आपके माथे पर पसीना ला देगा.

एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच साल में बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी एक ही दिन में बिना किसी चेतावनी के 40 से 50 प्रतिशत गिर गई थी. इसका सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि वर्चुअल करेंसी होने के कारण इसमें सौदा जोखिम भरा होता है. इस करेंसी का इस्तेमाल ड्रग्स सप्लाई और हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त जैसे अवैध कामों के लिए किया जा सकता है. , इसका एक और नुकसान यह है कि यदि कोई ट्रांजेक्शन आपसे गलती से हो गया तो आप उसे वापस नहीं मंगा सकते हैं.

क्रिप्टो करेंसी से क्या भारत में होता है लेनदेन

भारत में क्रिप्टो करेंसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था और वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाजत दी थी. साल 2018 में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. बिटकॉइन के अलावा भी रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कोइन, वॉइस कॉइन और मोनरो कॉइन जैसी अन्य क्रिप्टो करेंसी बाजार में उपलब्ध हैं.

फर्जी क्रिप्टो कॉइन के नाम पर 900 निवेशकों को लगाई 1200 करोड़ की चपत, जानिए कैसे दिया घोटाले को अंजाम

साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, तभी फर्जी क्रिप्टोकरेंसी के लिए इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) का खेल शुरू किया गया था।

फर्जी क्रिप्टो कॉइन के नाम पर 900 निवेशकों को लगाई 1200 करोड़ की चपत, जानिए कैसे दिया घोटाले को अंजाम

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit – Indian Express)

बिटकॉइन (Bitcoin) शायद नाम तो आपने सुना ही होगा। दुनिया भर में इसकी जैसी क्रिप्टोकरेंसीज की लोकप्रियता चरम पर है लेकिन अब धीरे-धीरे ठग लोगों को चूना लगाने का काम भी कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, केरल के एक शख्स ने आईपीओ (IPO) की तर्ज पर गैर-मौजूद फर्जी क्रिप्टो में पैसे निवेश कराए और करीब 900 लोगों को 1200 करोड़ रुपयों की चपत लगा दी।

द इंडियन एक्सप्रेस ने ईडी के अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस स्कैम के मास्टरमाइंड ने फर्जी क्रिप्टो के लिए इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) का खेल तब शुरू किया, जब साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लगा था। इस घोटाले से जुड़े निवेशकों ने कोयंबटूर के क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज फ्रेंक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कथित क्रिप्टो करेंसी ‘मॉरिस कॉइन’ को खरीदा था।

आखिर कैसे किया गया पूरा स्कैम: मामले में अधिकारियों ने कहा कि, इस फर्जी करेंसी का लॉक-इन-पीरियड 300 दिन का था और 10 मॉरिस कॉइन ( Morris Coin) की कीमत करीब 15 हजार के करीब थी। इस पूरे स्कैम को अंजाम देने वाले ने निवेशकों को एक ई-वॉलेट उपलब्ध कराया था और कहा था कि जैसे ही एक्सचेंज ट्रेंड करेगा इसकी कीमतों में भारी उछाल आएगा। लेकिन इस फर्जी करेंसी के प्रमोटर्स ने सारे पैसों का गबन कर लिया और इन पैसों को कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु सहित कई जगहों पर अवैध रूप से अचल संपत्तियों में खपा दिया।

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फिल्म एक्टर भी ईडी की रडार पर: इस मामले में जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु में इस स्कैम से जुड़ी सभी जगहों पर छापेमारी की है। इनमें बेंगलुरु स्थित लॉन्ग रिच टेक्नोलॉजी, मॉरिस ट्रेडिंग सॉल्यूशंस सहित कई अन्य कंपनियों के नाम शामिल हैं। वहीं इन कंपनियों में मलयाली फिल्मों के एक्टर उन्नी मुकुंदन की कंपनी नेक्सटेल ग्रुप और उन्नी मुकुंदन फिल्म्स का नाम भी शामिल है।

एक्टर ने दी मामले में सफाई: वहीं मीडिया से हुई बातचीत में अभिनेता का कहना है कि जांच एजेंसी की तलाशी प्रक्रिया में मुझसे जुड़ी एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी का नाम भी शामिल है। ऐसे में ईडी के अफसरो ने कंपनी के पैसों के सोर्स को लेकर जो भी जानकारी हमसे मांगी थी वह हमने उन्हें उपलब्ध करा दी है।

केरल का रहने वाला है मास्टरमाइंड: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, मामले का मास्टरमाइंड निशाद (31) केरल के मल्लापुरम जिले का रहने वाला है। ईडी के अधिकारियों ने दावा किया है कि एक्टर उन्नी मुकुंदन और निशाद एक दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन अभी तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है। वहीं धोखाधड़ी के मामलों में मल्लापुरम व कन्नूर पुलिस ने मास्टरमाइंड निशाद के अलावा कुछ अन्य लोगों पर भी मामले दर्ज किये थे, लेकिन बाद में ईडी ने ये मामला अपने हाथ में ले लिया था।

ऐसे लुभाया था निवेशकों को: ईडी के अनुसार, बेंगलुरु स्थित लॉन्ग रिच टेक्नोलॉजी, लॉन्ग रिच ग्लोबल क्रिप्टो करेंसी और लॉन्ग रिच ट्रेडिंग ने शुरू में निवेशकों को बताया था कि उनके पास एक ऑनलाइन एजुकेशन एप है। फिर ‘मॉरिस कॉइन’ की नाम की फर्जी करेंसी के नाम पर ढेर सारे रुपयों का निवेश कराया, लेकिन पैसे लगाने वालों को जब मुनाफा नहीं हुआ तो लोगों ने केस दर्ज करा दिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी बताया कि उनके इस काम में बड़े-बड़े हस्तियों का भी साथ है। हालांकि बाद में केरल हाईकोर्ट से पुलिस केसों में अग्रिम जमानत मिलने के बाद निशाद विदेश भाग गया।

Cryptocurrency Market Update: क्रिप्टो बाजार में आज भारी गिरावट, बिटकॉइन,ईथर समेत कई करेंसी 6% से ज्यादा टूटी

Nikhil Kumar

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और इसके निवेशकों (Investors) के लिए साल 2022 अबतक बिलकुल भी ठीक या मन चाहे मुनाफे लायक नहीं रहा है। क्रिप्टो बाजार अभी भी बेहद भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है। इसी बीच दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) में आज एक बार फिर से गिरावट देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक बिटकॉइन में आज 2.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है जो देखने और सुनने में तो मामूली लग रही है, लेकिन इस गिरावट की वजह से क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन की कीमतें 22787 डॉलर यानी लगभग 17.90 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रही है। वही, बिटकॉइन के अलावा ether, dogecoin, shibu inu में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

क्रिप्टो बाजार के जानकारों और ख़बरों की माने तो पिछले 24 घंटे में क्रिप्टोकरेंसी का मार्केट कैपिटल 3.5 से ज्यादा गिरकर 1.05 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है। पिछले एक हफ्ते की बात करें तो पिछले दिनों बिटकॉइन ने अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन कल और आज इसमें गिरावट देखने को मिली है। बिटकॉइन के अलावा अगर दूसरी चर्चित क्रिप्टोकरेंसी की बात करें तो दूसरी सबसे लोकप्रिय डिजिटल करेंसी ईथर (Ethereum) की कीमत में आज 3.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के बाद एथेरियम 1577 डॉलर यानी लगभग क्रिप्टो करेंसी 1.23 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वही अगर एलन मस्क द्वारा चर्चित dogecoin की बात करें तो आज इसमें 3.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी और ये 5.19 के आसपास कारोबार कर रहा था। जबकि shibu inu की कीमत 3.65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

चर्चित क्रिप्टोकरेंसी के अलावा बाकी कम चर्चित क्रिप्टो में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बीते 24 घंटों में एक्सआरपी,सलोना,बीएनबी,तीथकॉइन, चेनलिंक, पॉलीगन में मामूली गिरावट देखने को मिली,जबकि पोल्काडॉट में सबसे ज्यादा लगभग 13 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।

* सावधान: ये खबर केवल जानकारी के लिए बनाई गई है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश या पैसा लगाने से पहले बाजार के जानकारों या अपने वित्तीय सलाहकार कि सलाह जरूर लें। *

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