आयत का व्यापार करें

आदेश बनाने और घोषणा के लिए केंद्र सरकार की शक्ति 1 [विदेश व्यापार] नीति

आयात और निर्यात के संबंध में प्रावधान करने की शक्ति नहीं है.

(3) (1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा आयात को सुविधाजनक बनाने और निर्यात में वृद्धि से विकास और विदेश व्यापार के नियमन के लिए प्रावधान कर सकता है.

किसी भी अगर द्वारा बनाया जा सकता है (2) केन्द्रीय सरकार भी सरकारी राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा. सभी मामलों में या में निर्दिष्ट मामलों की कक्षाओं और ऐसे अपवादों के अधीन, सीमित कर दिया है या अन्यथा के विनियमन के लिए प्रावधान कर सकता है या आदेश के तहत, माल का आयात या निर्यात 2 [या सेवाओं या प्रौद्योगिकी]:

2 [इस उप - धारा के प्रावधानों के मामले में लागू होगा कि उपलब्ध कराई गई सेवाओं या प्रौद्योगिकी का आयात या निर्यात, सेवा या प्रौद्योगिकी प्रदाता विदेश व्यापार नीति के तहत लाभ प्राप्त है या निर्दिष्ट सेवाओं या निर्दिष्ट प्रौद्योगिकियों के साथ काम कर रहा है केवल जब .]

(3) सभी वस्तुओं उप - धारा के तहत किसी भी आदेश (2) सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 और सब प्रावधानों के तहत निषिद्ध किया गया है आयात या निर्यात, जिनमें से माल नहीं समझा होगा लागू होता है जो कि अधिनियम की तदनुसार प्रभावी होंगे.

2 [(4) किसी भी अन्य कानून में निहित कुछ भी प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, नियम, विनियम, अधिसूचना या आदेश, कोई परमिट या लाइसेंस किसी भी माल का आयात या निर्यात के लिए आवश्यक हो जाएगा, और न ही किसी भी सामान को छोड़कर आयात या निर्यात के लिए निषिद्ध होगा, उसके अधीन बनाए गए इस अधिनियम या नियम या आदेश के तहत आवश्यक हो सकता है के रूप में.]

1 विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2010 से प्रभावी द्वारा "निर्यात और आयात" के लिए एवजी 27-8-2010.

प्र.20. विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2010 से प्रभावी Insertedby 27-8-2010.

आयत का व्यापार करें

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भारत में व्यापार शुरू करना

एक बिलियन से भी अधिक जनसंख्या वाला भारतीय बाजार उचित उत्पादों, सेवाओं और प्रतिबद्धताओं वाले अमेरिकी निर्यातकों के लिए आकर्षक और विविध अवसर मुहैया कराता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण और विस्तार होने से मध्यावधि में भारत की ऊर्जा, पर्यावरण, स्वास्थ्य देखरेख, उच्च-प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे, परिवहन और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उपकरणों और सेवाओं की आवश्यकताएं दसियों बिलियन डॉलर से भी अधिक होगी। उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त आयत का व्यापार करें वर्ष 2015-16 के दौरान भारत का सकल घरेलू उत्पाद विकास दर 7.6 प्रतिशत थी। सरकार द्वारा नीतियों का उदारीकरण जारी रखने की संभावना के साथ, भारत के पास आगामी कुछ वर्षों तक सतत उच्च विकास दर कायम रखने की क्षमता है और अमेरिकी कंपनियों को विकसित होते भारतीय बाजार में प्रवेश के अवसर को अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

अमेरिका-भारत व्यापार

कैलेंडर वर्ष 2015 में भारत के लिए अमेरिकी निर्यातः 39.7 बिलियन डॉलर
कैलेंडर वर्ष 2015 में भारत से आयातः 69.6 बिलियन डॉलर
कैलेंडर वर्ष 2015 आयत का व्यापार करें में कुल द्विपक्षीय व्यापार (माल और सेवाएं) 109.3 बिलियन डॉलर
कुल व्यापारः कैलेंडर वर्ष 2015 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 109.3 बिलियन डॉलर, 2014 से 3.6 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।
कैलेंडर वर्ष 2015 में भारत को अमेरिकी निर्यात बढ़कर 39.7 बिलियन डॉलर, पहले के साल के मुकाबले 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
कैलेंडर वर्ष में भारत से आयात बढ़कर 69.6 बिलियन डॉलर हो गया, पहले के साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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कंट्री कमर्शियल गाइड

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भारत में व्यापार किस प्रकार करें

तेजी से बढ़ते मध्य वर्ग, आय बढ़ने और महंगे कृषि उत्पादों के उपभोग का तरीका बदलने से अमेरिकी कृषि के बड़े स्तर पर भारत में निर्यात बढ़ने की संभावनाएं हैं। भारत में आधुनिक फुटकर क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, खाद्य प्रसंस्करणकर्ता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश चाहते हैं, और खाद्य सेवा के सेफ नए प्रयोग करना चाहते हैं एवं नए उत्पादों और वैश्विक व्यंजनों को चखने के इच्छुक युवाओं व उच्च आय वाले उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहते है। भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के इच्छुक निर्यातकों को पहले यह पता लगाना चाहिए कि क्या उस उत्पाद की बाजार तक पहुंच हैं और छोटे स्तार शुरुआत करने तथा विशिष्ट लेबलिंग एवं पैकेजिंग आवश्यकताओं को पूरा करने लिए तैयार रहना चाहिए।

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स्कॉट एस सिंडलर, कृषि मामलों के मिनिस्टर काउंसिलर

जॉन मैक्कैसलिन, वरिष्ठ वाणिज्यिक आयत का व्यापार करें अधिकारी व वाणिज्यिक मामलों के मिनिस्टर काउंसिलर

Indo-US Trade Data: अमेरिका ने दे दिया सबूत, अब चीन नहीं, भारत है अपना नंबर-1 दोस्त!

Trade Data: अमेरिका बीते वित्त वर्ष (2021-22) में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार (Business Partner) बन गया है. इससे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का पता चलता है. यही नहीं, भारत के साथ व्यापार के मामले में अमेरिका ने चीन (China) को भी पीछ़े छोड़ दिया है.

भारत-अमेरिका में व्यापार बढ़ा (Photo: File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2022,
  • (अपडेटेड 29 मई 2022, 1:11 PM IST)
  • भारत से व्यापार के मामले में अमेरिका ने चीन को पीछ़े छोड़ा
  • अमेरिका-भारत के बीच व्यापार बढ़कर 119.42 अरब डॉलर

भारत (India) और अमेरिका (America) की दोस्ती नई कहानी लिख रही है. अमेरिका अब चीन के मुकाबले भारत को तरजीह दे रहा है. खासकर आर्थिक मोर्चे (Economy) पर दोनों देश एक-दूसरे का मजबूत भागीदार बन रहा है. पिछले वित्त वर्ष में अमेरिका का चीन से ज्यादा भारत के साथ व्यापार (Business) हुआ है. एक तरह से ये सबूत है कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते और प्रगाढ़ हुए हैं.

दरअसल, अमेरिका बीते वित्त वर्ष (2021-22) में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार (Business Partner) बन गया है. इससे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का पता चलता है. यही नहीं, भारत के साथ व्यापार के मामले में अमेरिका ने चीन (China) को भी पीछ़े छोड़ दिया है.

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार के आंकड़े

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वाणिज्य मंत्रालय (आयत का व्यापार करें Ministry of Commerce) के आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 में अमेरिका और भारत का द्वपिक्षीय व्यापार बढ़कर 119.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया. जो 2020-21 में 80.51 अरब डॉलर का था.

आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में भारत का अमेरिका को निर्यात (India आयत का व्यापार करें Export America) बढ़कर 76.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 51.62 अरब डॉलर रहा था. वहीं इस दौरान अमेरिका से भारत का आयात बढ़कर 43.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 29 अरब डॉलर था.

आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष (2021-22) में भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 115.42 अरब डॉलर का रहा, जो 2020-21 में 86.4 अरब डॉलर का था. वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात मामूली बढ़कर 21.25 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 21.18 अरब डॉलर रहा था.

चीन-भारत के बीच व्यापार

वहीं इस आयत का व्यापार करें दौरान चीन से भारत का आयात बढ़कर 94.16 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 65.21 अरब डॉलर पर था. वित्त वर्ष के दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 72.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 44 अरब डॉलर रहा था.

भारत-अमेरिका के बीच रिकॉर्ड व्यापार

व्यापार क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी वर्षों में भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार और बढ़ेगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी.

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के उपाध्यक्ष खालिद खान ने कहा कि भारत एक भरोसेमंद व्यापार भागीदार के रूप में उभर रहा है और वैश्विक कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं. वैश्विक कंपनियां अपने कारोबार का भारत और अन्य देशों में विविधीकरण कर रही हैं.

उन्होंने कहा, 'आगामी बरसों में भारत-अमेरिका द्वपिक्षीय व्यापार और बढ़ेगा. भारत, अमेरिका की हिंद-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा (IPEF) पहल में शामिल हुआ है. इससे आर्थिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी.'

भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते बेहतर

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय बागान प्रबंधन संस्थान (IIPM), बेंगलुरु के निदेशक राकेश मोहन जोशी ने कहा कि 1.39 अरब की आबादी के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते अमेरिका और भारत की कंपनियों के पास टेक्नोलॉजी लेनदेन, विनिर्माण, व्यापार और निवेश के काफी अवसर हैं.

उन्होंने बताया कि अमेरिका को भारत से मुख्यत: पेट्रोलियम उत्पादों, पालिश हीरों, फार्मा उत्पाद, आभूषण, हल्के तेल आदि का निर्यात किया जाता है. वहीं अमेरिका से भारत पेट्रोलियम पदार्थ, तरल प्राकृतिक गैस, सोने, कोयले और बादाम का आयात करता है.

अमेरिका उन कुछ देशों में है, जिनके साथ भारत व्यापार अधिशेष की स्थिति में है. अमेरिका के साथ भारत का आयत का व्यापार करें व्यापार अधिशेष 32.8 अरब डॉलर का है. 2013-14 से 2107-18 तक और उसके बाद 2020-21 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. चीन से पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. (PTI इनपुट के साथ)

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