दिल्ली से जहरीली हुई हरियाणा की हवा,8 शहरों का ए.क्यू.आई. गंभीर स्तर पर, चरखी दादरी सबसे प्रदूषित

चंडीगढ़,(विजय गौड़): हरियाणा में वायु प्रदूषण का स्तर इतना अधिक हो चुका है कि अब पूरा राज्य गैस चैंबर में बदलता जा रहा है। एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है? पिछले 24 घंटों के दौरान हरियाणा के 8 शहरों का एयर क्वालिटी इंडैक्स (ए.क्यू.आई.) गंभीर स्तर पर पहुंच गया। यही नहीं, चरखी दादरी का ए.क्यू.आई. देश की राजधानी दिल्ली से भी अधिक पहुंच गया। सैंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) की ओर से वीरवार शाम जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटों के दौरान दिल्ली का ए.क्यू.आई. 450 रहा, जबकि चरखी दादरी का ए.क्यू.आई. 460 तक पहुंच गया। हालात कितने खराब हो चुके हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 10 अन्य शहरों का ए.क्यू.आई. भी बेहद खराब स्तर तक आ चुका है। जबकि तीन अन्य शहरों के ए.क्यू.आई. ने खराब स्तर को छू लिया है। केवल पलवल (124) और पंचकूला (160) ही ऐसे शहर हैं जिनका ए.क्यू.आई. अभी खराब स्तर तक नहीं पहुंचा है। जो शहर गंभीर स्तर तक पहुंच चुके हैं इनमें चरखी दादरी के अतिरिक्त बहादुरगढ़ (429), गुरुग्राम (430), जींद (421), भिवानी (437), मानेसर (412), रोहतक (437) और सिरसा (420) शामिल हैं।

एन.सी.आर. के लिए किए गए सारे प्लान हुए फेल
कभी स्पैशल कंट्रोल रूम बनाया तो कभी विशेष प्लान तैयार किए लेकिन बावजूद इसके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एन.सी.आर.) में वायु प्रदूषण को कम नहीं किया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक जिन 8 शहरों का ए.क्यू.आई. गंभीर स्तर पर पहुंचा है, उनमें से 7 शहर एन.सी.आर. के अंतर्गत आते हैं। जबकि इससे पहले हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एच.एस.पी.सी.बी.) की ओर से एन.सी.आर. में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए कई तरह के दावे किए गए थे।

सी.ई.टी. की वजह से और बढ़ेगा प्रदूषण
राज्य में 5 और 6 नवम्बर को कॉमन एलिजिबिलिटी टैस्ट (सी.ई.टी.) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भाग लेने के लिए 11 लाख से अधिक परिक्षार्थी अपने घरों से निकलेंगे। राज्य के परिवहन विभाग ने पहले से ही इन परिक्षाॢथयों के लिए फ्री बस की सुविधा देने की घोषणा कर दी है। ऐसे में जबकि वीकैंड पर ट्रैफिक अन्य दिनों की तुलना में कम होता है इसके विपरीत न केवल हरियाणा रोडवेज की सभी बसें चलेंगी बल्कि काफी संख्या में निजी वाहन भी सड़कों पर उतरेंगे, जिस वजह से राज्य में वायु प्रदूषण के स्तर के और भी बढऩे का खतरा है।

पराली कम जली लेकिन फिर भी हालात खराब
इस साल हरियाणा में पराली जलाए जाने के मामलों में काफी कमी आई है। वीरवार शाम तक लगभग 2200 मामले आ चुके थे। जबकि दूसरी ओर पंजाब में यह आंकड़ा 27000 के पार कर चुका है फिर भी हरियाणा में हालात खराब होते जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलना ही वायु प्रदूषण का कोई एकमात्र कारण नहीं है। हवा की दिशा का इसमें अहम योगदान होता है।

शहर ए.क्यू.आई.
बल्लभगढ़ 377
धारुहेड़ा 393
फरीदाबाद 373
फतेहबाद 313
हिसार 329
कैथल 392
कुरुक्षेत्र 329
नरनौल 343
पानीपत 313
सोनीपत 358
अम्बाला 267
करनाल 299
यमुनानगर 278

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नेताजी की मौत का रहस्य: सरकार के अधीन CFSL ने गुमनामी बाबा के DNA सैंपल पर रिपोर्ट देने से किया इनकार, RTI से खुलासा

Netaji death mystery: केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL), जो गृह मंत्रालय के अधीन है. उसने ने गुमनामी बाबा के डीएनए नमूने की इलेक्ट्रोफेरोग्राम रिपोर्ट का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया है, जो कुछ लोग नेताजी सुभाष चंद्र बोस मानते हैं. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ए),(ई) और 11(1) का हवाला देते हुए. नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर शोध कर रहे हुगली एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है? के कोन्नगर निवासी सयाक सेन ने आरटीआई दायर की थी. आरटीआई इस साल 24 सितंबर को दायर की गई थी.

आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1) में कहा गया है कि जिसके प्रकटीकरण से संप्रभुता और अखंडता या भारत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. राज्य की सुरक्षा, रणनीतिक, आर्थिक हित. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सयाक सेन ने कहा कि सीएफएसएल ने उनकी आरटीआई को खारिज कर दिया, यह जवाब देते हुए कि वह तीन कारणों के आधार पर इलेक्ट्रोफेरोग्राम रिपोर्ट साझा नहीं करेगा.

एक इलेक्ट्रोफेरोग्राम वैद्युतकणसंचलन स्वचालित अनुक्रमण द्वारा किए गए विश्लेषण से परिणामों की एक साजिश है. एक इलेक्ट्रोफेरोग्राम डेटा का एक क्रम प्रदान करता है जो एक स्वचालित डीएनए अनुक्रमण मशीन द्वारा निर्मित होता है. वंशावली डीएनए परीक्षण और पितृत्व परीक्षण से परिणाम प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रोफेरोग्राम का उपयोग किया जा सकता है.

सेन ने कहा, “मुझे आधिकारिक तौर पर एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है? बताया गया है कि इलेक्ट्रोफेरोग्राम 3 कारणों से नहीं दिया जा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे सार्वजनिक करना भारत की संप्रभुता और विदेशी राज्यों के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकता है.” सेन ने अपने आरटीआई में यह भी पूछा कि उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाके में रहने वाला एक व्यक्ति भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए इतना मायने क्यों रखता है और अगर उसका इलेक्ट्रोफेरोग्राम सार्वजनिक किया जाता है तो देश में हलचल मच जाएगी.

सेन ने आगे बताया, “स्पष्ट संकेत है कि गुमनामी बाबा एक आम आदमी से कहीं अधिक थे, और विशेष थे. मेरा मानना ​​है कि वह मेरे सभी निष्कर्षों के अनुसार भेष में नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे.” यह दावा किया गया है कि बोस की मृत्यु 18 अगस्त, 1945 को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुई थी. हालांकि, लोगों के एक वर्ग का दावा है कि वह दुर्घटना में बच गया और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए छिप गया.

सोहेल संग शादी करने पर हंसिका मोटवानी को ट्रोलर क्यों कह रहे हैं 'धोखेबाज'

Hansika Motwani Trolling News in Hindi, Sohael Kathuriya

हंसिका मोटवानी ने अपनी बेस्ट फ्रेंड के एक्स हस्बैंड सोहेल कथूरिया के साथ शादी रचा ली है. इसके बाद उनकी फोटोज देख सोशल मीडिया पर यूजर उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं. चलिए डिटेल में बताते हैं.

हंसिका मोटवानी (Hansika Motwani) ने शादी के 4 दिन बाद अपने ट्रेडिशनल लुक में तस्वीरें साझा की. आप तस्वीर में देख सकते है कि वे सुर्ख लाल रंग की साड़ी में नज़र आ रही हैं. इस फोटो में उन्होंने साड़ी के साथ एक चुनरी भी ओढ़ रखी है जो उन्हें बहुत खूबसूरत बना रही है. फोटो में हंसिका अपने पति सोहेल कथूरिया (Sohael Khaturiya) संग खुश मिजाज अंदाज में देखी जा सकती हैं. फोटो को देख एक्ट्रेस के फैंस उन्हें एक परफेक्ट कपल कह रहे हैं. वहीं कुछ लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं.

MCD Election Result 2022 : दिल्ली में केजरीवाल का जलवा बरकरार, 15 साल बाद एमसीडी से भाजपा बेदखल

जनहित और भागदारी के दम पर दिल्ली में केजरीवाल का जलवा बरकरार, भाजपा एमसीडी से बेदखल

MCD Election Result 2022 : जो काम तीन बार मुख्यमंत्री चुने जाने के बावजूद शीला दीक्षित नहीं कर पाईं उस काम को आठ साल में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कर दिखाया। परिणाम यह निकला कि एमसीडी की सत्ता पर 15 साल से काबिज भाजपा उससे बेदखल हो गई।

एमसीडी चुनाव रुझानों पर धीरेंद्र मिश्र का विश्लेषण

MCD Election Result 2022 : दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम तेजी से आने का सिलसिला जारी है। ताजा रुझानों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) की पार्टी आप ( AAP ) का एमसीडी ( MCD ) में मेयर होगा। अभी तक के रुझानों में आप 250 में से 132 सीटों पर आगे है। जबकि भाजपा ( BJP ) 104 सीटों पर आगे है। 11 सीटों पर कांग्रेस ( Congress ) के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यानि 15 साल बाद एमसीडी की सत्ता पर भी आप काबिज हो गई है। कहने का मतलब यह है कि दिल्ली में अब मिनी सरकार भी आप की। केंद्र के पास केवल डीडीए और दिल्ली पुलिस रह गई है।

साफ है कि आप ने दिल्ली ( Delhi ) में कांग्रेस की जगह मजबूती के साथ ले ली है। केजरीवाल की पार्टी को गरीबों, मजदूरों और प्रवासियों की राजनीति में ख्याल रखने और सियासी जनभागीदारी देने का लाभ मिलने का सिलसिला अब दिल्ली विधानसभा के बाद एमसीडी में मिलने लगा है। यह इस बात के भी संकेत हैं कि केजरीवाल को लेकर आम मतदाताओं में क्रेज आज भी कायम है।

फिलहाल 126 सीटों पर चुनाव परिणाम आ गए हैं। 93 पर आप आगे हैं। 73 पर एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है? भाजपा आगे है। छह पर कांग्रेस और 3 पर अन्य आगे हैं। ताजा रुझानों से भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि उसकी शर्मनाक हार न होकर सम्मानजनक हार होगी। एमसीडी चुनाव परिणाम के मुताबिक सबसे अहम बात यह है जिस भाजपा को एमसीडी को 2012 में तीन निगमों में बांटने के बाद भी पूर्व सीएम शीला दीक्षित भाजपा को सत्त से बाहर नहीं कर पाईं, उसे एमसीडी हेडक्वार्टर यानि सिविक सेंटर से बाहर करने काम केजरीवाल ने कर दिया है।

इतना ही नहीं, ताजा एमसीडी चुनाव परिणामों से साफ है कि अब आप देश की राजधानी दिल्ली में केवल जाटों, बनियों और पंजाबियों व अभिजातों के दम पर राजनीति नहीं कर सकते। भाजपा की राजनीति इसी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा ने कुछ हद तक खुद को प्रवासियों से जोड़ने का काम किया था, लेकिन दोनों के बाद भाजपा ने कभी भी प्रवासियों का दिल्ली में सियासी भागीदारी दिल से देने काम नहीं किया। लाल बिहारी तिवारी, मनोज तिवारी व एक दौर में कीर्ति झा आजाद जैसे चेहरों को केवल दिखावे के लिए सामने लाया गया। भाजपा को अपनी इस रणनीति पर गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है।

ऐसा करना भाजपा के लिए जरूरी है, क्योंकि करीब ढ़ाई दशक से भाजपा दिल्ली विधानसभा में बहुमत हासिल नहीं एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है? पाई, लेकिन गरीबों, अल्पसंख्यकों और निम्न आय वर्ग की राजनीति कर केजरीवाल लगातार दिल्ली विधानसभा का चुनाव तीन बार जीत चुके हैं। केजरीवाल और उनकी टीम ने अन्ना आंदोलन के बाद कांग्रेस को रिप्लेस करने का काम किया है। वह शीला दीक्षित की मुहिम को आगे बढ़ा रहे है।

शीला दीक्षित ने दिल्ली की 1700 से ज्याद कॉलोनियों में रहने वाले 60 लाख से ज्यादा लोगों को गली, नालियों, सड़कों और बिजली मुहैया कराने का काम किया। केजरीवाल उसी को आगे बढ़ाते हुए मोहल्ला क्लिनिक, स्कूली शिक्षा और बिजली, पानी के बिलों में छूट देकर बड़ी राहत दी है। लोगों को लगने लगा है कि दिल्ली में अमीरी के अलावा गरीबों की सुनने वाला भी कोई है।

हालांकि, कुछ मोर्चों पर केजरीवाल कमजोर भी साबित हुए हैं, लेकिन लोकतंत्र में वोट की अपनी अहमियत होती है। उन्होंने इस बात पर गौर फरमाया कि उन्हें वोट कहां से वोट चाहिए और वहां पर क्या करने की जरूरत है। केजरीवाल की इसी सामान्य सी दिखनी वाली सियासी समझ ने उनका मजाक उड़ाने वालों का दिल्ली में एक बार फिर मुंह बंद कर दिया है। इसका सीधा लाभ आप को यह मिला है कि अब एमसीडी में आप काबिज हो गई। एमसीडी चुनाव में जीत के बाद अब केजरीवाल की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब वो यह नहीं कह पाएंगे कि एमसीडी हमारे पास नहीं है इसलिए दिल्ली साफ नहीं है। यमुना की सफाई नहीं हो पा रही। प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति खराब है। केजरीवाल और उनकी टीम को दिल्ली काम कर दिखाना होगा।

दूसरी तरफ एमसीडी के रुझानों से दिल्ली में भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। आप यह सवाल पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों, इसका जवाब ये है कि 15 माह बाद ​लोकसभा का चुनाव है दो साल बाद विधानसभा का चुनाव दिल्ली में होने है। दिल्ली में सात के सात लोकसभा सांसद भाजपा के हैं। केजरीवाल लोकसभा चुनाव में आप सांसद को अभी तक जितवा नहीं पाये हैं। अब वो चाहेंगे कि विधानसभा और एमसीडी के बाद लोकसभा सांसद भी आम आदमी पार्टी का नेता ही बने। यानि अब खतरा सीधे मोदी और शाह के अस्तित्व पर है।

भाजपा के लिए राहत की बात केवल यह है कि वो आठ राज्यों के सीएम और 17 केंद्रीय मंत्रियों को सियासी मैदान के उतरने के बावजूद भाजपा को एमसीडी में वापसी नहीं करा पाई। हां, इसका लाभ यह जरूर मिला कि करारी शिकस्त से भाजपा बच गई। भाजपा ने एक चतुराई ये दिखाई कि एमसीडी चुनाव में पीएम मोदी और अमित शाह को इस बार मैदान में नहीं उतारा। यानि लोकसभा चुनाव में भाजपा शीर्ष नेतृत्व को अभी धक्का नहीं लगा है। भाजपा लोकसभा चुनाव में इसका लाभ उठाने की स्थिति में होगी।

MCD Election Result 2022 : कुल मिलाकर आप यह कह सकते है। कि जनभागदारी के दम पर दिल्ली में आप की लहर हैै और भाजपा सत्ता से पूरी तरह से बेदखल हो गई है। भाजपा नेतृत्व को नये सिरे से सोचने की जरूरत। भाजपा ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो मोदी-शाह की राजनीति में राहु-केतु की तरह केजरीवाल और उनकी टीम ग्रहण लगाने का काम आगे भी जारी रखेंगे।

एमएसीडी संकेतक क्या है और यह इतना विशेष क्यों है?

SHARE MARKET: रिजर्व बैंक की बैठक के बाद दबाव में शेयर बाजार, रुपये में भी गिरावट

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक मॉनिटर पॉलिसी कमिटी के फैसलों से पहले आज शेयर बाजार फ्लैट खुला है। आज सुबह सेंसेक्स 11 अंक गिरकर 62615 के स्तर पर और निफ्टी 4 अंक फिसल कर 18638 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में बाजार लाल निशान में ट्रेड कर रहा है। वहीं आज रुपया भी 4 पैसे की गिरावट के साथ 82.66 के स्तर पर खुला। मंगलवार को रुपए में 1 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी जिसके बाद यह एक महीने के निचले स्तरों पर पहुंच गया था।

निफ्टी के टॉप गेनर्स और लूजर्स

वहीं आज निफ्टी के टॉप गेनर्स कि लिस्ट में बीपीसीएल, एलटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियाई पेंट, टाटा उपभोक्ता, आईटीसी, इंफी, नेस्ले, भारती एयरटेल, सिप्ला, आईसीआईसीआई बैंक रहे है। साथ ही निफ्टी के टॉप लूजर्स की लिस्ट में बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, इंडसइंड बैंक, टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉप, एचसीएल टेक, सन फार्मा, एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस, कोटक बैंक, विप्रो, टाइटन, कोल इंडिया, यूपीएल, ओएनजीसी, रिलायंस, अपोलो अस्पताल, टेकम, अल्ट्रा सीमेंट, बजाज ऑटो है।

फेड पर इंटरेस्ट रेट को लेकर दबाव

अगले हफ्ते फेडरल रिजर्व की बैठक होगी। फेड पर इंटरेस्ट रेट को लेकर दबाव बढ़ रहा है। इसके कारण अमेरिकी बाजार लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स 350 अंक यानी 1.03 फीसदी, नैस्डैक 225 अंक यानी 2 फीसदी और S&P 500 1.44 फीसदी फिसला। डॉलर इंडेक्स इस समय 105.51 के स्तर पर है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल (Crude oil price) का भाव 80 डॉलर के नीचे आ गया है।

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