अब रुपया बनेगा डॉलर का दादा, PM मोदी भारत को बनाएंगे दुनिया का सरताज!

डॉलर की तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बना रुपया: दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद पीएम मोदी के सपनों का भारत नई ऊंचाईयों की नई उड़ान पर है. प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षा रुपये को डॉलर का प्रतिद्वंद्वी बनाने की है। जी हां… वही डॉलर जो वर्षों से पूरी दुनिया पर राज कर रहा है, वही डॉलर जो दुनिया की अर्थव्यवस्था और बाजार की दिशा तय करता है, वही डॉलर जो वैश्विक बाजार का दादा है। लेकिन अब पीएम मोदी ने ऐसा प्लान किया है कि डॉलर बुली पर संकट आ गया है. प्रधानमंत्री की इस योजना के बारे में जानने के बाद अमेरिका से लेकर चीन तक हड़कंप मच गया है, क्योंकि पहली बार किसी देश की करेंसी ने दुनिया के साम्राज्य को चुनौती दी है.

पीएम मोदी जब कुछ कहते हैं विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति तो उसके पीछे उनकी गुप्त योजना होती है. प्रधानमंत्री के मजबूत अर्थशास्त्र का ही नतीजा है कि जब दुनिया के तमाम बड़े देशों की अर्थव्यवस्था में चीन, रूस, ब्रिटेन और जर्मनी की ऐतिहासिक गिरावट देखी जा रही है और श्रीलंका से लेकर पाकिस्तान और वेनेजुएला जैसे देशों में कोहराम मच गया है. हालांकि इस दौरान भारत वैश्विक मंदी को मात देकर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। अब भारत का लक्ष्य दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का है। उसके बाद देश की निगाहें अगले कदम पर होंगी। वैश्विक मंदी के दौर में भारत की जिस तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को देखकर दुनिया हैरान है।

डॉलर का विकल्प बनेगा रुपया

अगर पीएम मोदी की योजना सफल विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति होती है तो जल्द ही देखा जाएगा कि रुपया डॉलर का विकल्प बन जाएगा. डॉलर का साम्राज्य इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है, लेकिन अगर रुपया अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बन जाता है तो विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति उसे निश्चित तौर पर कड़ा मुकाबला मिलेगा। भारत ने भी इसके लिए तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। ताकि रुपया जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में खुद को स्थापित कर सके। इसके लिए भारतीय बैंकों ने बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के साथ रुपये में लेनदेन शुरू करने की संभावनाएं भी तलाशनी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश के अलावा मिस्र जैसे कुछ अफ्रीकी देशों से भी व्यापार करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए बैंक शामिल हैं। रुपये में विदेशी लेनदेन करने से भी विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचने में मदद मिलेगी।

इन देशों के साथ रुपये में व्यापार शुरू हुआ
वित्त मंत्रालय की हाल ही में हुई एक बैठक में सभी हितधारकों से अन्य देशों के साथ भी रुपए में विदेशी लेनदेन की सुविधा की संभावना तलाशने को कहा गया है। फिलहाल भारत रूस, मॉरीशस और श्रीलंका के साथ रुपए में कारोबार कर रहा है। इसके लिए बैंकों के स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) का इस्तेमाल किया जाता है। अब तक 11 बैंकों ने ऐसे 18 खाते खोले हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने पिछले वित्त वर्ष में मिस्र से 35.2 करोड़ डॉलर, अल्जीरिया से 10 करोड़ डॉलर और अंगोला से 27.2 करोड़ डॉलर का सामान आयात किया. इसी तरह भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में बांग्लादेश से 19.7 करोड़ डॉलर का आयात किया। अब भारत सऊदी अरब, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से रुपए में कारोबार करने के करीब पहुंच गया है।

भारत के मंसूबे से डर गया था अमेरिका
डॉलर को लेकर रुपये को चुनौती देने से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को भी सिरदर्द हो गया है। पहली बार दुनिया की किसी करेंसी विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति ने डॉलर को सीधे चुनौती देने की योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत अब तक विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति करीब 18 देशों के साथ रुपए में कारोबार शुरू करने पर राजी हुआ है। जल्द ही भारत 50 से ज्यादा देशों के साथ इस आंकड़े को निपटाने की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत का सबसे बड़ा दुश्मन चीन भी इससे घबराया हुआ है।

ISRO ने पिछले पांच वर्षों के दौरान 19 देशों के 177 विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

नयी दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि इसरो ने अपनी वाणिज्यिक इकाई के माध्यम से पिछले पांच वर्षों के दौरान 19 देशों के 177 विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। इसरो को जनवरी 2018 से नवंबर 2022 तक इन 177 विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण 9.4 करोड़ अमरीकी डालर और 4.6 करोड़ यूरो की आय हुई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी,पृथ्वी विज्ञान; पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह गुरुवार को राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि इसरो ने इस अवधि में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, फ्रांस, इज़राइल, इटली , जापान, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, मलेशिया, नीदरलैंड, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, स्पेन, स्विटजरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाए। इनको व्यावसायिक समझौते के तहत पीएसएलवी अथवा जीएसएलवी-एमकेIII उपग्रहण प्रक्षेपण यानों की सहायता से प्रक्षेपित किया गया।

डा सिंह ने बताया कि विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण के माध्यम से लगभग 9.4 करोड़ डालर और 4.6 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में गैर-सरकारी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने और वाणिज्य-उन्मुख दृष्टिकोण लाने के इरादे से जून 2020 में क्षेत्र में दूरगामी सुधारों की घोषणा की गई थी। ये सभी कदम वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में देश की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

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पाकिस्तान का निकलता जा रहा दिवाला, बिलावल भुट्टो ने बौखलाकर दिया PM मोदी पर बयान

पाकिस्तान की बेहद खस्ता आंतरिक हालात के चलते वहां की सियासत में भूचाल देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि जटिल सियासी और आर्थिक स्थिति से ध्यान बंटाने के लिए ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। विभिन्न मोर्चों पर भारत से हो रही तुलना और जनता के बढ़ते दबाव के चलते ध्यान बंटाने की कोशिश हो रही है। जानकारों का कहना है कि इमरान खान का अपनी दो प्रांतीय सरकारों को बलि चढ़ाने का दांव पाकिस्तान के मौजूदा विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति संकट को चरम पर पहुंचा सकता है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई, कर्ज का बोझ और अराजकता की हालत से भारत भी सतर्क है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान में जिस तरह के हालात हैं उससे भारत विरोधी ताकतें और आतंकी गुट भी बेलगाम हो सकते हैं।

हालांकि, कर्ज के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आगे गिड़गिड़ा रही पाकिस्तानी हुकूमत गंभीर पशोपेश में है, क्योंकि एक गलत कदम इसकी हालत को बद से बदतर बना सकता है। एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि मौजूदा पाकिस्तान सरकार सीमित इलाको में सिमटी हुई है। प्रांतीय सरकारों में इमरान खान का दबदबा है। ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में सरकार भंग करने के इमरान के दांव का मतलब है विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति पाकिस्तान में 66 फीसदी असेंबली सीटें खाली हो जाएंगी। इससे पाकिस्तान में राजनीतिक संकट बड़ा हो जाएगा। पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। तुरंत चुनाव की मांग कर रहे इमरान इस दांव से बड़ा दबाव बनाने में सफल होंगे। लेकिन जानकार मानते हैं पाकिस्तानी सेना की भूमिका को नजरंदाज करना मुश्किल होगा। हाल ही में पाकिस्तान में नए सेना अध्यक्ष बने हैं। मौजूदा सरकार उनसे अच्छा रिश्ता बनाकर विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति चल रही है। ऐसे में अगर सेना ने कोई कदम उठाया तो हालात अप्रत्याशित रूप से बदल सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की महंगाई, खस्ता आर्थिक हालत और बदइंतजामी के चलते राजनीतिक चर्चा में भारत को लेकर बाते हो रही हैं। वहीं आम लोग भी भारत की तुलना में कई गुना महंगाई को मुद्दा बना रहे हैं। बाढ़, कोविड, राजनीतिक अस्थिरता और वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से संकट में फंसे पाकिस्तान की हालत बिगड़ती जा रही है। आर्थिक संकट पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को इमरान के आगे झुकने पर मजबूर कर सकता है। ऐसे में भारत विरोधी बयान और कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी हुक्मरानों की बयानबाजी तेज हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में जारी मौजूदा अस्थिरता की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत लगातार टल रही है। कर्ज की अगली किस्त को लेकर ये बातचीत नवंबर में ही होनी थी। लेकिन राजनीतिक अस्थिरता की वजह से आर्थिक मदद देने से पहले दूसरी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं भी आईएमएफ की हरी झंडी का इंतजार कर रही हैं। जानकार मानते हैं कि निरंतर राजनीतिक टकराव की वजह से देश की पूरी व्यवस्था कमज़ोर हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक टकराव में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिख रहा। पाकिस्तान के लिए गंभीर बात यह भी है है कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान को कोई राहत मिलती नजर नहीं आती। पिछले महीने ही सैयद असीम मुनीर अहमद शाह पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख बने थे। उन्होंने कमान संभालते ही कहा था कि भारत को मुंहतोड़ जवाब देंगे। जानकार कह रहे हैं अब शहबाज शरीफ और बिलावल भारत के खिलाफ बोलकर अपनी वफादारी दिखाएंगे। बिलावल का बयान भी इसी कड़ी में देखा जा सकता है और इन सबके मूल में वहां की आंतरिक स्थिति है।

पाकिस्तान में मुश्किल से छह अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार है। इससे कुछ हफ्तों तक ही आयात बिल चुकाया जा सकता है। पाक सरकार देश के भीतर हर मोर्चे पर नकाम हो रही है। ऐसे में जनता को खुश करने के लिए ध्यान बंटाने के कई फॉर्मूले सामने आ सकते हैं। फिलहाल भारत को पूरी तरह से सतर्क निगाह बनाए रखना होगा। गौरतलब विदेशी मुद्रा व्यापार की स्थिति है कि पाकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की तत्काल चुनाव कराने की मांग को खारिज कर दिया है। सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने कहा कि चुनाव केवल अगस्त 2023 में होंगे जब सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी। लेकिन, इमरान दबाव बनाए हुए हैं।

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