ट्रेडिंग क्या है और स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है(what is Trading and Types of Trading in Stock Market)

स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग (what is trading) को आसान शब्दों में समझें तो ट्रेडिंग का मतलब होता है “व्यापार” जैसे व्यापार में हम किसी भी वस्तु या चीज को खरीदते और भेजते हैं ठीक वैसे ही स्टॉक मार्केट की ट्रेडिंग में भी अलग-अलग कंपनियों के शेयर को खरीदा और बेचा जाता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे हम सब्जी मंडी में सब्जी को खरीदते और बेचते हैं मान लीजिए हमने कोई वस्तु ₹10 की खरीदी और उसे ₹20 में बेच दिया इस तरह हमें ₹10 का मुनाफा हुआ वहीं अगर हम ₹10 की खरीदी हुई चीज ₹8 में बेचते हैं तो हमें ₹2 का नुकसान हुआ। शेयर मार्केट में ट्रेडिंग भी इसी नियम पर काम करती है इसमें हम अलग-अलग कंपनियों के शेयर खरीदते हुए बेचते हैं और पैसा कमाते हैं। शेयर मार्किट में ट्रेडिंग के लिए सबसे पहले Demat account होना चाइये। मान लीजिए आपने किसी कंपनी के शेयर को ₹100 में खरीदा और उसे अपने ₹110 में बेच दिया तो आपको ₹10 का मुनाफा हुआ।वहीं अगर आप इसे ₹90 में बेचते हैं तो आपको ₹10 का घाटा या नुकसान होगा। अब आप यह तो समझ चुके है की स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग क्या होती है।(what is Trading in Stock Market) अगर आप घर बैठे अपना Demat account खोलना चाहते है तो Zerodha से अपना फ्री Demat account खोल सकते है। अब समझते है स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है।

स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है?(Types of Trading in Stock market)

स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग मुख्यत चार प्रकार की होती है:-

  1. Intraday Trading
  2. Scalping Trading
  3. Swing Trading
  4. Positional Trading

Intraday Trading

जैसा की आप सब जानते हैं कि कि स्टॉक मार्केट सुबह 9:15 पर खुलती है और दोपहर 3:30 पर बंद होती है। अगर हम कीसी भी कंपनी के स्टॉक को इस Time Period के बीच में खरीदे और बेचते हैं तो उसे कहा जाता है इंट्राडे ट्रेडिंग। इंट्राडे ट्रेडिंग की खास बात यह है कि इसमें कम समय और कम पैसा लगा कर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। बहुत सी brokerage Companies इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेडर्स को Margin money भी provide करती है। Margin money का मतलब है मान लीजिए अगर आपके पास आपके डिमैट अकाउंट में दस हज़ार रूपए है और आपका ब्रोकर अगर आपको 5 गुना तक मार्जिन मनी देता है तो आप उस दिन के लिए पचास हज़ार तक की ट्रेडिंग कर सकते हैं। अलग-अलग Brokerage Companies अलग-अलग मार्जिन मनी प्रोवाइड करते हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग मुख्य रूप से उन ट्रेडर्स के लिए सही रहती है जिन्हें काफी सालों का स्टॉक मार्केट का एक्सपीरियंस है। जिनकी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस में अच्छी पकड़ होती है और वो कैंडल चार्ट को अचे से समझ पाते है। अगर आप नए ट्रेडर है तो हम आपको राय देते हैं कि आप इस तरह के ट्रेडिंग से दूर रहें। आप पहले चार्ट को अच्छे से समझना सिख ले उसके बाद ही इंट्राडे में ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है ट्रेडिंग करे।

Scalping Trading

Scalping Trading महज कुछ सेकेंड से कुछ मिनटों की होती है। इस तरह की ट्रेडिंग में स्टॉक्स को कुछ सेकेंड या मिनट्स के अंदर अंदर खरीदा और बेच दिया जाता है। इस तरह की ट्रेडिंग में स्टॉक मार्केट के ट्रेंड को समझते हुए ट्रेडिंग को कुछ सेकंड के भीतर भीतर ही पूरा कर लिया जाता है। scalping trading में intraday trading की तरह ही टेक्निकल एनालिसिस और चार्ट को समझने का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। अगर आप टेक्निकल एनालिसिस और कैंडल चार्ट को अच्छी तरह नहीं समझते तो यहां आपको मुनाफा होने की जगह भारी भरकम नुकसान हो सकता है। Scalping trading में intraday trading की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है।

Swing Trading

स्विंग ट्रेडिंग में स्टॉक को कुछ दिनों या कुछ महीनों के लिए खरीद कर रख लिया जाता है और जैसे ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है ही उसका भाव ऊपर जाता है उसे बेचकर मुनाफा कमाया जाता है। Swing Tarding ऊपर की दोनों ट्रेडिंग से कहीं ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें दोनों ट्रेडिंग की तुलना में नुकसान होने ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है के chances बहुत कम होते हैं। स्विंग ट्रेडिंग की सबसे अच्छी बात बात यह है इसमें आपको दिन भर स्क्रीन पर चार्ट को देखना नहीं पड़ता। इस तरह की ट्रेडिंग कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स या जॉब करने वालों के लिए परफेक्ट होती हैं जिनके पास दिनभर स्क्रीन पर चार्ट देखने का समय नहीं होता। स्विंग ट्रेडिंग में ब्रोकर द्वारा आपको किसी भी तरह की मार्जिन मनी नहीं मिलती।

Positional Trading

पोजीशनल ट्रेडिंग में स्टॉक्स को खरीद कर लंबे समय तक रखा जाता है यह अवधि कई महीने या फिर कई साल भी हो सकती है। Long Term Trading सबसे सुरक्षित और सबसे ज्यादा मुनाफा ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है देने वाली ट्रेडिंग होती है। अगर आपको जबरदस्त पैसा कमाना है तो positional Tarding सबसे Best होती है। लम्बे समय तक स्टॉक्स को खरीद कर रखने वालो को इन्वेस्टर्स बोला जाता है और short ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है Term के लिए जो लोग stocks को खरीदते है उन्हें ट्रेडर्स कहा जाता है।

Zerodha में Intraday Trading कैसे करें ? फोटो सहित विस्तार से समझिये

भारत में लोगों में ट्रेडिंग का क्रेज दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. ट्रेडिंग के लिए Zerodha काफी अच्छा स्टॉक ब्रोकर है. आप इसमें Intraday, F&O ट्रेडिंग कर सकते हैं.

अगर आपने Zerodha में अकाउंट बना लिया है लेकिन आपको नही पता की zerodha me intraday trading kaise kare? तो यह पोस्ट आप के लिए ही है.

इस पोस्ट में मै आपको विस्तार से बताऊंगा की Zerodha में Intraday Trading कैसे करते है. इसके अलावा मैंने पिछली पोस्ट में Zerodha के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी आप उस पोस्ट को नीचे लिंक पर लिक्क करके पढ़ सकते हैं

Table of Contents

Zerodha Kite ट्रेडिंग कैसे करें ?

Zerodha में ट्रेडिंग करने के लिए आपको ट्रेडिंग के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए कम से कम इतना तो पता होना चहिये की ट्रेडिंग क्या होता है, यह कितने प्रकार की होती है और शेयर क्या होता है ?

ज्यादातर लोग Intraday या F&O ट्रेडिंग करते हैं. ट्रेडिंग करने के लिए पहले इनके बारे में समझ लेना बहुत जरूरी है की यह किस प्रकार की ट्रेडिंग है फिर प्रैक्टिकल करके बताता हूँ

Intraday Trading क्या है ?

यह ट्रेडिंग एक ही दिन में होती है. इस ट्रेडिंग में आपको शेयर मार्किट के अन्दर किसी कंपनी के स्टॉक को एक ही दिन के अन्दर खरीदकर बेचना होता है या ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है फिर बेचकर खरीदना होता है.

आपको बता दूँ स्टॉक मार्किट 9 बजे खुलती है और 3:30 बजे बंद हो जाती है इसी बीच अगर आप किसी कंपनी का स्टॉक खरीदते हैं और उसका प्राइस बढ़ जाता है तो आप उस स्टॉक को बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं.

इसी तरह जब आप किसी स्टॉक का प्राइस बढ़ता है तो उसे बेच देते हो और फिर प्राइस घटने पर खरीद लेते हो तो इससे आपका मुनाफा होता है.

Intraday Trading एक ही दिन की होती है अगर आप मार्किट बंद होने से पहले शेयर नही बेचते हो तो ब्रोकर आपका शेयर बेच देता है. अब जानते हैं Zerodha में Intraday trading कैसे करें ?

Zerodha में Intraday trading कैसे करें ?

किसी भी शेयर को जिस दिन खरीद रहें है, अगर उसे उसी दिन बेच दिया जाए तो ऐसे ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है Trading को Intraday Trading कहते हैं।

1. Zerodha में Intraday Trading करने के लिए आप अपनी जिस कंपनी में Intraday करना चाहते हैं उसके शेयर को सर्च करके Watchlist में Add कर लें ।

zerodha me intraday trading kaise kare

2. फिर उस Share पर क्लिक करें जिसके बाद Buy और Sale तथा View Chart का विकल्प दिखाई देगा। चार्ट को देखकर अगर आपको लगता है की स्टॉक का प्राइस बढेगा तो Buy पर क्लिक करें

3. अपने order की quantity डालें, Product में Intraday सिलेक्ट करें, Order type में Market सेलेक्ट करें फिर Swipe To Buy पर क्लिक करें. आपका स्टॉक खरीद जायेगा जिसको आप पोर्टफोलियो में दिख सकते हो.

zerodha me intraday trading kaise kare

Market सेलेक्ट करने पर उस स्टॉक का जो मार्किट प्राइस होगा वही आप खरीद लेते हो अगर आप किसी निश्चित राशी पर स्टॉक खरीदना चाहते हो तो Limit पर क्लिक करके वो amount भरकर स्टॉक Buy करना है.

इसके बाद जब उस स्टॉक का प्राइस उतना हो जायेगा जितना आप लिमिट में भरा है तो वो स्टॉक अपने आप खरीद जायेगा और पोर्टफोलियो में दिखाई देने लगेगा

4. पोर्टफोलियो में आर्डर execute होने के बाद आप अपना प्रॉफिट को बढ़ते या घटते हुए देख सकते हो जब आपको लगे की अब स्टॉक को बेच देना चाहिए तो स्टॉक पर क्लिक करके Sell पर क्लिक करके स्वाइप करके स्टॉक को बेच सकते हो.

Intraday Trading में अगर आप खुद से शेयर को नही बेचते हो तो 3 बजकर 15 या 20 मिनट पर शेयर अपने आप मार्केट रेट पर बिक जायेगा।

Zerodha intraday margin calculator क्या है ?

Zerodha में Intraday trading करने के लिए मार्जिन दिया जाता है ताकि आप कम प्राइस में ज्यादा शेयर खरीद सके, मार्जिन का मतलब छूट यानि शेयर के प्राइस में छूट दी जाती है।

आपको बता दूँ Zerodha, Intraday Trading करने के लिए 20% मार्जिन देता है ? यानि किसी शेयर का प्राइस 100 रूपए है तो आपको वो 20 रूपए में मिल जायेगा।

उदाहरण के लिए आप फोटो को देख सकते हैं की JindalStel के शेयर का प्राइस 444.15 है लेकिन यह मुझे 20% मार्जिन के साथ 88.53 रूपए का मिल गया है।

इसके अलावा ज्यादा जानकरी के लिए आप लिंक पर क्लिक करके zerodha margin calculator को भी देख सकते हैं – Click here इस तरह से आप कम प्राइस में ज्यादा मात्रा में शेयर लेकर ट्रेडिंग कर सकते हैं।

अंतिम शब्द – यहाँ मैंने फोटो के Zerodha में Intraday ट्रेडिंग करने के बारे में बताया है ताकि आपको सब कुछ अच्छे से समझ आ जाये। उम्मीद करता हूँ आपको समझ आ गया होगा की zerodha me intraday trading kaise kare?

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

जब भी नए लोग शेयर मार्केट में आते है। उसके मन में ये सवाल जरूर आता ही हैं। Trading ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है और Investing क्या है इन दोनों में क्या अंतर होते हैं। ये सवाल मन में आना जायज भी हैं। जब तब नए लोगो को ये समझ नहीं आते उसे कैसे पता लगेगा उसका जोखिम क्षमता और लक्ष्य के हिसाब से, Trading और Investing में उसके लिए किया बेहतर होगा। आज हम जानेंगे Trading और Investing होता क्या है, दोनों में क्या अंतर हैं, Trading कितने तरह की होते हैं। साथ ही साथ जानेंगे कि ट्रेडिंग से हर रोज कमाई कर सकते है या नहीं।

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Trading क्या होता है:-

जब भी आप शेयर को खरीदते हो और उस दिन ही बेच देते हो। तब इसे Trading कहते हैं। मतलब आप Stock Trading में ज्यादा समय तक शेयर को अपने पास नहीं रख सकते हो। मान लीजिए आप एक शेयर खरीदा 200 रुपये में प्रॉफिट होने पर आपने उस दिन ही 220 रुपये में बेच दिया। इसी प्रोसेस को कहते है ट्रेडिंग। Trading करते वक्त Trader हमेशा Technical Analysis के साथ चलते हैं। जिससे उस कंपनी के शेयर प्राइस को कुछ समय आगे का शेयर प्राइस अंदाजा हो जाता हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कंपनी क्या काम करती है, भविष्य की योजना क्या हैं। सिर्फ ये देखा जाएगा शेयर प्राइस किस तरफ जा रही है। Trading करते समय न्यूज़ पर ध्यान देना बहुत जरुरी होता हैं. क्युकी कोई अच्छी खबर किसी भी शेयर को ऊपर ले जा सकती हैं। और बुरी खबर एकदम से नीचे भी ला सकती हैं।

Trading के प्रकार (Types of Trading):-

बहुत सारे Types of Trading होते है मुख्य रूप से 5 तरह का होता है। जिससे ट्रेडर ट्रेडिंग करके पैसा कमाई कर सके।

  1. Day Trading:- इसमें ट्रेडर को जिस दिन खरीदा उस दिन ही शेयर को बेचना पड़ता हैं। उस स्टॉक को कुछ समय के लिए होल्ड कर सकता है। मार्केट बंद होने से पहले ही ट्रेडर को शेयर बेचना ही पड़ता हैं। इसमें छोटे छोटे पल स्टॉक में होने वाले ऊपर नीचे से Traders अपना प्रॉफिट कर सकते हैं।
  2. Scalping Trading:- Day Trading और Scalping दोनों एक ही तरह का होता हैं। इस ट्रेडिंग में खरीद बेच होते है लेकिन दिन में कही बार ये ट्रेंड किया जा सकता हैं। आपको प्रॉफिट भी हो सकता है और नुकसान भी, इस पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार का ट्रेंड किया हैं।
  3. Swing Trading:- इस ट्रेडिंग में आप खरीद और बेच तो सकते हो। अगर आपको खरीदा हुआ दिन नुकसान हो रहा है तो आप उस दिन शेयर को ना बेचकर कुछ दिनों तक होल्ड भी कर सकते हो। फिर जब प्रॉफिट आ जाता है तब बेचकर मुनाफा कमाई कर सकते हैं।
  4. Momentum Trading:- इस Trading को ट्रेंडर तब प्रयोग करता है जब कोई शेयर ऊपर जाता दिखता हैं। तब खरीदारी कर लेता है जैसे ही कोई उस शेयर का खराब न्यूज़ आता है तब तुरंत बेच देते हैं। जिससे Trader कुछ समय में ही अच्छी मुनाफा कमाई कर लेते हैं। लेकिन इसके लिए न्यूज़ के साथ अपडेट रहना बहुत जरुरी हैं। अगर सही समय पर शेयर को नहीं बेचा तो बहुत ज्यादा नुकसान भी हो सकता हैं।
  5. Position Trading:- इस तरह का ट्रेडिंग में आप कुछ दिनों के लिए ट्रेडिंग कर सकते हैं। ये Trading उन लोगों के लिए है जो लोग नियमित रूप से मार्केट में नहीं आते। खरीद कर कुछ दिनों के बाद मुनाफा आते ही बेच कर निकल जाते। इसी तरह का ट्रेडर को कहते हैं Position Trading।

Investing क्या होता है:-

जब कोई शेयर आज खरीद के बहुत साल बाद बेच देते है तब इसे Investing कहते हैं। इन्वेस्टिंग में आप बहुत लंबे समय के शेयर को अपने Demat Account में रखते हो। कंपनी के वित्तीय विवरण, पिछले प्रदर्शन, भविष्य में होने वाले ग्रोथ को देखते हुए ही किसी भी शेयर में इन्वेस्ट करता हैं। Investing में Fundamental Analysis करना बहुत जरुरी हैं। जिससे आपको कंपनी के बारे अच्छी नॉलेज होगा और भविष्य में अच्छा रितर्न कमाके देगा।

Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है

Investing के प्रकार (Types of Investing):-

मुख्य रूप से इन्वेस्टिंग दो तरह का होता हैं। जिससे आपको लंबे समय में जबरदस्त मुनाफा कमाई करके देगा।

  1. Value Investing:- इस तरह का इन्वेस्टिंग में आप अच्छी कंपनी का शेयर प्राइस जब नीचे आता है। तब आपको उसमे इन्वेस्ट करना चाहिए। Value Investing में इन्वेस्टर शेयर का विश्लेषण करके देखता है कि कौन सा शेयर कम दाम में मिल रहा हैं। फिर उसमे लंबे समय तक निवेश करता हैं।
  2. Growth Investment:- जो कंपनी भविष्य में ग्रोथ की संभावना देखता है उसी शेयर में इन्वेस्टर लंबे समय के लिए निवेश करता है। इसी को Growth Investment कहते हैं। इससे Investor उस कंपनी में ज्यादा इन्वेस्ट करता है जो कंपनी Fundamentally बहुत मजबूत हैं।

Trading और Investing में अंतर क्या है (Difference between Trading and Investing):-

  • Trading कम समय के लिए होता हैं।
  • Investing लंबे समय के लिए होता हैं।
  • इसमें Technical Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Investing में Fundamental Analysis का इस्तेमाल करते हैं।
  • Trading में कम समय में बहुत ज्यादा पैसा कमाई कर सकते हैं।
  • इसमें आपका कमाई करने के लिए बहुत ज्यादा समय लगता हैं।
  • ट्रेडिंग करने से ब्रोकर का शुल्क बहुत ज्यादा होता हैं।
  • इन्वेस्टिंग में ब्रोकर का शुल्क ना के बराबर होता हैं।
  • Trading जुआ की तरह होता हैं सोचने समझने के लिए समय नहीं मिलता।
  • Investing में आप सोच समझकर निवेश कर सकते हैं

क्या Trading से रोज पैसा कमाई कर सकते है:-

जी बिल्कुल आप ट्रेडिंग से हर रोज पैसा कमाई कर सकते हो। लेकिन जैसा कि हम जानते है Share Market रिस्क भी होता हैं। जिस तरह आप रेगुलर कमाई कर सकते है ठीक उसी तरह नुकसान भी हो सकता हैं। लाभ और नुकसान निर्भर करता है आपके ट्रेडिंग रणनीति के ऊपर। कब आप कौन सा ट्रेड ले रहे हो और आप कितना सही हो। जहा लोग बहुत कम समय में लाखो रूपया कमा लेते है वही कुछ लोग कम समय में लाखों रुपये का नुकसान भी कर लेते हैं।

अगर आप नए निवेशक हो तो आपको सबसे पहले Investing की तरफ जाना चाहिए। क्युकी अच्छा शेयर कम समय में नीचे भी आ सकता हैं। लेकिन लंबे समय में वो शेयर जरूर ऊपर जाएगा ही। आपको एसी शेयर में निवेश करना चाहिए जो शेयर भबिस्य में बढ़ने की पूरी संभावना रहती हैं।

आशा करता हु आपको Trading और Investment क्या हैं, दोनों में क्या अंतर है, कितने Types के होते है आपको अच्छी तरह से समझमे आ गया होगा । इससे जुड़ी कोई सवाल या सुझाब है तो कमेंट में जरुर बताए। शेयर मार्केट के बारे में बिस्तार से जानने के लिए आप हमारे और भी पोस्ट को पढ़ सकते हैं।

Crypto Trading : कैसे करते हैं क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और कैसे होती है इसकी ट्रेडिंग, समझिए

Crypto Trading : क्रिप्टोकरेंसी ट्रेड ब्लॉकचेन तकनीक पर काम करती है और निवेश को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन कोड का इस्तेमाल करती है. आप अपने क्रिप्टो टोकन या तो सीधे बायर को बेच सकते हैं या फिर ज्यादा सुरक्षित रहते हुए एक्सचेंज पर ट्रेडिंग कर सकते हैं.

Crypto Trading : कैसे करते हैं क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और कैसे होती है इसकी ट्रेडिंग, समझिए

Cryptocurrency Trading : क्रिप्टोकरेंसी में निवेश को लेकर है बहुत से भ्रम. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षित रहने वाली एक डिजिटल करेंसी है. माइनिंग के जरिए नई करेंसी या टोकन जेनरेट किए जाते हैं. माइनिंग का मतलब उत्कृष्ट कंप्यूटरों पर जटिल गणितीय समीकरणों को हल करने से है. इस प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं और इसी तरह नए क्रिप्टो कॉइन जेनरेट होते हैं. लेकिन जो निवेशक होते हैं, वो पहले से मौजूद कॉइन्स में ही ट्रेडिंग कर सकते हैं. क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव का कोई हिसाब नहीं रहता है. मार्केट अचानक उठता है, अचानक गिरता है, इससे बहुत से लोग लखपति बन चुके हैं, लेकिन बहुतों ने अपना पैसा भी उतनी ही तेजी से डुबोया है.

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अगर आपको क्रिप्टो ट्रेडिंग को लेकर कुछ कंफ्यूजन है कि आखिर यह कैसे काम करता है, तो आप अकेले नहीं हैं. बहुत से लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वर्चुअल करेंसी में कैसे निवेश करें. हम इस एक्सप्लेनर में यही एक्सप्लेन करने की कोशिश कर रहे हैं कि आप क्रिप्टोकरेंसी में कैसे निवेश कर सकते हैं, और क्या आपको निवेश करना चाहिए.

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

क्रिप्टोकरेंसी क्या है, ये समझने के लिए समझिए कि यह क्या नहीं है. यह हमारा ट्रेडिशनल, सरकारी करेंसी नहीं है, लेकिन इसे लेकर स्वीकार्यता बढ़ रही है. ट्रेडिशनल करेंसी एक सेंट्रलाइज्ड डिस्टिब्यूशन यानी एक बिंदु से वितरित होने वाले सिस्टम पर काम करती है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नॉलजी, ब्लॉकचेन, के जरिए मेंटेन किया जाता है. इससे इस सिस्टम में काफी पारदर्शिता रहती है, लेकिन एन्क्रिप्शन के चलते एनॉनिमिटी रहती है यानी कि कुछ चीजें गुप्त रहती हैं. क्रिप्टो के समर्थकों का कहना है कि यह वर्चुअल करेंसी निवेशकों को यह ताकत देती है कि आपस में डील करें, न कि ट्रेडिशनल करेंसी की तरह नियमन संस्थाओं के तहत.

क्रिप्टो एक्सचेंज का एक वर्चुअल माध्यम है. इसे प्रॉडक्ट या सर्विस खरीदने के लिए इस्तेमाल में लिया जा सकता है. जो क्रिप्टो ट्रांजैक्शन होते हैं. उन्हें पब्लिक लेज़र यानी बहीखाते में रखा जाता है और क्रिप्टोग्राफी से सिक्योर किया जाता है.

क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग कैसे होती है?

इसके लिए आपको पहले ये जानना होगा कि यह बनता कैसे है. क्रिप्टो जेनरेट करने की प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं. और ये काम बहुत ही उत्कृष्ट कंप्यूटर्स में जटिल क्रिप्टोग्राफिक इक्वेशन्स यानी समीकरणों को हल करके किया जाता है. इसके बदले में यूजर को रिवॉर्ड के रूप में कॉइन मिलती है. इसके बाद इसे उस कॉइन के एक्सचेंज पर बेचा जाता है.

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कौन कर सकता है ट्रेडिंग?

ऐसे लोग जो कंप्यूटर या टेक सैवी नहीं हैं, वो कैसे क्रिप्टो निवेश की दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं? ऐसा जरूरी नहीं है कि हर निवेशक क्रिप्टो माइनिंग करता है. अधिकतर निवेशक बाजार में पहले से मौजूद कॉइन्स या टोकन्स में ट्रेडिंग करते हैं. क्रिप्टो इन्वेस्टर बनने के लिए माइनर बनना जरूरी नहीं है. आप असली पैसों से एक्सचेंज पर मौजूद ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है हजारों कॉइन्स और टोकन्स में से कोई भी खरीद सकते हैं. भारत में ऐसे बहुत सारे एक्सचेंज हैं तो कम फीस या कमीशन में ये सुविधा देते हैं. लेकिन यह जानना जरूरी है कि क्रिप्टो में निवेश जोखिम भरा है और मार्केट कभी-कभी जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखता है. इसलिए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स निवेशकों से एक ही बार में बाजार में पूरी तरह घुसने की बजाय रिस्क को झेलने की क्षमता रखने की सलाह देते हैं.

यह समझना भी जरूरी है कि सिक्योर इन्वेस्टमेंट, सेफ इन्वेस्टमेंट नहीं होता है. यानी कि आपका निवेश ब्लॉकचेन में तो सुरक्षित रहेगा लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर इसपर होगा ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है ही होगा, इसलिए निवेशकों को पैसा लगाने से पहले जरूरी रिसर्च करना चाहिए.

क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल क्या है?

यह डिजिटल कॉइन उसी तरह का निवेश है, जैसे हम सोने में निवेश करके इसे स्टोर करके रखते हैं. लेकिन अब कुछ कंपनियां भी अपने प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज़ के लिए क्रिप्टो में पेमेंट को समर्थन दे रही हैं. वहीं, कुछ देश तो इसे कानूनी वैधता देने पर विचार कर रहे हैं.

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