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10. पैसे का संतुलन बनाइए
आपको अपने जीवन में पैसे कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन को लेकर संतुलन बनाए रखना है. कहने का तात्पर्य है कि आपको अत्यधिक खर्चीला बनना है और ना ही अत्यधिक कंजूस. शुरुआती सैलरी से ही बड़े फंड में कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन पैसे डालने के लिए खुद को मजबूर न करें. अपने प्राप्त सैलरी के हिसाब से जरूरी खर्चों के लिए पैसे का पहले ही बांट दें. सबसे जरूरी बात है कि अपने पैसे के खर्च और उसको मैनेज करने पर अधिक ध्यान दीजिए.

मनी मैनेजमेंट कैसे सीखें

जैसा की हम सभी जानते हैं की पैसा हर इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। और बिना पैसों के इंसान की किसी भी जरुरत को पूरा करना लगभग नामुमकिन है , जहाँ एक तरफ पैसा हमारे भविष्य को सुरक्षित करने का जरिया है वहीँ हमारी वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने का भी मुख्य साधन है।

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Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

आप कैसे घर चलाते हैं और कैसे मनी मैनेजमेंट करते हैं, इस पर बहुत हद तक निर्भर करता है कि आपके जीवन में पैसे के मोर्चे पर कितनी खुशहाली रहती है. यहां हम आपको घर चलाने और पैसे के प्रबंधन की कुछ ऐसी ट्रिक्स बता रहे हैं जो आपके बेहद काम आएंगी.

Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

अपने घर का बजट हर महीने बनाएंः अपने घर का कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन मासिक बजट जरूर बनाएं और उसमें सभी खर्चों को शामिल करें. चाहे वह बाहर लंच या डिनर करने से जुड़ा हो या शॉपिंग से जुड़ा हो. जरूरत के लिए 50 फीसदी रखें, इमरजेंसी के लिए 30 फीसदी बचाएं और भविष्य के लिए 20 फीसदी पैसा बचाएं.

Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

घर में हर पेमेंट की उचित ट्रैकिंग रखेंः बिजली बिल, खाने का बिल, फोन, टेलीफोन बिल, रसोई की ग्रॉसरी, घर का अन्य सामान आदि सभी मदों में जो भी खर्च या पेमेंट हो रहा है, उसकी ट्रैकिंग रखें. किसी भी खर्च को बिना नोट किए ना जाने दें. आप देखेंगे कि आपके पास अपनी सैलरी में से कितना फालतू खर्च आप कर रहे हैं जिसे बचा सकते हैं.

Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

बचत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंः जितना भी खर्च करें, संभलकर करें. अगर ऑनलाइन सब्जियां-फल-दूध मंगाना सस्ता पड़ रहा है तो मंगाएं लेकिन ऐसा न होने पर अपने आसपास ही खरीदारी करें. हर खरीदारी पर मैक्सिमम जितनी बचत कर सकते हैं वो करें. सैलरीड क्लास के लिए बचत की आदत को अपनाना बेहद जरूरी है वर्ना वो कर्ज के जाल में फंस सकता है.

Money Management: ऐसे करें पैसे का प्रबंधन कि बचत के साथ कर्ज के जाल से भी हों फ्री, जानें काम की Tricks

क्रेडिट कार्ड से खरीदारी सीमित करेंः क्रेडिट कार्ड होने का अर्थ ये नहीं है कि आप अनापशनाप, बिना जरूरत का सामन खरीदते रहें. इसे इमरजेंसी के उपयोग के लिए रखें और बेहद जरूरत होने पर ही इस्तेमाल करें. याद रखें क्रेडिट मिलने का अर्थ ये नहीं कि आप जमकर खरीदारी करें और वो भी बिना जरूरत की. आखिरकार इस पैसे को आपको ही चुकाना है.

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Money Management: पैसों का सही मैनेजमेंट नहीं कर पा रहे तो युवा अपनाएं ये 10 तरीके, हमेशा रहेंगे टेंशन फ्री

How to Manage your Money : पैसे को कैसे मैनेज करना चाहिए ताकि अपनी लाइफ को इंजॉय कर सकें और फाइनेंशियल सिक्योरिटी भी बनी रहे.

Manage your money and expenses

How to Use Money : वह 10 तरीके जिससे आप अपने पैसे को अच्छे से मैनेज करते हुए अपनी लाइफ को एंजॉय कर सकते हैं.

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2. छोटे खर्च पर नजर रखें
दूसरी सलाह कमाने वाले युवाओं को यह है कि वह अपने रोजमर्रा के जीवन में होने वाले छोटे खर्चे पर ध्यान दें. हो सके तो अपने छोटे खर्चों को मंथली ट्रैक करें. ट्रैक करने के बाद देखें कि आपका मंथली खर्च कितना हो रहा है. उसके बाद उन खर्चों को बंद करने का प्रयास करें. छोटे खर्च को ट्रैक करने की आदत आपको बड़े सेविंग के रूप में दिखेगा.

3. जरूरी बिलों का भुगतान पहले
पैसा कमाने वाले युवाओं में अक्सर यह देखा जाता है कि वह अपनी दैनिक दिनचर्या में इस्तेमाल करने वाले सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, गैस आदि बिलों का भुगतान करने में देरी करते है. युवा बिल का भुगतान करने के अलावा अपना कीमती पैसा कहीं और अनावश्यक चीजों में खर्च कर देते हैं. जिस वजह से जरूरी बिल बकाया रह जाता है. जो उनके लिए एक बोझ का काम करता है. इन सब से बचने के लिए युवाओं को इन बिल कि पेमेंट के लिए ऑटो पे सेट करना चाहिए या फिर उनके लिए पहले से ही पैसा अलग करके रख देना चाहिए.

4. अनावश्यक क्रेडिट कार्ड न लें
आजकल के बैंक बड़ी ही आसानी से क्रेडिट कार्ड अपने ग्राहकों को उपलब्ध करवाते हैं. जिस वजह से युवा अपने पास कई सारे बैंक के क्रेडिट कार्ड रखे रहते हैं. जिसका इस्तेमाल वह अपने रोजाना के अनावश्यक खर्चों के भुगतान के लिए करते हैं. जिस वजह से महीने के अंत में उनके पास बड़ा क्रेडिट कार्ड का बिल आ जाता है. हाल में नौकरी शुरू किए हुए युवा को क्रेडिट कार्ड लेने से बचना चाहिए.

5. पैसे के खर्च का सही चुनाव करें
पैसा कमाने वाले युवाओं को अपनी आवश्यकता के अनुसार पैसे को खर्च करना चाहिए. अर्थात युवा को उसके जीवन में क्या सबसे जरूरी है. उसको रोजाना कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन कहां रहना है कहां खाना है कैसे यात्रा करना है इन सब पर खर्चा करने का चुनाव खुद करना चाहिए. ध्यान रहे यह चुनाव करते समय खुद की कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन पसंद और सहूलियत पर भी ध्यान रखना चाहिए. जो उसके लिए बेहतर हो उसी का चुनाव करना चाहिए.

6. कागजी कार्रवाई अवश्य करें
एक युवा को अपने बैंक, डीमेट से रिलेटेड खाते को ट्रैक करने के लिए जरूरी फोन नंबर ईमेल आईडी, केवाईसी इत्यादि को पूरा करना चाहिए. अगर आप टैक्स का भुगतान करते हैं तो उसको फाइल करें. सभी वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करने के लिए डिजिटल तरीका अपनाएं.

7. दूसरों के साथ खर्च को बांटे
दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाना, क्लब में पार्टी करना, कहीं बाहर टूर पर जाने में जो आप अपने जेब से खर्च कर रहे है. उसको सभी दोस्तों में बराबरी बांट देना चाहिए. उसके बाद सभी से उनके हिस्से की राशि को लेना चाहिए. जिससे आप एक बड़ा खर्च करने से बच जाएंगे.

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8. अनपेड डेट का भुगतान करें
अक्सर यह देखा जाता है कि एक युवा अपने डेट का भुगतान नहीं करता है जिस वजह से उस डेट पर लगातार इंटरेस्ट चलता रहता है. जो कुछ सालों में बहुत बड़ी राशि बन जाती है. जो युवाओं को बाद में पेमेंट करने में काफ़ी तकलीफ देती है. इस तरह की तकलीफ से बचने के लिए युवाओं को अपने कर्ज को शुरुआती दिनों से भुगतान करना चाहिए. साथ ही युवाओं को इस कर्ज को भुगतान करने का एक निश्चित डेट भी बना लेना चाहिए. जिस दिन इसको वो पूरा कर देंगे.

9. कैरियर और इनकम पर ध्यान दें
हाल फिलहाल में पैसा कमाने वाले युवाओं को नया घर खरीदना और उसका ईएमआई भरते रहना. या फिर सैलरी पर कटने वाले टैक्स से बचने के लिए बीमा खरीदना और उसका प्रीमियम भरते रहना. इन सब चीजों से बचना चाहिए. शुरुआती दिनों में आपको अपने कैरियर और इनकम को बढ़ाने पर फोकस देना चाहिए. हां कुछ समय के बाद आप अपने भविष्य के लिए जरूरी चीजों पर ध्यान दे सकते हैं. अनावश्यक पैसों खर्च के बोझ से बचिए.

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10. पैसे का संतुलन बनाइए
आपको अपने जीवन में पैसे को लेकर संतुलन बनाए रखना है. कहने का तात्पर्य है कि आपको अत्यधिक खर्चीला बनना है और ना ही अत्यधिक कंजूस. शुरुआती सैलरी से ही बड़े फंड में पैसे डालने के लिए खुद को मजबूर न करें. अपने प्राप्त सैलरी के हिसाब से जरूरी खर्चों के लिए पैसे का पहले ही बांट दें. सबसे जरूरी बात है कि अपने पैसे के खर्च और उसको मैनेज करने पर अधिक ध्यान दीजिए.

नई जॉब में सेविंग्स: अब मनी मैनेजमेंट का सोचें- इन टिप्स से सीखें कैसे बचाएं पैसे और कैसे करें खर्च

पैसे को आप बचाते हैं तो पैसा आपको बचाता है. भले ही आपको जल्दी पैसों की जरूरत नहीं दिखाई दे रही हो, लेकिन सेविंग्स में किए गए पैसे काटते नहीं हैं, भले ही आपका फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम पहले से मजबूत हो.

अगर आपने हाल ही में कमाना शुरू किया है या आपकी पहली जॉब लगी है तो अपने कमाए हुए पैसों के लेकर आपने भी कई तरह की प्लानिंग कर रखी होगी. अब आपके पास अपना इनकम सोर्स है और आप जो चाहे वो कर सकते हैं इन पैसों का. आपके दिमाग में बहुत सी चीज चल रही होंगी, सैलरी कहां खर्च करनी है, क्या खरीदना है, कहां पैसे लगाने हैं, वगैरह-वगैरह. ये सबकुछ ठीक है, लेकिन कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन यह ऐसा वक्त भी है जब आपको मनी मैनेजमेंट के बारे में भी सोचना शुरू कर देना चाहिए.

पैसे को आप बचाते हैं तो पैसा आपको बचाता है. भले ही आपको जल्दी पैसों की जरूरत नहीं दिखाई दे रही हो, लेकिन सेविंग्स में किए गए पैसे काटते नहीं हैं, भले ही आपका फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम पहले से मजबूत हो.

अगर आप फाइनेंशियल प्लानिंग में नौसिखिया है- तो हम आपको यहां कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपने मनी मैटर्स को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएंगे.

सबसे पहले यह ध्यान में रखें कि आपको अपने खर्चे, उधार और निवेश तीनों में बैलेंस बनाकर रखना है. ये तीन फैक्टर्स आपकी जेब खाली कर सकते हैं या स्ट्रेस फ्री रख सकते हैं.

जितनी जल्दी हो सके सेविंग करना शुरू करें

एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि आप जितनी जल्दी हो सके, अपनी बचत शुरू कर दें. भले ही छोटा अमाउंट हो लेकिन करें. आप जितनी जल्दी बचत करना शुरू करेंगे आपके पास भविष्य में उतना ही बड़ा फंड होगा. इस प्रैक्टिस को आपको रूटीन में लाना होगा. एक छोटा फंड तैयार करिए, जिसमें आप रूटीन के साथ बचत कर सकें.

खर्च के पहले बचत

यह फॉर्मूला जिंदगी भर आपके काम आएगा. कोई भी खर्च हो, उसकी प्रायोरिटी को समझिए. उस पैसे का मोल समझिए कि वो पैसा कहां जा रहा है, क्या उसे खर्च कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन किए बिना आपका काम बन सकता है. आपको खर्च करने से पहले थोड़ी बचत कर लेनी चाहिए. यानी कि आप तभी खर्च करिए, जब आपने बचत के लिए ठीकठाक पैसे बचा लिए हों.

इंश्योरेंस में पैसे लगाएं

सबसे पहले आपको लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस में पैसे लगाने चाहिए. खुद को सिक्योर करिए, अपनी फैमिली को सिक्योर करिए. इंश्योरेंस में पैसे लगाकर आप भविष्य में किसी इमरजेंसी से निपटने के लिए तैयार हो सकते हैं.

क्रेडिट कार्ड की आंच

क्रेडिट कार्ड आजकल के युवाओं की फाइनेंशियल हैबिट कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन में शामिल है. अगर आप भी अपने खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड पर निर्भर रहते हैं तो जरूरी है कि आप अपने ड्यूज़ टाइम पर चुकाते रहें. ड्यूज़ न चुकाने की स्थिति में आपको ज्यादा ब्याज तो भरना ही पड़ेगा, ऊपर से जुर्माना भरने में जो जेब खाली होगी वो अलग.

अगर आपकी उम्र 30 से ज्यादा है तो ऐसे करें पैसे का प्रबंधन

परिवार में शादी या अपनों की बीमारी या माता-पिता की पैसों की जरूरतों से कैश की कमी होती है.

अगर आपकी उम्र 30 से ज्यादा है तो ऐसे करें पैसे का प्रबंधन

हजारों इंजीनियरों के बड़े जमघट में उसे नहीं पता कि उसका करियर कहां जाएगा. वह नौकरी से संतुष्ट है. इसलिए इसे बदलने के बारे में भी नहीं सोचता है. नौकरी ठीकठाक चलने पर हम अपने से ज्यादा सवाल-जवाब नहीं करते हैं. हमें हर महीने सैलरी की आदत पड़ जाती है. इस पैसे से जोखिम लेना ठीक नहीं लगता है. 30 से 35 की उम्र में स्थायी आमदनी एक बड़ा लक्ष्य पाने जैसा है.

इस युवक ने पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल करने के लिए अपनी नौकरी नहीं छोड़ी. उसे नहीं पता कि दो साल तक पढ़ने के बाद नौकरी का अच्छा मौका मिलेगा भी कि नहीं.

दूसरा, प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाना मुश्किल काम है. काम करते हुए जीआरई / जीमैट में अच्छा स्कोर लाना भी कठिन है. उसके लिए स्कूल के अच्छे प्लेसमेंट के आश्वासन के बिना नौकरी छोड़ना कठिन है. ऐसे कई लोग हैं जो पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री हासिल करने के बाद भी नौकरी प्राप्त करने के लिए समझौता करते हैं.

तीस की उम्र के पड़ाव में जो पेशा चुन लिया जाता है, अक्सर उसी के साथ समझौता करने की आदत पड़ जाती है. यह ज्यादातर लोगों की कहानी है.

इस युवक की पहली समस्या क्रेडिट कार्ड कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन है. पैसा कमाने और स्वतंत्र होने का मतलब है कि खर्च करने की आजादी हो. वह उन चीजों पर खर्च करने में खुश है, जो उसके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. इनमें गैजेट, जिम मेंबरशिप, खाना-पीना, सैर-सपाटा शामिल है.

फिर उसने शादी कर ली. इसके बाद उस पर उपहारों, रिश्तेदारों, समारोहों और शादी-ब्याह में खर्च करने का बोझ आ गया. अब वह जल्दी-जल्दी नियमित रूप से अपने कार्ड पर उधार लेने लगा है. वह जानता है कि यह महंगा है, लेकिन कोर्इ विकल्प नहीं है. यह उसे सुविधाजनक लग रहा है.

पैसे के साथ विकल्प बनाना और उन्हें प्राथमिकता देने में सक्षम होना एक कौशल है. यह काफी मशक्कत के बाद आता है. 30 से 35 साल तक खर्च करने के तौर-तरीकों पर महारत हासिल कर लेनी चाहिए. न कहना आ जाना चाहिए. साथ ही खर्च करने के स्मार्ट तरीके खोज लेने चाहिए ताकि बाद में अफसोस न हो.

इस युवक की दूसरी समस्या ईएमआई है. उसे घर और कार के लिए मासिक किस्त चुकानी पड़ती है. अब कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन पति-पत्नी दूसरी कार भी चाहते हैं.

लोन के कारण खर्च करने के लिए कैश की कमी हो जाती है. फिर जरूरी खर्चे भी चलाने मुश्किल हो जाते हैं. ईएमआई पर ज्यादा वेतन खर्च करने में समझदारी नहीं है. यह भी समझ के परे है कि घरेलू खर्च क्रेडिट कार्ड पर चलें.

बैंक आपकी आय के कैसे करें अपने पैसे का प्रबंधन आधार पर आपको कर्ज देने के लिए इच्छुक हो सकते हैं, लेकिन यह केवल आप ही जानते हैं कि आपके खर्च कितने हैं. घर चलाने के लिए अनिवार्य खर्चों को ध्यान में रखने के बाद जो भी कमार्इ बचती है, उसका 50 फीसदी से ज्यादा र्इएमआर्इ पर नहीं खर्च किया जाना चाहिए. 35 साल की उम्र तक नियमित बचत की आदत बन जानी चाहिए. आमदनी का कम से कम 20 फीसदी बचाना चाहिए. घर की ईएमआई को बचत के रूप में नहीं गिना जा सकता है.

तीसरी समस्या यह है कि इस युवक को जब-तब नकदी की किल्लत हो जाती है. यहां तक कि पति-पत्नी दोनों के कमाने के बावजूद जब वे छुट्टी मनाकर लौटते है तो पाते हैं कि उन्होंने टिकट पर ही बहुत खर्च कर दिया.

परिवार में शादी या अपनों की बीमारी, या माता-पिता की पैसों की जरूरतों से परिवार के पास कैश नहीं बचता है. कड़ार्इ के साथ रहना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

यह इस युवक के खराब एसेट आवंटन का प्रत्यक्ष नतीजा है. उसकी सबसे बड़ी संपत्ति घर है. उसका परिवार इसमें रहता है. इस घर ने ईएमआई के रूप में एक बड़ा हिस्सा लिया है. लेकिन, यह आमदनी का साधन नहीं बना है.

पहले घर पर अधिक खर्च करना समझदारी नहीं है. आय बढ़ेगी तो वैसे भी आप घर खरीद ही लेंगे. पहला घर बुनियादी जरूरत के लिए होना चाहिए. जिसमें आप केवल रह सकें. यह शहर के बाहरी इलाके में भी हो तो कोर्इ बात नहीं है. कम ईएमआई अन्य संपत्तियां बनाने की गुंजाइश छोड़ देगी. इससे आप बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और शेयर जैसी संपत्ति बना सकते हैं.

जब आपके पास लिक्विड एसेट होते हैं तो आप उन पर कम दरों पर कर्ज ले सकते हैं. जब जरूरत पड़े तो उन्हें भुनाया भी जा सकता है. जल्दी बचत शुरू करने की आदत अच्छी होती है. भले ही यह एक छोटी राशि से ही क्यों न हो.

1000 रुपये का सिप छोटा लग सकता है, लेकिन 10 साल बाद यह आपको सहारा देने वाली रकम बन जाएगी.

यह युवक वित्तीय लक्ष्यों के बारे में चिंता करता है. वह अक्सर उनके बारे में सुनता भी है. उसे घबराहट रहती है कि उसके पास अपने बच्चे के लिए पर्याप्त है या नहीं. वह अपने रिटायरमेंट के बारे में सोचता है. उसे लगता है कि कहीं इसके लिए देर तो नहीं हो गर्इ है. इन सब चीजों को देखने का आसान तरीका है. वह है एसेट बनाने का.

35 साल के साथ अच्छी बात यह होती है कि बहुत कुछ देखना बचा होता है. जब आप 50 के पड़ाव तक पहुंचते हैं तो आपने जो कुछ बनाया होता है, उसे लेकर संतोष होता है.

लेखक सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग की चेयरपर्सन हैं.

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