कितने रंग की होती हैं गाड़ियों में नंबर प्लेट, जानिए हर रंग का क्या है मतलब?

देश में अलग-अलग वाहनों में अलग-अलग रंग की नंबर प्लेट होती है. हर कलर का अपना खास मतलब होता है. जिससे आप पहचान सकते हैं कि इस कार का इस्तेमाल कौन कर रहा है.

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 11 Nov 2020 06:51 PM (IST)

सड़क पर दौड़ते वाहनों में आपको अलग अलग रंग की नंबर प्लेट नज़र आती होंगी. सफेद रंग की नंबर प्लेट ज्यादातर गाड़ियों में होती है. गाड़ियों पर कुल 7 तरह की नंबर प्लेट होती हैं जिनमें से कई नंबर प्लेट ऐसी होती हैं जिनका मतलब आप नहीं जानते होंगे. ऐसी नंबर प्लेट को देखकर आपको जरूर कंफ्यूजन होता होगा. दरअसल अलग-अलग रंग की नंबर प्लेट का अलग-अलग मतलब भी होता है. आज हम आपको सभी रंग की नंबर प्लेट और उसके मतलब के बारे में बता रहे हैं.

1 सफेद प्लेट- यह प्लेट आम गाड़ियों में लगती है. आप सफेद रंग की नंबर प्लेट वाली गाड़ी का कमर्शियल यूज नहीं कर सकते. इस प्लेट के ऊपर काले रंग से नंबर लिखे होते हैं. वैसे कौन कर सकता है माइनिंग ज्यादातर लोग सफेद रंग देखकर आसानी से अंदाजा लगा लेते हैं कि यह पर्सनल गाड़ी है.

2 पीली प्लेट- पीली रंग की नंबर प्लेट टैक्सी की होती है. इसके अलावा पीली प्लेट आमतौर पर कमर्शियल यूज वाले ट्रकों या टैक्सी कौन कर सकता है माइनिंग में लगी होती हैं. इस प्लेट के अंदर भी नंबर काले रंग से लिखे होते हैं.

3 नीली प्लेट- नीले रंग की नंबर प्लेट एक ऐसे वाहन को मिलती है, जिसका इस्तेमाल विदेशी प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है. नीले रंग की इस प्लेट पर सफेद रंग से नंबर लिखे होते हैं. ऐसी गाड़ियां आपको दिल्ली या बड़े शहरों में देखने के लिए मिल जाएंगी. नीली प्लेट यह बताती है कि यह गाड़ी विदेशी दूतावास की है, या फिर यूएन मिशन के लिए है.

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4 काली प्लेट- आमतौर पर काले रंग की प्लेट वाली गाड़ियां भी कमर्शियल वाहन ही होती हैं, लेकिन ये किसी खास व्यक्ति के लिए होती है. ऐसी गाड़ियां किसी बड़े होटल में खड़ी मिल जाएंगी. ऐसी कारों में काले रंग की नंबर प्लेट पर पीले रंग से नंबर लिखा होता है.

5 लाल प्लेट- अगर किसी गाड़ी में लाल रंग की नंबर प्लेट है तो वह गाड़ी भारत के राष्ट्रपति या फिर किसी राज्य के राज्यपाल की होती है. ये लोग बिना लाइसेंस की ऑफिशियल गाड़ियों का उपयोग करते हैं. इस प्लेट में गोल्डन रंग से नंबर लिखे होते हैं और इन गाड़ियों में लाल रंग की नंबर प्लेट पर अशोक की लाट का चिन्ह बना हुआ होता है.

6 तीर वाली नंबर प्लेट- सैन्य वाहनों में ऐसे चिन्ह इस्तेमाल किए जाते हैं. ऐसे वाहनों के नंबर को रक्षा मंत्रालय द्वारा आवंटित किया जाता है. ऐसी गाड़ियों की नंबर प्लेट में नंबर के पहले या तीसरे अंक के स्थान पर ऊपरी ओर इशारा करते तीर का निशान होता है, जिसे ब्रॉड एरो कहा जाता है. तीर के बाद के पहले दो अंक उस साल को दिखाते हैं, जिसमें सेना ने उस वाहन को खरीदा था, यह नम्बर 11 अंकों का होता है

7 हरा नंबर प्लेट- सड़क मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक परिवहन वाहनों के लिए हरे रंग की नंबर प्लेट निर्धारित की है. प्लेट का बैकग्राउंड हरा होगा और इस पर वाहन की श्रेणी के हिसाब से पीले अथवा सफेद रंग से नंबर लिखे होते हैं.

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Published at : 11 Nov 2020 06:51 PM (IST) Tags: High security registration number plate Car Number Plate Green Number Plate automobile Tech news हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Auto News in Hindi

Postal Ballot या डाक मत पत्र क्या होता है और इसका इस्तेमाल कौन करता है?

चुनावों में कुछ लोग जैसे सैनिक, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी और प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग चुनावों में मतदान नहीं कर पाते हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने चुनाव नियमावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में Postal ballot या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा प्रदान की है.

Postal Ballot

भारत में चुनाव आयोग की पहल पर भारत में हर चुनाव को फेस्टिवल की तरह मनाया जाता है. यही कारण है कि चुनाव आयोग इस बात को सुनिश्चित करना चाहता है कि हर चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान हो अर्थात कोई भी वोटर छूटे ना.

इसी दिशा में चुनाव आयोग ने Postal ballot या डाक मतदान की शुरुआत की. आइये इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

डाक मतदान (Postal Ballot) क्या होता है?

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि Postal ballot एक डाक मत पत्र होता है. यह 1980 के दशक में चलने वाले पेपर्स बैलेट पेपर की तरह ही होता है. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि अपनी नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग Postal Ballot की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें Service voters या absentee voters भी कहा जाता है.

चुनाव आयोग पहले ही चुनावी क्षेत्र में डाक मतदान करने वालों की संख्या को निर्धारित कर लेता है. इसलिए केवल उन्हीं लोगों को Postal ballot भेजा जाता है. इसे Electronically Transmitted Postal Ballot System (ETPBS) भी कहा जाता है. मतदाता द्वारा अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देकर इस Postal ballot को डाक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वापस चुनाव आयोग के सक्षम अधिकारी को लौटा दिया जाता है.

POSTAL-BALLOT

पोस्टल बैलट का उपयोग कौन कर सकता है (Who can avail Postal Ballot?)

इस नई व्यवस्था के तहत खाली पोस्टल बैलट को सेना और सुरक्षा बलों को इलेक्ट्रिक तौर पर भेजा जाता है. जिन इलाकों में इलेक्ट्रिक तरीके से पोस्टल बैलट नहीं भेजा जा सकता है वहां पर कौन कर सकता है माइनिंग डाक के माध्यम से पोस्टल बैलट भेजा जाता है.

Postal Ballot का इस्तेमाल करने वाले लोगों में शामिल हैं;

1. सैनिक

2. चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी

3. देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी

4. प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग (कैदियों को वोट डालने का अधिकार नहीं होता है)

5. 80 वर्ष से अधिक की उम्र के वोटर (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)

6. दिव्यांग व्यक्ति (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)

नोट: वोटर, जिस चुनाव क्षेत्र में वोट डालने के लिए योग्य है उसका वोट उसी क्षेत्र की मतगणना में गिना जाता है.

how-to-use-postal-voting

(पोस्टल बैलट की पूरी प्रक्रिया)

कब से हुई शुरूआत (When Postal ballot Started in India)

पोस्टल बैलेट की शुरुआत 1877 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसे कई देशों जैसे इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालाँकि इन देशों में इसके अलग अलग नाम जरूर हैं.

भारतीय चुनाव आयोग ने चुनाव नियामावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में Postal ballot या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा के लिए 21 अक्टूबर 2016 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था.

जब भी किसी चुनाव में वोटों की गणना शुरू होती है तो सबसे पहले पोस्टल बैलेट कौन कर सकता है माइनिंग की गिनती शुरू होगी. इसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती होगी. पोस्टल बैलेट की संख्या कम होती है और ये पेपर वाले मत पत्र होते हैं इसलिए इन्हें गिना जाना आसान होता है. तो अब आपको Postal ballot के बारे में ज्ञात हो गया होगा.

Postal Ballot या डाक मत पत्र क्या होता है और इसका इस्तेमाल कौन करता है?

चुनावों में कुछ लोग जैसे सैनिक, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी और प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग चुनावों में मतदान नहीं कर पाते हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने चुनाव नियमावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में Postal ballot या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा प्रदान की है.

Postal Ballot

भारत में चुनाव आयोग की पहल पर भारत में हर चुनाव को फेस्टिवल की तरह मनाया जाता कौन कर सकता है माइनिंग है. यही कारण है कि चुनाव आयोग इस बात को सुनिश्चित करना चाहता है कि हर चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान हो अर्थात कोई भी वोटर छूटे ना.

इसी दिशा में चुनाव आयोग ने Postal ballot या डाक मतदान की शुरुआत की. आइये इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

डाक मतदान (Postal Ballot) क्या होता है?

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि Postal ballot एक डाक मत पत्र होता है. यह 1980 के दशक में चलने वाले पेपर्स बैलेट पेपर की तरह ही होता है. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि अपनी नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग Postal Ballot की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें Service voters या absentee voters भी कहा जाता है.

चुनाव आयोग पहले ही चुनावी क्षेत्र में डाक मतदान करने वालों की संख्या को निर्धारित कर लेता है. इसलिए केवल उन्हीं लोगों को Postal ballot भेजा जाता है. इसे Electronically Transmitted Postal Ballot System (ETPBS) भी कहा जाता है. मतदाता द्वारा अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देकर इस Postal ballot को डाक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वापस चुनाव आयोग के सक्षम अधिकारी को लौटा दिया जाता है.

POSTAL-BALLOT

पोस्टल बैलट का उपयोग कौन कर सकता है (Who can avail Postal Ballot?)

इस नई व्यवस्था के तहत खाली पोस्टल बैलट को सेना और सुरक्षा बलों को इलेक्ट्रिक तौर पर भेजा जाता है. जिन इलाकों में इलेक्ट्रिक तरीके से पोस्टल बैलट नहीं भेजा जा सकता है वहां पर डाक के माध्यम से पोस्टल बैलट भेजा जाता है.

Postal Ballot का इस्तेमाल करने वाले लोगों में शामिल हैं;

1. सैनिक

2. चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी

3. देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी

4. प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग (कैदियों को वोट डालने का अधिकार नहीं होता है)

5. 80 वर्ष से अधिक की उम्र के वोटर (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)

6. दिव्यांग व्यक्ति (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है)

नोट: वोटर, जिस चुनाव क्षेत्र में वोट डालने के लिए योग्य है उसका वोट उसी क्षेत्र की मतगणना में गिना जाता है.

how-to-use-postal-voting

(पोस्टल बैलट की पूरी प्रक्रिया)

कब से हुई शुरूआत (When Postal ballot Started in India)

पोस्टल बैलेट की शुरुआत 1877 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसे कई देशों जैसे इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालाँकि इन देशों में इसके अलग अलग नाम जरूर हैं.

भारतीय चुनाव आयोग ने चुनाव नियामावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में Postal ballot या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा के लिए 21 अक्टूबर 2016 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था.

जब भी किसी चुनाव में वोटों की गणना शुरू होती है तो सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होगी. इसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती होगी. पोस्टल बैलेट की संख्या कम होती है और ये पेपर वाले मत पत्र होते हैं इसलिए इन्हें गिना जाना आसान होता है. तो अब आपको Postal ballot के बारे में ज्ञात हो गया होगा.

हिमांशु का मतलब और राशि - Himanshu meaning aur rashi in hindi

कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। भगवान शंकर को कर्क राशि का आराध्य देव माना जाता है। इन हिमांशु नाम के लड़कों को पेट सम्बन्धी परेशानियां बनी रहती हैं। हिमांशु नाम के लड़के ब्रेस्ट (महिला), चेस्ट (पुरुष) और दिल की समस्याओं से पीड़ित रहते हैं। हिमांशु नाम के लड़के कैंसर, चेचक और मानसिक रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं। इन हिमांशु नाम के लड़कों को चिंता करने और टेन्शन लेने की आदत होती है। कर्क राशि के व्यक्ति कभी किसी की बातों से बोर नहीं होते और दूसरों की समस्याओं को समझते हैं।

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हिमांशु नाम का मतलब - Himanshu ka arth

अगर आप अपने बच्चे का नाम हिमांशु रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि हिमांशु का मतलब चांद होता है। हिमांशु नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब चांद है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। शास्त्रों में हिमांशु नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी चांद भी लोगों को बहुत पसंद आता है। हिमांशु नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। हिमांशु नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी चांद होते हैं। आगे पढ़ें हिमांशु नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, हिमांशु नाम के चांद मतलब के बारे में विस्तार से जानें।

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