SEBI इन्वेस्टीगेशन के तहत यह प्रूफ हो गया कि कंपनी के MD को 1.5 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जिस वजह से SEBI ने एक्शन भी लिया और फिर तब हमे मैनेजमेंट सिस्टम पर डाउट होने लगा.

Technical Analysis vs Fundamental analysis in Hindi

कंपनी का मैनेजमेंट एनालिसिस कैसे करे ? – पोर्टफोलियो फंडामेंटल एनालिसिस टिप्स हिंदी में

आज के इस लेख में हम जानेंगे “मैनेजमेंट एनालिसिस” के बारे में, अगर छोटे शब्दों में समझे तो हम कह सकते हैं कि कंपनी का मैनेजमेंट एनालिसिस – कंपनी के मैनेजमेंट सिस्टम को परखना.

अगर आपका कोई दोस्त आपसे कहता है कि मुझे बिज़नस करने के लिए या किसी और वजह से पैसो फंडामेंटल विश्लेषण क्या है की ज़रुरत है तो आप पहले दो चीजों पर गौर फरमाइए-

  1. नंबर एक ⇒ उसकी एबिलिटी (कहने के अर्थ है कि क्या वो आपके पैसे चूका सकता है ?)
  2. नंबर दो ⇒ आनेस्टी (यानिकी इमानदारी|)

इमानदारी को परखना बहुत ज्यादा ज़रूरी है क्यूंकि अगर वो इमानदार नहीं हुआ तो समय आने पर अगर आप पैसे मांगेंगे तो शायद उसके पास पैसे होते हुए भी वो आपको पैसे ना दे|

लेकिन अगर आपका दोस्त इमानदार है तो यक़ीनन ही वो आपके पैसे समय पूर्व होने से पहले लौटा देगा.

मैनेजमेंट एनालिसिस क्या है – What is Management Analysis in Hindi

रतन टाटा का नाम हम सबने सुना है, टाटा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्री के मैनेजमेंट के बारे में अगर हम जानना चाहे तो वो बेहद आसान होगा क्यूंकि रतन टाटा के बारे में आये दिन समाचार में सुनते और पढ़ते रहते हैं, जिससे हमे उनके काम करने का तरीका मालूम हो जाता है.

कंपनी के बारे में हम अपनी राय तभी दे सकते हैं जब हमने उसके मैनेजमेंट को अच्छे से एनालाइज किया हो|

अगर आप भी किसी कंपनी में इन्वेस्ट करना चाहते हैं और उसके मैनेजमेंट सिस्टम की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आपको निम्न स्टेप्स को फॉलो करना चाहिए|

कंपनी का मैनेजमेंट एनालिसिस कैसे करते है ?

#1. DRPH (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस)

जब कोई कंपनी अपना IPO लाती है तभी वो अपना DRPH भी लाती है, यह एक तरीका का कंपनी का बायोडाटा होता है, जिसमे कंपनी के मैनेजमेंट की काफी जानकारों भी दी जाती है| यह एक बहुत अच्छा माध्यम है कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में जानने का|

मान लीजिये आपको TCS का DRPH चेक करना है तो आप गूगल में TCS DRPH सर्च करे, वहाँ आपको विख्यात में सारी जानकारी मिल जाएगी, ठीक इसी तरह आपको जिस भी कंपनी का DRPH चेक करना है उसके बारे में आप सर्च कर सकते हैं.

#2.

गूगल पर कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में रैंडम सर्च कर के इनफार्मेशन हासिल करना| साथ ही विकिपीडिया और Linkedin से कंपनी के मैनेजमेंट के लोगो की प्रोफाइल से उनकी डिटेल्स निकालना बेहद ही आसान और फ़ास्ट तरीका है.

Fundamental Analysis Of Indian Stocks in Hindi

ज्यादातर कंपनी अपना प्रॉफिट शेयरहोल्डर के साथ दो तरह से शेयर करती है|

  1. डायरेक्टली शेयरहोल्डर को डिविडेंड दे कर|
  2. शेयर बाय बैक कर के|

कंपनी जब शेयर बाय बैक करती है तो उसके पीछे उसका यह मकसद होना चाहिए की कंपनी के इन्वेस्टर और कंपनी दोनों के लिए फायदेमंद होना चाहिए.

दोस्तों मैनेजमेंट एनालिसिस करने के लिए आपको स्किल इम्प्रूव करना चाहिए जिसका नाम है रीड बिटवीन लाइन्स| कहने का अर्थ है कि जिन लाइन्स को आपने नहीं पढ़ा लेकिन उसका अर्थ उन्ही लाइन्स में छुपा हो उसे आप खोज निकालिए|

आपको मैनेजमेंट की सल्लेरी पर भी नज़र रखनी चाहिए, कई बार जब कंपनी लॉस में चल रही होती है तो मैनेजमेंट अपनी सल्लेरी बढ़ाने के चक्कर में रहती है जो की अच्छी बात नहीं है|

मैनेजमेंट की सल्लेरी की डिटेल आपको कंपनी के एनुअल रिपोर्ट में मिल जाएगी|

Fundamental Analysis क्या फंडामेंटल विश्लेषण क्या है है?

Stock Analysis करते समय फंडामेंटल एनालिसिस के द्वारा शेयर की सही कीमत पता करने की कोशिश की जाती है शेयर की कीमत पता करने के लिए, कम्पनी वर्तमान में जो कारोबार रही है। वह अगले दो, पांच या दस सालों में कितना बढ़ सकता है।
मान लीजिये, आज कम्पनी को 500 करोड़ का प्रॉफिट हो रहा है, तो अगले साल कितना प्रॉफिट हो सकता है। इस तरह हम जितने साल के लिए कम्पनी में इन्वेस्ट करना चाहते है, उतने साल तक का अनुमान Fundamental Analysis में लगाया जाता है।

फंडामेंटल एनालिसिस में ये भी देखा है कि अगले दो , पांच या दस साल में कंपनी के कैशफ्लो कैसे फंडामेंटल विश्लेषण क्या है रह सकते है। कैशफ्लो की आज की तरीख में नेट प्रजेंट वैल्यू निकलने की कोशिश की जाती है। ऐसी आधार पर कम्पनी के प्रत्येक शेयर की प्रजेंट वैल्यु निकली जाती है।
दूसरा तरीका है कि कम्पनी की इंट्रिनसिक वैल्यू क्या है ? यानि की कम्पनी की सभी सम्पत्तियो तथा देनदारियों को निकालकर कम्पनी की नेट वैल्यू निकली जाती है।
कई बार लोग stock Analysis करते समय ये भी देखते है कि कम्पनी की डिविडेंट पॉलिसी क्या है ? यदि कम्पनी साल दर साल अच्छा डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब कम्पनी कैश जेनरेशन भी कर रही है तथा Investor friendly भी है। ये सब मुददे स्टॉक एनालिसिस में देखे जाते है। उपर्यक्त सभी तरीको के द्वारा आप यह पता लगा सकते है कि कोई शेयर फंडामेंटली अच्छा है या बेकार।

Fundamental analysis

बहुत से लोगों को Fundamental analysis के नाम से ही डर लगने लगता है, लेकिन यदि शेयर मार्केट (Stock market) में किसी कंपनी में इन्वेस्ट करना है, तो Fundamental analysis सबसे जरूरी होती है। जिसका मतलब होता है, कि किसी भी कंपनी की पूरी डिटेल्स को निकालना। स्टॉक मार्केट में कंपनी का दो तरीके से एनालिसिस किया जाता है। पहला Technical analysis और दूसरा Fundamental analysis,

तो चलिए दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको बताऊंगा की Fundamental analysis क्या होता है।

फंडामेंटल फंडामेंटल विश्लेषण क्या है एनालिसिस (Fundamental analysis)

फंडामेंटल एनालिसिस वह प्रोसेस होती है, जिसमें की निवेशकों को किसी स्टॉक्स के चयन के लिए उसकी पुरानी हिस्ट्री जाननी होती है, जिससे की निवेशक उसके पुराने सारे रिकॉर्ड्स को अच्छे से जान कर उसमें इन्वेस्ट कर सकें।

Fundamental analysis

किसी भी कंपनी के पिछले रिकॉर्ड्स निकालने से मतलब उस कंपनी के फंडामेंटल विश्लेषण क्या है प्रॉफिट–लॉस, रेवेन्यू, कंपनी का मैनेजमेंट, कंपनी क्या प्रोडक्ट बनाती है, उस प्रोडक्ट की डिमांड कितनी है, आदि चीजों से है। कोई भी कंपनी हो यदि उसमें स्मार्ट इंवेस्टर इन्वेस्ट करे तो वह कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental analysis) जरूर करेगा।

फंडामेटल एनालिसिस को देखने से हमें कंपनी की ग्रोथ का यह पता भी लग जाता है, कि कंपनी प्रॉफिट कर रही है, या फिर लॉस। क्योंकि इसमें कंपनी का बहुत ही बारीकी से विश्लेषण किया जाता है। Fundamental analysis में यह देखा जाता है, कि वह कंपनी आर्थिक रूप से कितनी मजबूत है, क्या यह कंपनी हमें लॉन्ग टर्म में एक अच्छा रिटर्न्स दे सकती है।

कंपनी का फंडामेटल एनालिसिस कैसे करें

किसी भी किसी कंपनी का जब हमें Fundamental analysis करना होता है, तो हम सबसे पहले उस कंपनी का बैलेंस शीट देखेंगे। इससे हमें कंपनी की पूरी जानकारी मिल जाती है। यदि हमें कंपनी का फंडामेंटल चेक करना है, तो हम गूगल में जा कर के NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) की वेबसाइट में VISIT कर सकते हैं। जोकि एक सेबी रजिस्टर्ड वेबसाइट है। इसमें हमें किसी एक्सपर्ट की भी जरूरत नहीं पड़ती है। और कंपनी के बारे में अच्छे से जानकारी भी मिल जाती है। और फिर हम एक अच्छी कंपनी में इन्वेस्ट भी कर सकते हैं।

जो भी इंवेस्टर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग करते हैं, उनके लिए फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी होता है, एनालिसिस करने से उनको वे स्टॉक्स बड़ी आसानी से मिल जाते हैं, जिनसे की उन्हें आने वाले समय में एक अच्छा रिटर्न्स मिल सकता है। साथ ही अच्छे बिसनेस वाली कंपनियां भी आसानी से मिल जाती है। फंडामेंटल एनालिसिस का उपयोग हमेशा लंबे समय के लिए इन्वेस्ट के लिए किया जाता है। इसमें जल्दी पैसा कमाने का टारगेट नही रखा जाता है। बल्कि इन्वेस्ट फंडामेंटल विश्लेषण क्या है फंडामेंटल विश्लेषण क्या है किए गए शेयर में सही रेट ऑफ रिटर्न्स पर कंपाउंडिंग करने में ध्यान दिया जाता है।

Technical Analysis vs Fundamental analysis in Hindi :- Fundamental analysis और Technical Analysis में अंतर

Fundamental analysis और Technical Analysis में अंतर – फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस दोनों ही कंपनी के शेयर के पूर्वानुमान के लिए उपयोग किए जाते हैं और दोनों ही शेयर मार्केट में काम आने वाले विषय होते हैं हालांकि इन दोनों में ही पर्याप्त अंतर पाया जाता है जो कि आप इस लेख में जानने वाले हैं चलिए जानते हैं कि फंडामेंटल एनालिसिस और टेक्निकल एनालिसिस क्या है

Fundamental Analysis क्या है – Share market में अपने पैसे को फंडामेंटल विश्लेषण क्या है Invest करने के लिए हम अच्छे से अच्छे Share का चुनाव करना चाहते हैं जिससे हम उस शेयर में इन्वेस्ट करके ज्यादा से ज्यादा Return और प्रॉफिट कमाए जिस प्रक्रिया के द्वारा उस Share को ढूंढा जाता है उस प्रक्रिया को Fundamental Analysis कहा जाता

Technical Analysis क्या है – What is technical analysis

अब जानने वाले हो कि Technical analysis kya hai – टेक्निकल एनालिसिस एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिससे शेयर फंडामेंटल विश्लेषण क्या है के बदलते स्वरूप के बारे में पता लगाया जाता हैऔर उस शहर के कीमतों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है

टेक्निकल एनालिसिस किसी भी शेयर मार्केट में होने वाले मूवमेंट प्राइस ऑक्शन और शेयर की बदलती स्थिति शेयर की वॉल्यूम के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है टेक्निकल एनालिसिस उस समय किया जाता है जब किसी इन्वेस्टर ट्रेडर को बहुत कम समय के लिए अपना पैसा शेयर मार्केट में लगाना होता है

Fundamental analysis और Technical Analysis में अंतर

  • फंडामेंटल एनालिसिस शेयर मार्केट में लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए किया जाता है जबकि टेक्निकल एनालिसिस को शॉर्ट टाइम ट्रेडिंग और शॉर्ट टाइम इन्वेस्टिंग के लिए किया जाता है
  • फंडामेंटल एनालिसिस कंपनी के वित्तीय विवरण फाइनेंशियल कंडीशन के साथ में शुरू होता है और जबकि टेक्निकल एनालिसिस कंपनी के चार्ट के साथ शुरू होता है
  • टेक्निकल एनालिसिस कंपनी के आंतरिक डाटा पर निर्भर होता है जबकि फंडामेंटल एनालिसिस कंपनी के परफॉर्मेंस बिजनेस मॉडल और प्रोडक्ट पर निर्भर करता है
  • टेक्निकल एनालिसिस बहुत ही कम समय के लिए दृष्टिकोण रखता है जबकि फंडामेंटल एनालिसिस दूर दृष्टिकोण के साथ में पर्याप्त रूप से किया जाता है
  • टेक्निकल एनालिसिस करके आप ट्रेडिंग कर सकते हैं और अन्य प्रकार की छोटी मोटी इन्वेस्टमेंट ही कर सकते हैं जिससे आपको जल्दी मुनाफा हो जाए लेकिन फंडामेंटल एनालिसिस एक बहुत फंडामेंटल विश्लेषण क्या है लंबे समय की प्रक्रिया होती है इसमें आपको साल 10 साल भी लग सकते हैं
  • फंडामेंटल एनालिसिस में फंडामेंटल विश्लेषण क्या है स्टॉक या किसी शेयर का आंतरिक मूल्य का पता करते हैं जबकि टेक्निकल एनालिसिस में यह माना जाता है कि किसी शेयर का आंतरिक मूल्य नहीं होता है
  • फंडामेंटल एनालिसिस आर्थिक कारक वित्तीय विवरण बिजनेस मॉडल कंपनी का प्रोडक्ट डिमांड सप्लाई पर निर्भर करता है जबकि टेक्निकल केवल चार्ट विवरण और ऑक्शन प्राइस शेयर वॉल्यूम इत्यादि पर निर्भर करता है
  • फंडामेंटल एनालिसिस का मूल उद्देश्य लंबे समय तक का निवेश होता है जबकि टेक्निकल एनालिसिस का मूल उद्देश्य शार्ट टाइम ट्रेडिंग चाहे वह इंट्राडे ऑप्शन या किसी प्रकार की ट्रेडिंग हो
  • फंडामेंटल इन सिस्को कंपनी के पुराने डाटा अतीत में उसके परफॉर्मेंस और अन्य सभी पहलुओं को ध्यान में रखते किया जाता है जबकि टेक्निकल एनालिसिस केवल पुराने प्राइस और चार्ट पेटर्न को देखकर किया जाता है
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