बुल मार्केट का लाभ कैसे उठाएं?
जो निवेशक बुल मार्केट का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें बढ़ती कीमतों का लाभ उठाने के लिए आरंभ में ही खरीद कर लेनी चाहिए और जब वे अपनी पीक पर पहुंच जाएं तो उन्हें बेच डालना चाहिए। हालांकि यह तय करना मुश्किल और कुछ हद तक जोखिम भरा है कि कब गिरावट और कब पीक आएगा, अधिकांश नुकसान कम मात्रा में होते हैं और अस्थायी होते हैं।

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Bull Market- बुल मार्केट

बुल मार्केट क्या होता है?
बुल मार्केट (Bull Market) किसी फाइनेंशियल मार्केट की बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है वह स्थिति होती है जिसमें किसी एसेट या सिक्योरिटी की कीमतें बढ़ रही होती हैं या बढ़ने की उम्मीद होती है। ‘बुल मार्केट' शब्द का उपयोग अक्सर स्टॉक मार्केट के लिए किया जाता है लेकिन इसे वैसी किसी भी चीज के लिए प्रयोग किया जा सकता है जिसे ट्रेड किया जा सकता है जैसेकि बॉन्ड्स, रियल एस्टेट, करेंसी और कमोडिटीज। चूंकि ट्रेडिंग के दौरान सिक्योरिटीज की कीमत अनिवार्य रूप से घटती और बढ़ती रहती हैं, ‘बुल मार्केट' को विशेष रूप से विस्तारित अवधि के लिए उपयोग में लाया जाता है जिसमें सिक्योरिटी मूल्यों का बड़ा हिस्सा बढ़ रहा होता है।

बुल मार्केट महीनों तक यहां तक कि वर्षों तक बने रह सकते हैं। आम तौर पर बुल मार्केट तब होता है जब स्टॉक की कीमतें 20-20 प्रतिशत की दो अवधियों की गिरावट के बाद 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती हैं। ट्रेडर बुल मार्केट का लाभ उठाने के लिए खरीद में बढ़ोतरी, होल्ड या रिट्रेसमेंट जैसी कई रणनीतियों का सहारा लेते बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है हैं।

The Big Bull vs Scam 1992: हर्षद मेहता के रोल में बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है अभिषेक बच्चन पर भारी पड़े प्रतीक गांधी

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई फिल्म 'द बिग बुल' में अभिनेता अभिषेक बच्चन ने शानदार अभिनय किया है, लेकिन हर्षद मेहता के किरदार में उनसे बेहतर वेब सीरीज 'बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है स्कैम 1992' के एक्टर प्रतीक गांधी नजर आए हैं. अभिषेक बच्चन के दमदार अभिनय के बावजूद प्रतीक गांधी उनपर भारी पड़े हैं. एक ही कहानी पर आधारित होने की वजह से फिल्म की रिलीज से पहले ही वेब सीरीज से इसकी तुलना शुरू हो गई थी. फिल्म बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है मेकर्स भी शायद ये बात जानते थे, इसलिए देर ही सही दुरुस्त आने का फैसला किया. 'द बिग बुल' एक शानदार फिल्म है, लेकिन, एक्टिंग, स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन, म्यूजिक सहित कास्ट और परफॉर्मेंस के पैमाने पर यह वेब सीरीज 'स्कैम 1992' के मुकाबले कहां टिकती है? आइए इसे जानने की कोशिश करते हैं.

कास्ट और परफॉर्मेंस

सबसे पहले कास्ट और परफॉर्मेंस की बात करते हैं. फिल्म 'द बिग बुल' में अभिषेक बच्चन लीड रोल में हैं, तो वेब सीरीज 'स्कैम 1992' में प्रतीक गांधी, दोनों ही हर्षद मेहता का किरदार निभा रहे हैं. दोनों ही अभिनेताओं ने अपने-अपने प्रोजेक्ट में शानदार काम किया है. लेकिन अपने अभिनय कौशल और सटीक प्रस्तुतिकरण की वजह से प्रतीक गांधी हर्षद मेहता के चरित्र के ज्यादा नजदीक नजर आते हैं. वहीं, अभिषेक बच्चन के किरदार हेमंत शाह को देखकर आपको मणिरत्नम की फिल्म 'गुरु' के गुरुकांत देसाई की याद आ जाएगी. एक स्टॉकब्रोकर के रूप में अभिषेक अविश्वसनीय हैं, लेकिन कहीं-कहीं ओवरएक्टिंग भी करते नजर आ रहे हैं, जो उस किरदार के चरित्र के साथ बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है पूरी तरफ फिट नहीं बैठता. वेब सीरीज और फिल्म में सहायक कलाकारों का अभिनय प्रदर्शन भी संतोषजनक है.

जब कोई कहानी किसी फिल्म के हिसाब से लिखी जाती है, तो उसे स्क्रीनप्ले यानि पटकथा कहते हैं. हर्षद मेहता की कहानी तो सबको पहले से ही पता है, ऐसे में वेब सीरीज और फिल्म की पटकथा लिखने वालों के ऊपर रचनात्मकता का भार ज्यादा था. फिल्म के मेकर्स जानते थे कि शुरुआती अंतर यही से पैदा किया जा सकता है. फिल्म 'द बिग बुल' की पटकथा कूकी गुलाटी, रितेश शाह और अर्जुन धवन ने लिखी है, जबकि वेब सीरीज 'स्कैम 1992' का स्क्रीनप्ले बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है सुमीत पुरोहित, सौरभ डे, वैभव विशाल और करण व्यास ने लिखा है. फिल्म के पटकथा लेखकों ने दर्शकों को निराश किया है, क्योंकि उन्होंने हेमंत शाह को टिपिकल बॉलीवुड हीरो बनाने के चक्कर में कहानी को अति नाटकीय बना दिया है. जबकि वेब सीरीज में 90 के दशक के दौरान की जटिलताओं और कार्यप्रणाली को सफलतापूर्वक दिखाया है.

डायरेक्शन (Direction)

हंसल मेहता के इंटेलीजेंट डायरेक्शन की वजह से वेब सीरीज स्कैम 1992 आज भी क्लासिक कैटेगरी में बनी हुई है. उन्होंने अपने निर्देशन कौशल से वेब सीरीज को वास्तविकता के करीब ला दिया है. इतना ही नहीं उन्होंने महत्वाकांक्षा, लालच, बाजार की हेराफेरी, राजनीतिक धोखे और बैंकिंग प्रणाली की खामियों को बहुत खूबसूरती से एक धागे में पिरो दिया है. बहुत ही सहजता के साथ दर्शकों के सामने इसे पेश किया है. वहीं, फिल्म 'द बिग बुल' के डायरेक्टर कूकी गुलाटी 'हेमंत शाह' की कहानी को विश्वसनीय बनाने में असफल रहे हैं. सेट से लेकर कॉस्ट्यूम तक, ऐसा लगता है कि उनकी टीम ने छोटे पहलुओं पर ज्यादा काम नहीं किया है, जो दर्शकों के दृश्य अनुभव पर समग्र प्रभाव डालते बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है हैं. फिल्म में हर्षद मेहता के जीवन पर आधारित लंबी कहानी को महज ढ़ाई घंटे में दिखाना भी एक चुनौती रही है.

एक समय था जब बॉलीवुड में संगीत प्रधान फिल्में प्रमुखता से बनती थीं. बिना अच्छे गाने के फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. समय बदला तो गानों की जगह आइटम नंबर ने ले लिया. उसके बाद के दिनों में जब सच्ची घटनाओं और लोगों के जीवन पर आधारित फिल्में बननी शुरू हुईं, तो गानों का महत्व बहुत कम हो गया. म्यूजिक वीडियो के जमाने में लोग फिल्म में गाने देखना-सुनना पसंद कम करने लगे, तो मेकर्स ने भी इस पर ध्यान देना बंद कर दिया. जहां तक फिल्म 'द बिग बुल' और वेब सीरीज स्कैम 1992 के संगीत की बात है, तो निस्संदेह ये तुलना से परे है. वेब सीरीज का थीम सॉन्ग फिल्म के टाइटल ट्रैक से बहुत बेहतर है. फिल्म का पहला गाना 'इश्क नमाजा' इशरत दासगुप्ता ने लिखा है, जिसे अंकित तिवारी ने अपनी आवाज में गाया है. यह गाना इंस्टाग्राम पर ज्यादा लोकप्रिय हुआ है.

Sundernagar: घर के आंगन में बैठी महिला को बैल ने मारी टक्कर, गई जान

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Update: Thursday, May 21, 2020 @ 8:41 PM

सुंदरनगर। मंडी जिला के सुंदरनगर (Sundernagar) के भौर गांव में एक आवारा बैल के हमले से वृद्ध महिला की मौत हो गई। पुलिस (Police) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार भौर गांव की 70 वर्षीय रामप्यारी पत्नी स्वर्गीय चुनी लाल अपने घर के आंगन में बैठी हुई थी। इसी दौरान वहां पर एक आवारा बैल आ गया और उसने महिला को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में महिला को शरीर में काफी अंदरुनी चोटें आ गई। महिला के चिल्लाने की आवाज बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है सुनकर घर वाले बाहर पहुंचे तो उन्होंने बैल को वहां से भगाया। महिला को बाहरी कोई चोट ना लगने पर परिवार के सदस्यों ने महिला को घर ही मामूली उपचार दिया, लेकिन कुछ समय बाद महिला की तबीयत अधिक खराब हो गई और उसकी मौत हो गई।

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