शेयर मार्केट से पैसा कमाने के लिए आपको सही कंपनी के शेयर को खरीदना होगा. उसके लिए आपके पास कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? डीमैट अकाउंट होना चाहिए. डिमैट अकाउंट सेविंग अकाउंट के तरह ही होता है, जिसकी मदद से आप मनचाहा शेयर को खरीद सकते हैं और उसे बेच भी सकते हैं.

शेयर कैसे खरीदे और बेचे जाते हैं

शेयर चुनने का सॉलिड फॉर्मूला, जानिए मार्केट गुरु अनिल सिंघवी का 'गुरु मंत्र'

Teachers Day 2022: शेयर बाजार के जरिए हर कोई तगड़ा मुनाफा कमाना चाहता है. लेकिन, बाजार की अनिश्चितता, जोखिम को देखते हुए ज्‍यादातर लोग पांव पीछे खींच लेते हैं. दरअसल, बाजार में निवेश शुरू करने से पहले असल समस्‍या यह आती है कि सही शेयर कैसे चुना जाए. क्‍या ऐसा कोई सॉलिड फॉर्मूला है, जिसके जरिए दमदार शेयर चुने जा सकते हैं. टीचर्स डे के मौके पर मार्केट गुरु और जी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने बाजार में सही शेयर चुनने का 'गुरु मंत्र' दिया है.

अनिल सिंघवी कहते हैं, जब भी आप शेयर खरीद रहे हों ये मत सोचिये कि आप शेयर खरीद रहे हो, आप ये सोचो कि पार्टनर बन रहा हूं. जैसेकि, कोई एफएमसीजी कंपनी कोई प्रोडक्‍ट बना कर बेचती है, उसमें 1 फीसदी का ही पार्टनर हूं या 100 शेयर का हूं. भले कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? ही मार्केट में कंपनी के 10 करोड़ शेयर हैं और आपके पास 100 है. लेकिन, आप हो तो पार्टनर ही. पार्टनरशिप तो आप रोज-रोज नहीं करते या रोज-रोज नहीं तोड़ते. सुबह-शाम शेयर भले खरीदो-बेचो. लेकिन, जब आप पार्टनरशिप करते हैं, तो सोचते हैं, कि जिंदगी भर चले और मेरे बच्‍चे भी मेरे बाद उसको आगे बढ़ाए. इसका मतलब कि जब भी आप किसी बिजनेस में पार्टनर बनकर पैसा लगाने की सोचते हो, तो अपने आप आपका अप्रोच लॉन्‍ग टर्म का हो जाता है.

Share Market Kya Hota Hai In Hindi? बिल्कुल आसान भाषा में जानिए

शेयर मार्केट क्या होता है? वह बाजार जहां पर कोई कंपनी अपनी हिस्सेदारी शेयर के तौर पर बेच सकता है और निवेशक खरीद सकता हो.

share bazaar kya hai

Share Market 2 शब्दों के मेल से बना हुआ है. सबसे पहले यह जानते हैं कि शेयर क्या होता है. उसके बाद मार्केट के बारे में जानेंगे. आखिर में जानेंगे कि हम लोग शेयर मार्केट से कैसे फायदा उठा सकते हैं?

Share Kya Hota Hai?

Share kise kahate hain? शेयर को आम भाषा में हिस्सेदारी कहते हैं. ज्यादातर कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए अपने हिस्सेदारी को शेयर के तौर पर मार्केट में बेचती है.

क्या आप शेयर और स्टॉक को लेकर के कंफ्यूज हैं? शेयरों के समूह को स्टॉक कहां जाता है. आइए शेयर को उदाहरण से समझते हैं.

मान लीजिए कि कोई कंपनी को एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए दो करोड़ रुपया चाहिए. उस कंपनी के पास मात्र एक करोड़ रूपया है. कंपनी के पास विकल्प है कि करोड़ रूपया रुपए को मार्केट से लिया जाए.

कंपनी मार्केट से 1 करोड़ रुपए उठाने के लिए अपने 50% हिस्सेदारी को एक करोड़ शेयर के तौर पर उतार दिया. इसी एक करोड़ शेयर को एक लाख स्टॉक भी कहा जा सकता है.

शेयर मार्केट से रजिस्टर कंपनी के शेयर को खरीद करके आप उस कंपनी के आंशिक तौर पर मालिक बन सकते हैं. किसी भी कंपनी का पूर्ण तौर पर मालिक बनने के लिए आपके पास उस कंपनी के कुल शेयरों में से 51% से ज्यादा शेयर आपके पास होने चाहिए.

Market Kya Hota Hai?

आम भाषा में market को बाजार कहा जाता है. शेयर मार्केट वह बाजार होता है जहां पर कोई भी रजिस्टर्ड कंपनी अपना शेयर बेच सकती है. दूसरी तरफ निवेशक इस शेयर को खरीद सकता है. यही नहीं एक निवेशक दूसरे निवेशक को शेयर बेच सकता है.

अगर भारत की बात की जाए तो, भारत में 400000 से भी ज्यादा कंपनी है जो अपने अलग-अलग प्रोडक्ट्स के शेयरों को मार्केट में बेचती है. 8 करोड़ से ज्यादा निवेशक हैं जो इन शेयरों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीदती है.

इसका साफ-साफ मतलब हुआ कि इसके लिए एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म होना चाहिए तभी सभी कंपनियों का सही-सही शेरों के दाम का मूल्यांकन समय पर हो सकें.

शेयर मार्केट के इस बड़े प्लेटफार्म का नाम स्टॉक एक्सचेंज है. भारत में मुख्य रूप से दो स्टॉक एक्सचेंज काम करती है जिसका नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बंबई स्टॉक एक्सचेंज है.

शेयर कैसे खरीदे और बेचे जाते हैं

शेयर कैसे खरीदे और बेचे जाते हैं

शेयर मार्केट में शुरुआती दिनों में निवेश ₹ 5000 से ₹10000 के बीच करना चाहिए शेयर खरीदने और बेचने का तरीका और शेयर मार्केट की जानकारी होने के बाद निवेश की राशि बढ़ा सकते हैं .

यदि आप शेयर खरीदते और बेचते हैं तो आप मुनाफा कमा सकते हैं लेकन उसके लिए आपको शेयर मार्केट की जानकारी होना अति आवश्यक है मौजूदा समय में शेयर बाजार में लोग निवेशकर रहे हैं

शेयर बाजार जोखिमों के अधीन होता है यदि बाजार में गिरावट आई तो द्वारा खरीदे गए शेयरों में कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? पैसे घटने के आसार बढ़ जाते हैं और यदि बाज़ार में बढ़त है तो आपके शेयर आपको मुनाफा देंगे

कंपनी के शेयर

हर कंपनी के शेयर की कीमत एक समान होती है, ऐसा नहीं की वो हर share की कीमत अलग-अलग रख सकतीं हैं। अगर किसी कंपनी का मूल्य 1 लाख है तो वो अपने प्रति share की कीमत 1 रुपया प्रति शेयर रख सकती है या फिर 50 पैसे प्रति share के 2 लाख शेयर भी बना सकती है। मतलब की 1 लाख कंपनी के मूल्य के अंदर ही वो कंपनी अपने शेयर की price तय करती है।

यहाँ सबसे बड़ी मज़ेदार बात कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? यह है की कोई भी कंपनी का मालिक अपने पूरे शेयर बेचने के लिए नहीं रखता, वो 50 प्रतिशत या उस से ज्यादा शेयर का हिस्सा अपने पास ही रखता है और बाकी के शेयर बेचने के लिए stock exchange में रखता है। ऐसा वो इसलिए करता है ताकि वो उस कंपनी का मालिक बना रहे, अगर वो पूरे 100% शेयर बेच देगा तो उसके जितने भी खरीदार है वो उस कंपनी के मालिक बन जाएंगे।

जैसे की, 1 लाख की आपकी कंपनी है और आपने उसके सारे शेयर बेच दिया और लोगों ने उन सभी Shares को खरीद लिया तो आप उस कंपनी के मालिक अब नहीं रहे, अप वो Share खरीदने वाले उस कंपनी के मालिक बन जाएंगे। इसलिए हर कंपनी का मालिक 50% या उस से ज्यादा Shares अपने पास रखता है, ताकि वो कंपनी का मालिक बना रहे और सारे निर्णय वो ले सके।

सेंसक्स और NIFTY क्या है?

इन BSE और NSE में सभी कंपनी के शेयर का भाव ऊपर कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? जा रहा है या नीचे जा रहा है इस चढ़ाव-उतार को देखने के लिए हमारे यहाँ सेंसक्स और NIFTY बनाई गयी है। सेंसेक्स या नीफ़्टी एक सूचकांक / बेंचमार्क है जिसका उपयोग BSE और NSE में सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन को मापने के लिए किया जाता है।

सेंसक्स यह BSE की top 30 कंपनी के share के प्रदर्शन को दिखाता है की किस कंपनी के शेयर ऊपर-नीचे जा रहे हैं। सेंसक्स का फुल फॉर्म होता है Sensitivity Index

Nifty (निफ्टी) का full form है National Fifty यह भी NSE की Top 50 कंपनी के share में हुये चढ़ाव-उतार के Index को दिखाता है।

शेयर बाज़ार का इतिहास (Share Market History)

शेयर बाज़ार का इतिहास बहुत पुराना है, आज से करीब 400 साल पहले इसकी शुरुआत हुई थी। 1600 सदी के समय एक Dutch East India company थी जैसे की ब्रिटिश की East India company थी। उस जमाने में नक्शे की खोज नहीं हुई थी तो लोग समुद्री जहाज़ के जरिये दुनिया के अलग-अलग जगहों को खोज करते थे। यह कंपनी अपने जहाजों को भेजती थी दुनिया के देशों की खोज करने के लिए ताकि व्यापार कर सकें।

यहाँ सबसे बड़ी परेशानी यह थी की इस कंपनी को दूर-दूर तक सफर करना पड़ता था जिसमें काफी पैसा खर्च करना पड़ता था। इस परेशानी का उपाय उन्होने यह किया की उन्होने लोगों के बीच जाकर ये कहा की आप हमारे जहाजों में आकर पैसा लगाओ ताकि वो जहाज़ दूर-दूर का सफर तय करके दूसरे देशों से जो भी पैसा कमाकर लाएँगे वो पैसे का हिस्सा आप लोगों में बाँट दिया जाएगा। अब जो पैसा लगाने वाले थे वो अलग-अलग जहाजों में अपना पैसा निवेश करने लगे। तो इस तरह से Share bazaar का उदय हुआ।

सूचना का अधिकार प्राप्त होता है

कंपनी द्वारा अपने Share holders को समय समय पर कंपनी के कामकाज से जुड़ी information दी जाती है | इस सूचना का benefit यह होता है की व्यक्ति कंपनी से मिली अधिकारिक Information के बलबूते महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कामयाब हो पाता है | हालाँकि जैसे की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की being a shareholder कोई भी व्यक्ति कंपनी के दैनिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेता है|

लेकिन कंपनी द्वारा लिए जाने या लिए गए निर्णयों की Information उसको दी जाती है, ताकि जिन कार्यों को आगे बढाने के लिए एक Share holder की सहमती जरुरी होती है उन कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके |

इसके अलावा जब कोई कंपनी अपने शेयर होल्डर को कंपनी को आगे बढाने हेतु लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और अन्य रिपोर्ट के बारे में उनको Information देती है तो इसका सबसे बड़ा benefit यह होता है की व्यक्ति अपने विवेक से यह निर्णय लेने में सक्षम हो पाता है की उसके द्वारा ख़रीदे गए शेयर को वह कब तक रखेगा, और कितने रखेगा, हो सकता है की शेयर होल्डर और शेयर ख़रीदे और यह भी हो सकता है की वह अपने सारे शेयर बेच दे |

Share Holder बनने से अतिरिक्त शेयरों का लाभ मिलता है

Extra Share benefits से आशय कंपनी की उस क्रिया से है जिसमे कंपनियां समय समय पर अपने शेयर धारकों को प्रोत्साहित कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? करने के लिए कुछ अतिरिक्त लाभ मुहैया कराती हैं | इनमे right issue और bonus share जैसे benefits प्रमुख हैं | right issue किसी कंपनी द्वारा केवल और केवल अपने वर्तमान Share holders के लिए जारी किया जाता है, इसमें कंपनी share holders को उसके शेयर तात्कालिक दामों से कम दामों में बेचती है और यदि कोई व्यक्ति being a share holder right issue खरीदने से मना कर देता है |

तब कंपनी उसको बाहर के व्यक्ति को बेचती है | इसके अलावा कंपनी Bonus issue जारी करके अपने share holders को उनके पास मौजूद शेयरों के मुताबिक bonus share देती है कंपनी अपना शेयर कैसे बेचती है? | उदाहरणार्थ : माना ABC नामक कंपनी अपना Bonus issue जारी करके प्रत्येक दो शेयर पर एक बोनस शेयर की घोषणा करती है तो इस स्थिति में जिस शेयर होल्डर के पास कंपनी के 100 शेयर हैं bonus shares को मिला के 150 हो जायेंगे |

मीटिंग में भाग लेने और वोटिंग का अधिकार मिलता है

किसी भी निर्णय को अंजाम तक पहुँचाने के लिए विचार विमर्श बेहद जरुरी होता है | यही कारण है की कंपनियों में भी निर्णय लेने से पहले अधिकारिक लोगों के बीच विचार विमर्श किये जाते हैं | कंपनी इन निर्णयों में विचार विमर्श का अधिकार अपने शेयर होल्डरों को उनके द्वारा लिए गए कंपनी के शेयरों के अनुपात के आधार पर प्रदान करती है |

हर साल कंपनी को अपने आप को आगे बढाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श की आवश्यकता पड़ती है और यदि कोई ऐसा मुद्दा जो विचार विमर्श के माध्यम से हल नहीं होता तो इस स्थिति में कंपनी शेयर होल्डर को वोट देने का अधिकार देती है | और उसी निर्णय को अंतिम रूप दे दिया जाता है जिस निर्णय के साथ अधिक निवेशक खड़े रहते हैं |

पोस्टल वॉलेट की सुविधा मिलती है

निवेशकों की समस्या को ध्यान में रखते हुए Postal wallet नामक concept प्रचलन में आया है, इस concept की खासियत यह है की being a shareholder कोई भी व्यक्ति कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी भागीदारी पोस्टल के माध्यम से भी कर सकता है | इसमें शेयर होल्डर को मीटिंग में उपस्थित होना जरुरी नहीं होता बल्कि वह अपना वोट पोस्ट ऑफिस के माध्यम से कंपनी को भेज सकता है |

और इसकी अहमियत भी उतनी ही होती है जितनी उपस्थित निवेशको के वोट की | कंपनी इस Postal wallet में निवेशकों को निर्णय सम्बन्धी सभी जानकारी जैसे निर्णय क्यों लिया जा रहा है इत्यादि details भेजती है | जिसमे being a share holder व्यक्ति अपने शेयरों की संख्या और पक्ष विपक्ष में वोट देकर वापस भेजता है |

उपर्युक्त benefits के अलावा being a share holder व्यक्ति को कंपनी विभिन्न benefits जैसे शेयरों की खरीद फरोख्त की आज़ादी अर्थात निवेशक चाहे तो अपने शेयर किसी भी कीमत पर बेच सकता है | और कंपनी के सरप्लस पर भी शेयरों के आधार पर हिस्सेदारी देती है |

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