क्ववांट टैक्स प्लान में 5 साल में 22 फीसदी का सीएजीआर दिया है.

क्या आपको किसी म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान में निवेश करना चाहिए?

बाजार में मौजूद हज़ारों म्युचुअल फंड्स की स्कीमों में से कोई अपने पोर्टफोलियो के लिए 4-5 सबसे सही फंड्स कैसे चुनता/चुनती है?अगर आप म्यूचुअल फंड्स में नए हैं, तो डायरेक्ट प्लान के बजाय किसी सलाहकार/डिस्ट्रिब्यूटर की मदद से रेगुलर प्लान में निवेश करने की सलाह दी जाती है क्योंकि आपको यह जानने की ज़रूरत है कि फंड्स कैसे काम करते हैं, एक फंड से आपको क्या चाहिए, किस किस्म के फंड में निवेश करना चाहिए आदि। अपने पोर्टफोलियो में ऐसे गलत फंड्स जो आपके भावी क्या आपको निवेश करना चाहिए? लक्ष्यों को भटका सकते हैं, रखने के बदले किसी रेगुलर प्लान में डिस्ट्रिब्यूटर का कमीशन सहना बेहतर है।

जब तक आप फंड्स के प्रकार, निवेश के उद्देश्य के मुताबिक फंड्स पर अपना पोर्टफोलियो कैसे बनाते हैं, फंड में जोखिम का लेवल, कोई फंड छोटी-अवधि या लंबी-अवधि के लिए सही है या नहीं, वह नियमित आमदनी देगा या बड़ी राशि बनाने में मदद करेगा, किसी फंड के परफॉरमेंस इंडीकेटर्स क्या हैं और अंततः आप निवेश क्यों कर रहे हैं नहीं समझते; तब तक अपने लक्ष्य के लिए सही फंड्स चुनने के लिए आपको मार्गदर्शन की ज़रूरत है। डायरेक्ट प्लान केवल उन निवेशकों के लिए सही रहता है जो कुछ समय से म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रहे हैं और इनके प्रोडक्ट्स को जानते हैं।

SIP में निवेश क्यों करना चाहिए, ये 4 फायदे जानने के बाद सब कुछ क्‍लीयर हो जाएगा!

ज्‍यादातर एक्‍सपर्ट मानते हैं कि SIP से कम समय क्या आपको निवेश करना चाहिए? में ज्‍यादा पैसा बनाया जा सकता है. हालांकि आपके मन में ये सवाल जरूर आता होगा कि आखिर SIP से मोटा पैसा कैसे बन जाता है और इसमें क्‍यों निवेश करना चाहिए?

SIP में निवेश क्यों करना चाहिए, ये 4 फायदे जानने के बाद सब कुछ क्‍लीयर हो जाएगा ! (Zee News)

आजकल SIP (Systematic Investment Plan) को लेकर क्रेज काफी बढ़ रहा है. अगर आप किसी से निवेश के मामले में सलाह लेंगे तो आपको एसआईपी में निवेश करने के लिए जरूर कहा जाएगा. दरअसल SIP के जरिए आप किसी भी तरह के म्‍यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं और मोटी रकम जुटा सकते हैं. अच्‍छी बात ये है कि SIP को आप 500 रुपए से भी शुरू कर सकते हैं. ज्‍यादातर एक्‍सपर्ट मानते हैं कि SIP से कम क्या आपको निवेश करना चाहिए? समय में ज्‍यादा पैसा बनाया जा सकता है. हालांकि आपके मन में ये सवाल जरूर आता होगा कि आखिर SIP से मोटा पैसा कैसे बन जाता है और इसमें क्‍यों निवेश करना क्या आपको निवेश करना चाहिए? चाहिए? आइए आपको बताते हैं इन सवालों के जवाब.

SIP में निवेश क्‍यों करना चाहिए? ये 4 वजह जानने के बाद दूर हो जाएगा सारा कन्‍फ्यूजन

एसआईपी में निवेश करने के‍ लिए आपको बहुत सोचने की जरूरत नहीं है, हर महीने महज 500 रुपए जमा करके आप इसकी शुरुआत कर सकते हैं. जब आपकी इनकम बढ़ जाए तो आप इस अमाउंट को अपनी सुविधा के हिसाब से बढ़ा सकते हैं.

Systematic Investment Plan (SIP) आजकल काफी पॉपुलर है. SIP के जरिए म्‍यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है. एसआईपी के जरिए निवेश करने से बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा जोखिम काफी कम हो जाता है. SIP में आप हर महीने 500 रुपए के छोटे निवेश से भी शुरुआत कर सकते हैं. इसके अलावा आज के समय में एसआईपी अन्‍य स्‍कीम्‍स की क्या आपको निवेश करना चाहिए? तुलना में कहीं बेहतर रिटर्न देने वाला प्‍लान माना जाता है. आइए आपको बताते हैं कि एसआईपी आपके लिए क्‍यों है बेस्‍ट.

प्‍लान में मिलती है फ्लैक्सिबिलिटी

एसआईपी में निवेश करने के‍ लिए आपको बहुत सोचने की जरूरत नहीं है, हर महीने महज 500 रुपए जमा करके आप इसकी शुरुआत कर सकते हैं. जब आपकी इनकम बढ़ जाए तो आप इस अमाउंट को अपनी सुविधा के हिसाब से बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा आप इसमें मासिक, तिमाही या छमाही निवेश का विकल्‍प भी चुन सकते हैं. वहीं किसी तरह का आर्थिक संकट होने पर आप इसे बीच में कुछ समय के लिए रोक भी सकते हैं. यानी इस प्‍लान में आपको फ्लैक्सिबिलिटी मिलती है.

एसआईपी में अन्‍य स्‍कीम्‍स की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलता है. इसमें आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है यानी आपको निवेश पर जो रिटर्न मिलता है, उस रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है. इसके अलावा एसआईपी में करीब 12 फीसदी तक औसतन रिटर्न मिल जाता है. कई बार ये इससे ज्‍यादा भी होता है. ऐसे में एसआईपी के जरिए पूंजी तैयार करके आप अपने बड़े सपनों को भी पूरा कर सकते हैं.

रुपी कॉस्‍ट एवरेजिंग का फायदा

जब आप समय-समय पर निवेश करते हैं तो आपको रुपी कॉस्‍ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है. यानी अगर मार्केट गिरावट में है और आपने पैसा निवेश किया तो आपको ज्‍यादा यूनिट्स अलॉट होंगे और मार्केट में तेजी आने पर अलॉट होने वाले यूनिट्स की संख्या कम होगी. मार्केट में उतार-चढ़ाव की स्थिति में भी आपका खर्च औसत बना रहता है. यानी मार्केट में गिरावट आने पर भी आप लॉस में नहीं जाते. ऐसे में जब मार्केट में तेजी आती है, तो आपको अपने औसत निवेश पर ही क्या आपको निवेश करना चाहिए? बेहतर रिटर्न पाने का मौका मिलता है.

SIP के जरिए आप निश्चित समय के लिए बचत करना सीखते हैं, यानी आपको मासिक, तिमाही या छमाही पर जो भी पैसा निवेश करना है, उस रकम की बचत करने के बाद ही आप बाकी खर्च करते हैं. इस तरह आपको अनुशासित निवेश की आदत पड़ती है.

NFO क्या है? क्या आपको इसमें निवेश करना चाहिए, जानें क्या है सही स्ट्रैटजी

NFO क्या है? क्या आपको इसमें निवेश करना चाहिए, जानें क्या है सही स्ट्रैटजी

न्यू फंड ऑफर यानी NFO में निवेश से पहले इन्हेें ठीक से परख लें.

एनएफओ (NFO) यानी न्यू फंड ऑफर. जब भी कोई म्यूचुअल फंड कंपनी एनएफओ लॉन्च करती है तो इसका जबरदस्त प्रचार किया जाता है. चैनलों और अखबारों में फंड मैनेजरों के इंटरव्यू आते हैं, जिनमें न्यू फंड की निवेश स्ट्रैटजी बताई जाती है. इसकी खूबियां गिनाई जाती हैं. ऐसा माहौल बनाया जाता है कि म्यूचुअल फंड ग्राहकों ने इसमें पैसा लगाया तो जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं. लेकिन क्या यह सच है? क्या एनएफओ में फंड निवेशकों को निवेश करना चाहिए?

इस सवाल से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर न्यू फंड ऑफर यानी NFO है क्या? दरअसल, जब भी कोई एसेट मैनेजमेंट कंपनी ( AMC) कोई नया फंड लॉन्च करती है तो यह सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही खुला होता है. फंड पोर्टफोलियो के लिए शेयर खरीदना इसका मकसद होता है और इसलिए इसके जरिये पैसा जुटाया जाता है. एक तरह से एक नए फंड की शुरुआत करने के लिए पैसा जुटाया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को न्यू फंड ऑफर कहा जाता है.

कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं

चूंकि यह फंड नया होता है इसलिए इसका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता है, जिसे देख कर हम निवेश का फैसला कर सकें. इसलिए ज्यादातर निवेशक फंड हाउस के पिछले प्रदर्शन को देख कर इसके एनएफओ में निवेश करते हैं. लेकिन यह सही रणनीति नहीं है. क्योंकि नई निवेश रणनीति के सामने नई चुनौतियां होती हैं और आपको पता नहीं होता कि यह फंड कामयाब होगा या नहीं. इसलिए हमेशा ऐसे फंड में निवेश करना बेहतर होता है, जिसका मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड हो.

एनएफओ, आईपीओ की तरह लगता है लेकिन लेकिन यह इसकी तरह नहीं होता. बहुत सारे निवेशक इसे आईपीओ जैसा समझते हैं और उन्हें लगता है कि जिस तरह शेयरों में डिमांड बढ़ने पर उन्हें फायदा होता है, वैसा ही इसमें भी ऐसा होगा. लेकिन ऐसा नहीं है. म्यूचअल फंड के एनएवी पर डिमांड और सप्लाई के नियम का कोई असर नहीं होता. किसी म्यूचुअल फंड में कितने यूनिट्स होंगे यह तय नहीं होता. यूनिट्स जरूरत पड़ने पर बना ली जाती हैं.

ऊंची लागत

हर फंड का एक एक्सपेंस रेश्यो होता है. ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो का मतलब यह है कि आप अपने फंड को मैनेज करने के लिए ज्यादा पैसा दे रहे हैं. जाहिर है इससे आपका रिटर्न घटेगा. भारत में रेगुलेशन नियमों के मुताबिक छोटे एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) वाले फंड ज्यादा एक्सपेंस चार्ज वसूल कर सकते हैं. एनएफओ जब लॉन्च होता है तो आमतौर पर इसका एयूएम छोटा होता है . इसलिए इसका एक्सपेंस चार्ज ज्यादा होने की संभावना रहती है. इसलिए यह महंगा होता है.

अगर कोई एनएफओ किसी खास वक्त लॉन्च क्या आपको निवेश करना चाहिए? हुआ है तो जरूरी नहीं है कि इसमें निवेश का यही सही वक्त है. एएमसी अपने क्या आपको निवेश करना चाहिए? प्रोडक्ट बास्केट को बड़ा करने या पूरा करने के लिए भी एनएफओ लाते हैं. इसलिए एनएफओ लॉन्च हुआ है इसलिए इसमें निवेश करना है, यह ठीक रणनीति नहीं है.

कुल मिला कर , एनएफओ में निवेश अंधेरे में तीर चलाने जैसा है. इसलिए अनिश्चितता की बजाय ऐसे फंड्स में निवेश करें जिसका एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड हो. अगर एनएफओ कुछ खास हो और आपके पोर्टफोलियो के हिसाब से यह फिट बैठ रहा है तो थोड़ा इंतजार करके देखें कि क्या इसकी थीम और निवेश रणनीति बताए गए मकसद के लिए मुफीद है.

इन म्यूचुअल फंड्स ने 5 साल में 20 फीसदी या उससे अधिक का सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) दर्ज किया है. अगर किसी निवेशक . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 09, 2022, 07:50 IST
निवेश सलाहकार निधि मनचंदा के अनुसार, इन फंड्स ने रिस्क को अच्छे से मैनेज किया है.
उनका कहना है कि इन फंड्स का रिस्क एडजेस्टेड रिटर्न बहुत अधिक है.
बता दें कि क्वांट म्यूचुअल फंड्स की स्कीम्स ने 5 साल में लगभग सभी फंड्स से बेहतर रिटर्न दिया है.

नई दिल्ली. म्यूचुअल फंड बगैर फंड मैनेजमेंट की चिंता किए निवेश से बेहतर रिटर्न कमाने का अच्छा तरीका होते हैं. कई फंड ऐसे होते हैं जो बहुत कम समय में निवेश का पैसा दोगुना या अधिक कर देते हैं. ऐसा ही फंड है क्वांट म्यूचुअल फंड. इसकी 4 स्कीम्स क्वांट टैक्स प्लान, क्वांट एक्टिव फंड, क्वांट स्मॉल कैप फंड और क्वांट मिड कैप फंड पिछले 5 साल में रिटर्न देने के मामले में हर इक्विटी फंड से आगे रहे हैं. इन म्यूचुअल फंड्स ने 5 साल में 20 फीसदी या उससे अधिक का सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) दर्ज किया है.

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