A ने एक व्यापार की शुरुआत में 45,000 रुपये की पूंजी निवेश किया तथा कुछ समय बाद B 30,000 रुपये निवेश कर उस व्यापार में शामिल हो गया। यदि एक वर्ष के अंत में उन्हें 2 : 1 के अनुपात में लाभ प्राप्त हुआ हो, तो B कितने समय बाद व्यापार में शामिल हुआ?

AFCAT 1 2023 Application Link Active. The Indian Air Force (IAF) began the AFCAT 1 2023 Registration on 1st December 2022 and the registration process will continue till 30th December 2022. For NCC Special Entry in the flying branch, NCC Air Wing C Certificate is mandatory. The AFCAT Entry exam will be conducted to recruit candidates in various branches such as Flying, Technical, Weapon Systems, Administration, Logistics, Accounts, Education & Meteorology. Check out AFCAT 1 2023 Eligibility here. The AFCAT Exam will be from 24th to 26th February 2023.

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कम पूँजी में लघु उद्योग लगाए – कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस

kam paise me jyada kamai wala business

किसी भी MSME उद्योग के सफलतापूर्वक संचालन के लिए आवश्यक होता है। योग्यता, कुशल कर्मचारी, पर्याप्त साधन तथा संगठन जिसके अंतर्गत व्यवसाय की गतिविधियां संचालित की जाती है। यह भी सच है कि इन सभी के लिए आवश्यक धन की जरुरत होती है।

अगर कारोबारी के पास पर्याप्त धन नहीं होता है तो कारोबारी को बिजनेस लोन की सहायता लेना चाहिए। देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से बिजनेस का विस्तार करने के लिए 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, सिर्फ 3 दिन* में मिलता है।

मैकेंजी की एक शोध के मुताबिक भारत में कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस करना यानी लघु उद्योग की स्थापना करना लगभग हर पांचने व्यक्ति का सपना होता है। लेकिन 90 प्रतिशत लोगो का यह सपना महज एक सपना बनकर ही रह जाता है।

सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस सफल कर पाते हैं यानी अपना लघु उद्योग स्थापित कर पाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ लोगो के पास जरुरी धन की कमी होती है तो कुछ लोगो के पास प्रभावी बिजनेस आइडिया नहीं होता है।

इससे यह तो बिल्कुल साफ है कि कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस के लिए भी बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा जरुरी धन चाहिए होता है। यानी लघु उद्योग चलाने के लिए बिजनेस आइडिया होने के साथ – साथ जरुरी धन होना भी महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि दोनों एक – बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा दूसरे के पूरक हैं। दोनों ही एक दूसरे के अभाव में नहीं चल सकते हैं।

लेकिन प्रायः यह देखा गया है कि अगर पूंजी कम भी हो लेकि बिजनेस का आइडिया शानदार हो तो बिजनेस का सफल होना तय होता है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि कम पूंजी में लघु उद्योग लगाए (कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस) और बिजनेस स्टेबिलिटी के साथ – साथ मुनाफा भी कमाए।

आईए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि कम पूंजी में (कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस) कौन – कौन सा उद्योग लगाया जा सकता है और बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

कम पूँजी में लघु उद्योग लगाए जा सकते हैं

कम पूँजी में लघु उद्योग लगाए – कम पैसों में शुरु होने वाले बिजनेस निम्नलिखित हैंः

Small Business Idea : 25,000 रुपये सालाना खर्च करके हर महीने कमाएं ₹2 लाख, जानें क्या है यह सुपरहिट बिजनेस और कैसे करें स्टार्ट?

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मुनाफा(Bumper Profits By Investing Less Money) कमा सकते हैं।

25,000 रुपये करें सालाना निवेश:

बताते चलें की इस खास Business को आप बस 25,000 रुपये सालाना खर्च करके शुरू कर सकते हैं और

इससे आप औसतन 1.बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा 75 लाख रुपये महीने की कमाई (Profitable Business) हो सकती है।

आज आपको हम बता रहे हैं मछली पालन (Fish Farming Idea) के व्यवसाय के बारे में.

वहीं मछली पालन(बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा Fish Farming Business) भी आज कल बहुत बढ़िया मुनाफा दे रहा है।

2 लाख रुपये से ज्यादा की होती है आमदनी:

बताते चलें मछली पालन का बिजनेस(Fish Farming Business) आजकल बहुत ज्यादा प्रचलित हो रहा है।

Govt. की मदद से शुरू किए जाने वाले इस Business में 2 लाख रुपये से ज्यादा की Income होती है।

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार यानि Central Govt. भी इस बिजनेस के लिए कई सुविधाएं देती हैं।

आप जिस राज्य में इसे शुरू करना चाहते हैं, वहां से Fisheries Office में पूछताछ कर सकते हैं।

बंपर मुनाफा दे सकती है मछली पालन का व्यवसाय:

बता दें अगर आप भी मछली पालन का व्यवसाय(Fish Farming Business) कर रहे हैं या फिर इसे शुरू करना

चाह रहे हैं तो इसकी आधुनिक तकनीक(Modern Technology) आपको बंपर मुनाफा दे सकती है।

वहीं मछली पालन के लिए इन दिनों बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Technique) काफी मशहूर हो रहा है।

कई लोग इस Biofloc Technique का इस्तेमाल करके लाखों में कमाई(Earn Big Money) कर रहे हैं।

Biofloc Technique क्या है?

आपको बता दें की Fish Farming Business के लिए Biofloc Technique एक बैक्टीरिया का नाम है।

इस Biofloc Technique के जरिए मछली पालन का बिजनेस बहुत आसान हो जाता है।

वहीं Biofloc Technique में बड़े बड़े (करीब 10-15 हजार लीटर के) टैंकों में मछलियों को डाला जाता है।

इन टैंकों में पानी डालने, निकालने, उसमें ऑक्सीजन देने आदि की अच्छी खासी व्यवस्था होती है।

Biofloc Bacteria मछली के मल को प्रोटीन में बदल देता है, जिसे मछलियां वापस खा लेती हैं,

इससे 1/3 फीड की बचत होती है. पानी भी गंदगी(Water Mess) होने से बची रहती है।

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अगर खर्च(Expenses) की बात करें तो आप 7 टैंक से अपना बिजनेस(Fish Farming Business) शुरू करना

चाहते हैं तो इन्हें Setup करने में आपका करीब 7.5 लाख रुपये का खर्च(Expenses) आएगा।

हालांकि, आप तालाब में मछली पालकर(Fishing In The Pond) भी मोटी कमाई कर सकते हैं।

कम खर्च के साथ मिलता है बेहतरीन मुनाफा:

बता दें की मछली पालन एक ऐसा Business है जिसमें आपको कम खर्च के साथ Bumper Profit मिलता है।

वहीं सरकार(Govt.) भी मछली पालन के व्यवसाय को बढ़ावा(Fish Farming Business) दे रही है।

बताते चलें की मछली पालकों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे कृषि(Agri) का दर्जा भी दिया है.

छत्तीसगढ़ सरकार मछली पालन करने वाले किसानों को Interest Free Loan की सुविधा दे रही है।

इसके साथ ही मछुवारों के लिए Insurance Schemes और Subsidies भी सरकार की तरफ से मिलती है।

फिशरीज के लिए किसानों को दी जाती है ट्रेनिंग:

आपको बता दें की कई अलग-अलग राज्यों में Fisheries के लिए किसानों को Training भी दी जाती है।

किसान इस Training के बाद इस Business में महज 25,000 रुपये लगाकर Profit कमाने लगते हैं।

वहीं इसके लिए आपके पास कुछ तकनीक(Some Techniques) और जगह होन चाहिए.

इसके तहत मछुवारों के लिए Insurance Schemes और Subsidies भी सरकार की तरफ से मिलती है।

ये है डबल मुनाफे का कारोबार, दूध इस पार तो क्रीम उस पार

ये है डबल मुनाफे का कारोबार, दूध इस पार तो क्रीम उस पार

बिहारशरीफ। चारों ओर रोजगार के अवसरों की कमी के बीच ये रोजगार सृजन और कमाई में बढ़ोत्तरी का तरीका है। इसे तीन दशक पहले शुरू तो दो-तीन लोगों ने किया था, परन्तु आज ये कारोबार सैकड़ों लोगों के लिये पूरे साल का रोजगार बन चुका है। इस कारोबार का आधार गाय और भैंस का दूध है। दूध की उपलब्धता का आकलन कर 30 हजार से 1 लाख रुपये कीमत के बीच एक कामधेनु ब्रांड की मशीन खरीदिए, उसे लकड़ी के मजबूत तख्ते में फिट कीजिए और शुरू कीजिए दूध पेराई का कारोबार। जगह आपको वैसी चुननी होगी जहां आना-जाना आसान हो। क्योंकि अपने गांव से दूध लेकर शहर की ओर चला पशुपालक गली-गली भटकेगा नहीं। बस, साइकिल या बाइक से मेन रोड पर पहुंचते ही जिस दूध पेराई मशीन वाले पर नजर पड़ गई वहीं अपना सारा दूध दे देना है। अगर उसे दूध पेराई कराकर दूध और क्रीम दोनों साथ ले जाना है तो वह प्रति लीटर 2 रुपये मेहनताना देगा। अधिकांश पशुपालक दूध पेरने वाले के हाथों ही क्रीम बेच देते हैं और बचे टोंड दूध का सौदा चाय दुकान वाले से कर लेते हैं। फिलहाल, पशुपालक को 150 रुपये किलो की दर से क्रीम की कीमत मिल रही है। वहीं टोंड मिल्क 20 रुपये लीटर बिक जाता है। कारोबार में सभी एक-दूसरे के पूरक, नकद है लेन-देन : इस कारोबार में पशुपालक, दूध पेरने वाले और चाय वाले तीनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं। पशुपालक को नकदी, दूध पेरने वाले को क्रीम और चाय वाले को टोंड मिल्क का इंतजार रहता है। लेन-देन नगद होता है।

जानें डबल मुनाफे का गणित :

पशुपालक अगर अपना फुल क्रीम दूध सहकारी समिति को बेचता है तो उसे 26 से 28 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। बाजार में दूध बेचने पर 30 से 35 रुपये बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा प्रति लीटर मिल जाते हैं। अगर कोई ग्राहक सीधे दूध खरीद ले तो वह 40 रुपये तक दे देता है। अब अगर पशुपालक बिना इतनी मगजमारी किए दूध पेरने वाले के पास जाता है तो उसे गाय के एक लीटर दूध में 100 ग्राम क्रीम के बदले 15 रुपये और चाय वाले से बचे टोंड दूध के 20 रुपये नकद मिल जाते हैं। उसे एक लीटर दूध के आसानी से 35 रुपये मिल जाते हैं। भैंस के दूध में क्रीम प्रति लीटर 150 ग्राम तक निकलता है तो पशुपालक को 42 रुपये लीटर तक दाम मिल जाता है। एक रुपया बकाया भी नहीं रहता। ये हुआ पशुपालक का डबल मुनाफा। जब दूध पेरने वाला क्रीम खरीद लेता है तो वह आसानी से 20 रुपये मुनाफे के साथ 170 रुपये किलो की दर से उसे किसी मिठाई दुकानदार को बेच लेता है। इस तरह उसे 2 से ढाई रुपये प्रति लीटर दूध के हिसाब से अपना मुनाफा मिल जाता है। एक आदमी 1 घंटे में 100 लीटर दूध पेरकर 10 से 15 किलो क्रीम निकाल लेता है। इस तरह 1 घंटे में उसकी कमाई 2 सौ से 3 सौ रुपये हो जाती है। यह हुआ कम वक्त में दूध पेरने वाले का डबल मुनाफा। जब 20 बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा रुपये लीटर की दर से टोंड मिल्क चाय दुकानदार को मिलता है तो वह इससे 20 कप स्पेशल चाय बना लेता है। एक कप के 5 रुपये लिये तो उसके पास 100 रुपये आ जाते हैं। इसमें चायपत्ती, चीनी और ईंधन का खर्च घटा भी दें तो वह सस्ते दूध के कारण डबल मुनाफे में रहता है।

कहां-कहां फल-फूल रहा दूध पेराई का कारोबार : जिले में बिहारशरीफ के देवीसराय मोड़, राजगीर, पावापुरी व हरनौत में भी दूध पेराई का कारोबार कुटीर उद्योग की शक्ल ले चुका है। इससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका तो चल ही रही है वहीं, लोगों को भी शुद्ध क्रीम या घी के लिये भटकना नहीं पड़ता।

कोलकाता में 35 साल पहले दूध पेराई की मशीन देखी तो यहां ले आये : व्यवसाय से जुड़े अवधेश प्रसाद बताते हैं कि कोलकाता में 35 साल पहले दूध पेराई की मशीन देखी थी। वहीं से ये आइडिया दिमाग में बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा आया। शुरू में लोगों को इसकी खूबी समझानी पड़ी। अब तो पशुपालक दूध पेरवाने के लिये लाइन में लगे रहते हैं। आज प्रतिदिन 300 से 350 लीटर दूध पेर लेते हैं जिसके क्रीम से 500 से 700 रुपये की कमाई हो जाती है। बताया कि प्रति लीटर दूध से क्रीम बनाने की एवज में दो रुपया लेते हैं। वहीं क्रीम को डेढ़ सौ रुपये किलो खरीदकर 170 रुपये किलो बेच लेते हैं। भैंस के दूध में 150 ग्राम प्रति लीटर क्रीम निकलता है। वहीं गाय के दूध में प्रति लीटर 75 ग्राम से 100 ग्राम के बीच में क्रीम निकलता है। क्रीम निकालने के के बाद टोंड दूध 20 रुपया प्रति लीटर बेचा जाता है। फुल क्रीम मिल्क और टोंड मिल्क में अंतर : फुल क्रीम दूध में वसा 3.5 प्रतिशत होती है वहीं टोंड दूध में घटकर 3 प्रतिशत रह जाती है। टोंड दूध में प्रति ग्लास 120 कैलोरी होती हैं जबकि फुल क्रीम दूध में प्रति ग्लास कैलोरी 148 होती हैं। टोंड दूध में कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है जबकि फुल क्रीम दूध में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है। इस तरह युवावस्था के बाद टोंड दूध का सेवन ज्यादा फायदेमंद बताया जाता है। इसमें भी फुल क्रीम दूध जितने ही पोषक बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा तत्व होते हैं। बस वसा और कैलोरी कम हो जाती है।

ये है डबल मुनाफे का कारोबार, दूध इस पार तो क्रीम उस पार

ये है डबल मुनाफे का कारोबार, दूध इस पार तो क्रीम उस पार

बिहारशरीफ। चारों ओर रोजगार के अवसरों की कमी के बीच ये रोजगार सृजन और कमाई में बढ़ोत्तरी का तरीका है। इसे तीन दशक पहले शुरू तो दो-तीन लोगों ने किया था, परन्तु आज ये कारोबार सैकड़ों लोगों के लिये पूरे साल का रोजगार बन चुका है। इस कारोबार का आधार गाय और भैंस का दूध है। दूध की उपलब्धता का आकलन कर 30 हजार से 1 लाख रुपये कीमत के बीच एक कामधेनु ब्रांड की मशीन खरीदिए, उसे लकड़ी के मजबूत तख्ते में फिट कीजिए और शुरू कीजिए दूध पेराई का कारोबार। जगह आपको वैसी चुननी होगी जहां आना-जाना आसान हो। क्योंकि अपने गांव से दूध लेकर शहर की ओर चला पशुपालक गली-गली भटकेगा नहीं। बस, साइकिल या बाइक से मेन रोड पर पहुंचते ही बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा जिस दूध पेराई मशीन वाले पर नजर पड़ गई वहीं अपना सारा दूध दे देना है। अगर उसे दूध पेराई कराकर दूध और क्रीम दोनों साथ ले जाना है तो वह प्रति लीटर 2 रुपये मेहनताना देगा। अधिकांश पशुपालक दूध पेरने वाले के हाथों ही क्रीम बेच देते हैं और बचे टोंड दूध का सौदा चाय दुकान वाले से बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा कर लेते हैं। फिलहाल, पशुपालक को 150 रुपये किलो की दर से क्रीम की कीमत मिल रही है। वहीं टोंड मिल्क 20 रुपये लीटर बिक जाता है। कारोबार में सभी एक-दूसरे के पूरक, नकद है लेन-देन : इस कारोबार में पशुपालक, दूध पेरने वाले और चाय वाले तीनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं। पशुपालक को नकदी, दूध पेरने वाले बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा को क्रीम और चाय वाले को टोंड मिल्क का इंतजार रहता है। लेन-देन नगद होता है।

जानें डबल मुनाफे का गणित :

पशुपालक अगर अपना फुल क्रीम दूध सहकारी समिति को बेचता है तो उसे 26 से 28 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। बाजार में दूध बेचने पर 30 से 35 रुपये प्रति लीटर मिल जाते हैं। अगर कोई ग्राहक सीधे दूध खरीद ले तो वह 40 रुपये तक दे देता है। अब अगर पशुपालक बिना इतनी मगजमारी किए दूध पेरने वाले के पास जाता है तो उसे गाय के एक लीटर दूध में 100 ग्राम क्रीम के बदले 15 रुपये और चाय वाले से बचे टोंड दूध के 20 रुपये नकद मिल जाते हैं। उसे एक लीटर दूध के आसानी से 35 रुपये मिल जाते हैं। भैंस के दूध में क्रीम प्रति लीटर 150 ग्राम तक निकलता है तो पशुपालक को 42 रुपये लीटर तक दाम मिल जाता है। एक रुपया बकाया भी नहीं रहता। ये हुआ पशुपालक का डबल मुनाफा। जब दूध पेरने वाला क्रीम खरीद लेता है तो वह आसानी से 20 रुपये मुनाफे के साथ 170 रुपये किलो की दर से उसे किसी मिठाई दुकानदार को बेच लेता है। इस तरह उसे 2 से ढाई रुपये प्रति लीटर दूध के हिसाब से अपना मुनाफा मिल जाता है। एक आदमी 1 घंटे में 100 लीटर दूध पेरकर 10 से 15 किलो क्रीम निकाल लेता है। इस तरह 1 घंटे में उसकी कमाई 2 सौ से 3 सौ रुपये हो जाती है। यह हुआ कम वक्त में दूध पेरने वाले का डबल मुनाफा। जब 20 रुपये लीटर की दर से टोंड मिल्क चाय दुकानदार को मिलता है तो वह इससे 20 कप स्पेशल चाय बना लेता है। एक कप के 5 रुपये लिये तो उसके पास 100 रुपये आ जाते हैं। इसमें चायपत्ती, चीनी और ईंधन का खर्च घटा भी दें तो वह सस्ते दूध के कारण डबल मुनाफे में रहता है।

कहां-कहां फल-फूल रहा दूध पेराई का कारोबार : जिले में बिहारशरीफ के देवीसराय मोड़, राजगीर, पावापुरी व हरनौत में भी दूध पेराई का कारोबार कुटीर उद्योग की शक्ल ले चुका है। इससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका तो चल ही रही है वहीं, लोगों को भी शुद्ध क्रीम या घी के लिये भटकना नहीं पड़ता।

कोलकाता में 35 साल पहले दूध पेराई की मशीन देखी तो यहां ले आये : व्यवसाय से जुड़े अवधेश प्रसाद बताते हैं कि कोलकाता में 35 साल पहले दूध पेराई की मशीन देखी थी। वहीं से ये आइडिया दिमाग में आया। शुरू में लोगों को इसकी खूबी समझानी पड़ी। अब तो पशुपालक दूध पेरवाने के लिये लाइन में लगे रहते हैं। आज प्रतिदिन 300 से 350 लीटर दूध पेर लेते हैं जिसके क्रीम से 500 से 700 रुपये की कमाई हो जाती है। बताया कि प्रति लीटर दूध से क्रीम बनाने की एवज में दो रुपया लेते हैं। वहीं क्रीम को डेढ़ सौ रुपये किलो खरीदकर 170 रुपये किलो बेच लेते हैं। भैंस के दूध में 150 ग्राम प्रति लीटर क्रीम निकलता है। वहीं गाय के दूध में प्रति लीटर 75 ग्राम से 100 ग्राम के बीच बिजनेस में चाहिए डबल मुनाफा में क्रीम निकलता है। क्रीम निकालने के के बाद टोंड दूध 20 रुपया प्रति लीटर बेचा जाता है। फुल क्रीम मिल्क और टोंड मिल्क में अंतर : फुल क्रीम दूध में वसा 3.5 प्रतिशत होती है वहीं टोंड दूध में घटकर 3 प्रतिशत रह जाती है। टोंड दूध में प्रति ग्लास 120 कैलोरी होती हैं जबकि फुल क्रीम दूध में प्रति ग्लास कैलोरी 148 होती हैं। टोंड दूध में कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है जबकि फुल क्रीम दूध में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है। इस तरह युवावस्था के बाद टोंड दूध का सेवन ज्यादा फायदेमंद बताया जाता है। इसमें भी फुल क्रीम दूध जितने ही पोषक तत्व होते हैं। बस वसा और कैलोरी कम हो जाती है।

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