© Reuters. डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने पर बढ़ी अभिभावकों की चिंता, घरेलू पर्यटन को मिला फायदा

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डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कैसे तय होती है, रुपया कमजोर, डॉलर मजबूत क्यों हुआ?

मेरी पीढ़ी ने जबसे होश संभाला है तब से अख़बारों और टीवी पर यही हेडलाइन पढ़ी कि डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट. आज फिर हेडलाइन है रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, एक डॉलर की कीमत 80 रुपये के पार हुई. अक्सर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत को देश की प्रतिष्ठा के साथ जोड़ा जाता है. लेकिन क्या यह सही है? आजादी के बाद भारत सरकार ने लंबे समय तक कोशिश की कि रुपये की कीमत को मजबूत रखा जा सके. लेकिन उन देशों का क्या जिन्होंने खुद अपनी करेंसी की कीमत घटाई? करेंसी की कीमत घटाने की वजह से उन देशों की आर्थिक हालत न केवल बेहतर हुई बल्कि दुनिया की चुनिंदा बेहतर अर्थव्यवस्थाओं में वो देश शामिल भी हुए.

किसी भी देश की करेंसी की कीमत अर्थव्यवस्था के बेसिक सिद्धांत, डिमांड और सप्लाई पर आधारित होती है. फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में जिस करेंसी की डिमांड ज्यादा होगी उसकी कीमत भी ज्यादा होगी, जिस करेंसी की डिमांड कम होगी उसकी कीमत भी कम होगी. यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड है. सरकारें करेंसी के रेट को सीधे प्रभावित नहीं कर सकती हैं.

किसी करेंसी की डिमांड कम और ज्यादा कैसे होती है?

डॉलर दुनिया की सबसे बड़ी करेंसी है. दुनियाभर में सबसे ज्यादा कारोबार डॉलर में ही होता है. हम जो सामान विदेश से मंगवाते हैं उसके बदले हमें डॉलर देना पड़ता है और जब हम बेचते हैं तो हमें डॉलर मिलता है. अभी जो हालात हैं उसमें हम इम्पोर्ट डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है ज्यादा कर रहे हैं और एक्सपोर्ट कम कर रहे हैं. जिसकी वजह से हम ज्यादा डॉलर दूसरे देशों को दे रहे हैं और हमें कम डॉलर मिल रहा है. आसान भाषा में कहें तो दुनिया को हम सामान कम बेच रहे हैं और खरीद ज्यादा रहे हैं.

आसान भाषा में कहें तो फॉरेन एक्सचेंज एक अंतरराष्ट्रीय बाजार है जहां दुनियाभर की मुद्राएं खरीदी और बेची जाती हैं. यह बाजार डिसेंट्रलाइज्ड होता है. यहां एक निश्चित रेट पर एक करेंसी के बदले दूसरी करेंसी खरीदी या बेची जाती है. दोनों करेंसी जिस भाव पर खरीदी-बेची जाती है उसे ही एक्सचेंज रेट कहते हैं. यह एक्सचेंज रेट मांग और आपूर्ति के सिंद्धांत के हिसाब से घटता-बढ़ता रहा है.

करेंसी का डिवैल्यूऐशन और डिप्रीशीएशन क्या है?

करेंसी का डिप्रीशीएशन तब होता है जब फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट पर करेंसी की कीमत घटती है. करेंसी का डिवैल्यूऐशन तब होता है जब कोई देश जान बूझकर अपने देश की करेंसी की कीमत को घटाता है. जिसे मुद्रा का अवमूल्यन भी कहा जाता है. उदाहरण के तौर पर चीन ने अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया. साल 2015 में People's Bank of China (PBOC) ने अपनी मुद्रा चीनी युआन रेनमिंबी (डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है CNY) की कीमत घटाई.

करेंसी की कीमत घटाने से आप विदेश में ज्यादा सामान बेच पाते हैं. यानी आपका एक्सपोर्ट बढ़ता है. जब एक्सपोर्ट बढ़ेगा तो विदेशी मुद्रा ज्यादा आएगी. आसान भाषा में समझ सकते हैं कि एक किलो चीनी का दाम अगर 40 रुपये हैं तो पहले एक डॉलर में 75 रुपये थे तो अब 80 रुपये हैं. यानी अब आप एक डॉलर में पूरे दो किलो चीनी खरीद सकते हैं. यानी रुपये की कीमत गिरने से विदेशियों को भारत में बना सामान सस्ता पड़ेगा जिससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा और देश में विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ेगा.

आज़ादी से अब तक सिर्फ 1 बार ऐसा हुआ कि रुपया लगातार दो या डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है ज्यादा साल मज़बूत हुआ

10 साल में भारतीय करेंसी के मुकाबले डॉलर 20.22 रुपए तक महंगा हो गया है। अक्टूबर 2008 में रुपया 48.88 प्रति डॉलर के स्तर पर था, जो अब 69.10 के स्तर पर है। जल्द ही इसके 70 के स्तर पर पहुंचने की भी आशंका है। हालांकि रुपए के कमजोर होने का यह ट्रेंड अप्रैल 2016 से जारी है। वैसे आजादी के बाद से अब रुपए के मजबूत और कमजोर होने पर नजर डालें, तो कुछ और भी चौंकाने वाली जानकारियां सामने आती हैं। यह भी साफ हो जाता है कि इन 70 वर्षों में एक बार ही ऐसा मौका आया है, जब रुपया लगातार दो या ज्यादा बार मजबूत हुआ हो। ऐसा 2008 से 2011 के बीच हुआ। डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है अक्टूबर 2008 में रुपया 48.88 प्रति डॉलर था, जो 2009 में 46.37 के स्तर पर पहुंचा। जनवरी 2010 में रुपए ने 46.21 के स्तर को छुआ। इसके बाद अप्रैल 2011 में रुपया एक बार फिर मजबूत होकर 44.17 के स्तर पर पहुंच गया।

डॉलर के मुकाबले रुपये में दिखी बढ़त, 78.95 के स्तर पर हुआ बंद

बीते हफ्ते भी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट जारी रही। पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपये ने 79 का स्तर पार कर लिया और इसने 79.11 का नया रिकॉर्ड लो छुआ।

Rupee Close-डॉलर के मुकाबले रुपया आज बढ़त के साथ बंद हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे बढ़कर 78.95 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये की शुरुआत आज मजबूती के साथ हुई थी और यह 10 पैसे की बढ़त के साथ 79.05 के मुकाबले 78.94 पर खुला था।बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार 79.05 के स्तर पर बंद हुआ।

Rupee OPen-डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 9 पैसे गिरकर 79.03 के आसपास जाता नजर आया। हालांकि रुपये की शुरुआत आज मजबूती के साथ हुई थी और यह 10 पैसे की बढ़त के साथ 79.05 के मुकाबले 78.94 पर खुला था। फिलहाल 11.04 बजे के आसपास डॉलर के मुकाबले रुपया 79.04 के स्तर पर नजर आ रहा है।

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बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार 79.05 के स्तर पर बंद हुआ। 1 जुलाई को डॉलर के मुकाबले रुपया इंट्राडे में 79.1187 के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। खराब डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है होती ग्लोबल माइक्रो स्थितियों की वजह से दुनिया भर की तमाम करेंसीज में डॉलर के मुकाबले कमजोरी आई है। रुपया भी इस गिरावट का शिकार हो रहा है।

बीते हफ्ते रुपये की चाल पर नजर डालें तो बीते हफ्ते भी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट जारी रही। पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपये ने 79 का स्तर पार कर लिया और इसने 79.11 का नया रिकॉर्ड लो छुआ। हफ्ते के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया साप्ताहिक आधार पर 70 पैसे की गिरावट के साथ 79.04 के स्तर पर बंद हुआ है। बता दें कि 24 जून को डॉलर के मुकाबले रुपया 78.34 के स्तर पर बंद हुआ था।

एक डॉलर की कीमत 80 रुपए के पार- 2014 से अब तक 25% गिरावट, जानें क्यों हुआ ऐसा हाल

indian rupee cross 80 for the first time has broken 25 percent since 2014 dollar vs rupee know details MAA

बिजनेस डेस्कः रुपया 19 जुलाई को रिकॉर्ड निचले स्तर डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है पर पहुंच गया है। 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 80.01 रुपया हो गया डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले क्यों बढ़ रही है है। रुपया आज 4 पैसे कमजोर होकर खुला है। इससे पहले सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 79.97 पर बंद हुआ था। पिछले एक महीने में रुपया 2% से भी ज्यादा टूट चुका है। जानकारी दें कि एक साल में रुपया डॉलर के सामने 7.4% नीचे गिर गया है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ी से हुआ ऐसा हाल
रुपया के निचले स्तर पर पहुंचने का कारण सरकार ने कच्चे तेल की कीमत को छहराया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में रुपए के टूटने के कारण बताए। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग जैसे ग्लोबल फैक्टर, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशन्स का कड़ा होना रुपए के कमजोर होने का कारण है।

डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने पर बढ़ी अभिभावकों की चिंता, घरेलू पर्यटन को मिला फायदा

शेयर बाजार 21 जुलाई 2022 ,22:15

डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने पर बढ़ी अभिभावकों की चिंता, घरेलू पर्यटन को मिला फायदा

© Reuters. डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने पर बढ़ी अभिभावकों की चिंता, घरेलू पर्यटन को मिला फायदा

में स्थिति को सफलतापूर्वक जोड़ा गया:

में स्थिति को सफलतापूर्वक जोड़ा गया:

चेन्नई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भारतीय अभिभावकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है, क्योंकि इससे उनके बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों और अभिभावकों ने यह आशंका जताई है।उन्होंने यह भी कहा है कि छात्र अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं, क्योंकि रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है।

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