भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों और सोना व्यवसाईयों से से आरबीआई ने मांगा ब्योरा

गोरखपुर, 11 नवम्बर। केन्द्र सरकार के 1000-500₹ की नोटबंदी के फैसले के बाद बाजार मे मचा हड़कम्प थम नही रहा है। काले धन से सोना और विदेशी मुद्रा की भारी खरीदारी की खबर मानो रिजर्व बैंक को भी लग गयी।तभी तो आरबीआई ने ई-मेल भेजकर विदेशी मुद्रा की हर खरीद-बिक्री का ब्यौरा घंटा भीतर भेजने का फरमान जारी किया है। कुछ ऐसा ही फरमान सोने की बिक्री को लेकर भी जारी हुआ है।
गुरूवार की शाम देशभर के बैंको को मिले रिजर्व बैंक के एक निर्देश मे साफ कहा गया है कि अब 1000-500₹ के 4000₹ मूल्य का पुराना नोट 15 दिन में एक व्यक्ति सिर्फ एक बार ही बदल सकेगा। बैंको ने आज इसपर अमल भी किया नतीजन सैकड़ो लोग जो गुरूवार को नोट बदल लिए थे, बैरंग लौटे।अब 15 दिन बाद उनकी बारी आएगी। बैंको शुक्रवार को भी भारी भीड़ थी मगर आशंकाओं के बादल भी काफी घने थे। सरकार का रूख किसी की समझ मे नहीं आ रहा है।

रिजर्व बैंक हर पल हालात पर नजर रखे है और निर्देश जारी कर रहा है। सोना और विदेशी मुद्रा पर आये नए फरमान ने इसके कारोबारियों की नींद उड़ा दी है।कल तक इसके जो कारोबारी माल बेचकर लाखों कमाने और रकम खाते मे जमाकर सबकुछ पचा लेने का दावा कर रहे थे आज आरबीआई के फरमान से हिल गये। शायद यही कारण था कि शुक्रवार को सोने का दाम 75000₹ प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया मगर इस शर्त के साथ कि रकम सलटने के बाद ही डिलेवरी मिलेगी।

डालर, रियाल और दूसरी विदेशी मुद्रा आज बाजार से गायब थी। खरीदार बहुत थे मगर किसी भाव मे यह उपलब्ध नही थी। दरअसल बाजार इस बात से परेशान है कि रिजर्व बैंक नोटबंदी के आदेश के बाद की बिक्री किन नोटो से हुई इसकी जानकारी मांग रहा है।यही नही वह बैंक मे जमा हो रही हर नोट की तफसील भी ले रहा है । यही है परेशानी की सबसे बड़ी वजह जो आगे चलकर गले की फांस बन सकती है।

सर्वश्रेष्ठ विदेशी मुद्रा व्यापार मार्गदर्शिकाएँ कहाँ देखें?

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सर्वश्रेष्ठ विदेशी मुद्रा व्यापार मार्गदर्शिकाएँ कहाँ देखें?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2022,
  • (अपडेटेड 07 जून 2022, 11:19 AM IST)
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विदेशी मुद्रा का संकट, श्रीलंका ने तीन देशों में बंद किए उच्चायोग; खर्च के लिए भी पैसों की कमी

श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बुरे हाल में है। श्रीलंका ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए तीन विदेशी राजनयिक मिशनों को बंद करने की घोषणा कर दी है। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने जरूरी आयात के.

विदेशी मुद्रा का संकट, श्रीलंका ने तीन देशों में बंद किए उच्चायोग; खर्च के लिए भी पैसों की कमी

श्रीलंका की आर्थिक स्थिति बुरे हाल में है। श्रीलंका ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए तीन विदेशी राजनयिक मिशनों को बंद करने की घोषणा कर दी है। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने जरूरी आयात के वित्तपोषण के लिए आवश्यक डॉलर पर सख्त नियंत्रण लागू किया है।

कौन-कौन से देश हैं लिस्ट में?

श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय ने बताया है कि जर्मनी, नाइजीरिया और साइप्रस में वाणिज्य दूतावास जनवरी 2022 से बंद रहेंगे। मंत्रालय ने बताया है कि देश के बेहद जरूरी विदेशी भंडार के संरक्षण और विदेशों में श्रीलंका के मिशनों के रखरखाव से संबंधित खर्च को कम करने के मकसद से ऐसा फैसला लिया गया है।

तीन मिशनों का समापन उस दिन हुआ है जब श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने स्थानीय लोगों द्वारा प्राप्त विदेशी मुद्रा प्रेषण पर प्रतिबंध लगा दिया। इसने सभी कमर्शियल बैंकों को अपनी डॉलर की कमाई का एक चौथाई 10 फीसद से ऊपर सरकार को सौंपने का आदेश दिया है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि बैंकों के पास जरूरी सामान आयात करने वाले निजी व्यापारियों को देने के लिए कम डॉलर होंगे।

कोरोना वायरस से श्रीलंका की इकॉनमी बुरी तरह प्रभावित

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी ने श्रीलंका को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कोविड के आने के बाद से श्रीलंका का टूरिज्म बिजनेस बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। पिछले साल मार्च में सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए व्यापक आयात प्रतिबंध लगाया था जिससे फ्यूल और चीनी जैसे जरूरी सामानों की कमी हो गई थी।

श्रीलंका के पास सिर्फ 1.58 बिलियन डॉलर का विदेशी भंडार

नवंबर 2021 के अंत तक श्रीलंका के पास सिर्फ 1.58 बिलियन डॉलर का विदेशी भंडार था, जो 2019 में राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के पदभार संभालने के समय 7.5 बिलियन डॉलर था।

रेटिंग एजेंसी फिच ने दिसंबर की शुरुआत में अपने 26 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्ज पर एक संप्रभु डिफॉल्ट की बढ़ती आशंकाओं के कारण श्रीलंका को डाउनग्रेड मुफ्त विदेशी मुद्रा सिग्नल कर दिया था। हालांकि सरकार ने कहा है कि वह अपने दायित्वों को पूरा कर सकती है।

विदेशी मुद्रा भंडार क्या है? | Foreign Exchange Reserves – UPSC Notes

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देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर से गिरावट हुई है.

विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक में रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकें। विदेशी मुद्रा भंडार को एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखा जाता है। अधिकांशत: डॉलर और बहुत बा यूरो में विदेशी मुद्रा मुफ्त विदेशी मुद्रा सिग्नल भंडार रखा जाता है। कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा भंडार में केवल विदेशी बैंक नोट, विदेशी बैंक जमा, विदेशी ट्रेजरी बिल और अल्पकालिक और दीर्घकालिक विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां सम्मिलित होनी चाहिए। हालांकि, सोने के भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर), और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जमा राशि भी विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होता हैं।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल हैं –

  1. विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA)
  2. स्वर्ण भंडार
  3. विशेष आहरण अधिकार (SDR)
  4. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ रिज़र्व ट्रेंच

FCA

  • FCA ऐसी संपत्तियाँ हैं जिनका मूल्यांकन देश की स्वयं की मुद्रा के अतिरिक्त किसी अन्य मुद्रा के आधार पर किया जाता है.
  • FCA विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है। इसे डॉलर के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • FCA में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्रा की कीमतों में उतार-चढ़ाव या मूल्यह्रास का असर पड़ता है।

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विदेशी मुद्रा भंडार का अर्थव्यवस्था के लिए महत्व

  • विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी सरकार और RBI को आर्थिक विकास में गिरावट के कारण पैदा हुए किसी भी बाहरी या अंदरुनी वित्तीय संकट से निपटने में सहायता करती है.
  • यह आर्थिक मोर्चे पर संकट के समय देश को आरामदायक स्थिति उपलब्ध कराती है।
  • वर्तमान विदेशी भंडार देश के आयात बिल को एक वर्ष तक संभालने के लिए पर्याप्त है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी से रुपए को डॉलर के मुकाबले स्थिति दृढ़ करने में सहायता मिलती है।
  • वर्तमान समय में विदेशी मुद्रा भंडार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अनुपात लगभग 15% है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार आर्थिक संकट के बाजार को यह भरोसा देता है कि देश बाहरी और घरेलू समस्याओं से निपटने में सक्षम है।

विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन कौन करता है?

  • आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार के कस्टोडियन और मैनेजर के रूप में कार्य करता है। यह कार्य सरकार से साथ मिलकर तैयार किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क के अनुसार होता है।
  • आरबीआई रुपए की स्थिति को सही रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का प्रयोग करता है। जब रुपया कमजोर होता है तो आरबीआई डॉलर की बिक्री करता है। जब रुपया मजबूत होता है तब डॉलर की खरीदारी की जाती है। कई बार आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए बाजार से डॉलर की खरीदारी भी करता है।
  • जब आरबीआई डॉलर में बढ़ोतरी करता है तो उतनी राशि के बराबर रुपया निर्गत करता है। इस अतिरिक्त तरलता (liquidity) को आरबीआई बॉन्ड, सिक्योरिटी और एलएएफ ऑपरेशन के माध्यम से प्रबंधन करता है।

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विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 621 अरब डॉलर के रेकॉर्ड स्तर पर

आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान स्वर्ण भंडार 58.8 करोड़ डॉलर घटकर 37.057 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10 लाख डॉलर घटकर 1.551 अरब डॉलर रह गया।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 621 अरब डॉलर के रेकॉर्ड स्तर पर

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6 अगस्त, 2021 को समाप्त सप्ताह में 88.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 621.464 अरब डॉलर के सर्वकालिक रेकॉर्ड स्तर को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपने ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी।

विदेशी मुद्रा भंडार 30 जुलाई, 2021 को समाप्त सप्ताह में 9.427 अरब डॉलर बढ़कर 620.576 अरब डॉलर हो गया था। रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि की वजह विदेशी मुद्रा संपत्ति(एफसीए) का बढ़ना था जो समग्र भंडार का प्रमुख घटक है। इस दौरान एफसीए 1.508 अरब डॉलर बढ़कर 577.732 अरब डॉलर हो गया। डॉलर के लिहाज से बताई जाने वाली विदेशी मुद्रा संपत्ति में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी यूरो, पाउंड और येन जैसी दूसरी विदेशी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि या कमी का प्रभाव भी शामिल होता है।

आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान स्वर्ण भंडार 58.8 करोड़ डॉलर घटकर 37.057 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10 लाख डॉलर घटकर 1.551 अरब डॉलर रह गया। रिजर्व बैंक ने बताया कि आलोच्य सप्ताह के दौरान आइएमएफ के पास मौजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.1 करोड़ डॉलर घटकर 5.125 अरब डॉलर रह गया।

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उधर, अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन, सऊदी अरब, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजारों को परिधान निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। परिधान निर्यात संवर्द्धन परिषद (एईपीसी) ने शनिवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए 400 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य में परिधान क्षेत्र की प्रमुख भूमिका होगी।
एईपीसी के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने परिषद की 42वीं सालाना आम बैठक में सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक पश्चिमी बाजार में परिधान निर्यात रफ्तार पकड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मुफ्त विदेशी मुद्रा सिग्नल जनवरी-मई, 2021 के दौरान अमेरिका को निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 22 फीसद बढ़ा है। शक्तिवेल ने कहा कि उन्होंने सरकार से यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ मुक्त व्यापार करार को पूरा करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को प्रमुख विदेशी गंतव्यों में अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में शुल्क के मोर्चे पर कुछ नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, कंबोडिया, तुर्की, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों की तुलना में भारत से यूरोपीय संघ को निर्यात में शुल्क के मोर्चे पर 9.6 फीसद का नुकसान हो रहा है।

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