प्रवृत्ति विश्लेषण

"इस पुस्तक में सिविल सेवा की प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा सहित साक्षात्कार की तैयारी के समग्र बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक रणनीतिक चर्चा, कार्य-योजना के साथ-साथ लेखन कौशल के सुझाव, विगत वर्षों के पूछे गये प्रश्नों का प्रवृत्ति विश्लेषण और लोकप्रिय ऐच्छिक विषयों की रणनीति एवं कार्य-योजना समाहित हैं। कोई भी विद्यार्थी जो सिविल सेवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहता है, वह इस पुस्तक के माध्यम से समस्त जानकारी प्राप्त कर सकता है।

मुख्य आकर्षण
- सिविल सेवा परीक्षा की रणनीति एवं कार्य-योजना की विश्लेषणात्मक प्रस्तुति
-विगत वर्षों में पूछे गये प्रश्नों की प्रवृत्ति का विश्लेषण
-उत्तर लेखन की रणनीति एवं कार्य-योजना तथा सुझाव
-साक्षात्कार की तैयारी के विविध पहलू
-हिंदीभाषी अभ्यर्थियों के लिए राज्य सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम का विश्लेषण तथा रणनीति
-लोकप्रिय ऐच्छिक विषयों कौ रणनीति एवं कार्य-योजना
-संपूर्ण विषयवस्तु की चित्रात्मक प्रस्तुति
-पाठ्य-पुस्तकों की आदर्श सूची
-समसामयिकी के अध्ययन की रणनीति"

शोध : प्रविधि और प्रक्रिया/शोध क्या है?

व्यापक अर्थ में शोध या अनुसन्धान (Research) किसी भी क्षेत्र में 'ज्ञान की खोज करना' या 'विधिवत गवेषणा' करना होता है। वैज्ञानिक अनुसन्धान में वैज्ञानिक विधि का सहारा लेते हुए जिज्ञासा का समाधान करने की कोशिश की जाती है। नवीन वस्तुओं की खोज और पुरानी वस्तुओं एवं सिद्धान्तों का पुनः परीक्षण करना, जिससे कि नए तथ्य प्राप्त हो सकें, उसे शोध कहते हैं। शोध के अंतर्गत बोधपूर्वक प्रयत्न से तथ्यों का संकलन कर सूक्ष्मग्राही एवं विवेचक बुद्धि से उसका अवलोकन-विश्लेषण करके नए तथ्यों या सिद्धांतों का उद्घाटन किया जाता है। शोध का परिचय देते हुए डॉ. नगेन्द्र प्रवृत्ति विश्लेषण लिखते हैं कि-"अनुसंधान का अर्थ है परिपृच्छा, परीक्षण, समीक्षण आदि। संधान का अर्थ है दिशा विशेष में प्रवृत्त करना या होना और अनु का अर्थ है पीछे, इस प्रकार अनुसंधान का अर्थ हुआ—किसी लक्ष्य को सामने रखकर दिशा विशेष में बढ़ना—पश्चाद्गमन अर्थात् किसी तथ्य की प्राप्ति के लिए प्रवृत्ति विश्लेषण परिपृच्छा, परीक्षण आदि करना।" [१]

अध्ययन से दीक्षित होकर शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए शिक्षा में या अपने शैक्षिक विषय में कुछ जोड़ने की क्रिया अनुसन्धान कहलाती है। पी-एच.डी./ डी.फिल या डी.लिट्/डी.एस-सी. जैसी शोध उपाधियाँ इसी उपलब्धि के लिए दी जाती हैं। इनमें अध्येता से अपने शोध से ज्ञान के कुछ नए तथ्य या आयाम उद्घाटित करने की अपेक्षा की जाती है।

IGNOU MCO-03 Study Material in Hindi

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Programme Name: वाणिज्य में स्नातकोत्तर उपाधि (एम्. कॉम)

MCO-03 Books Medium: Hindi

List of Available MCO-03 Study Material in Hindi:

MCO-03 अनुसंधान विधियाँ एवं सांख्यिकी विश्लेषण Click to
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प्रवृत्ति विश्लेषण

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Class 12 Accountancy MCQs Chapter – 14 वित्तीय विश्लेषण के यंत्र या उपकरण

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Class 12 Accountancy MCQs Chapter – 14 वित्तीय विश्लेषण के यंत्र या उपकरण

1. वित्तीय विवरणों के निर्वचन में शामिल होता है:

(A) आलोचना एवं विश्लेषण

(B) तुलना एवं प्रवृत्ति अध्ययन

2. क्षैतिज विश्लेषण जाना जाता है :

(B) संरचनात्मक विश्लेषण

(C) स्थैतिक विश्लेषण

(D) इनमें से कोई नहीं

3. शीर्ष/उदग्र विश्लेषण जाना जाता है :

(A) स्थैतिक विश्लेषण

(C) संरचनात्मक विश्लेषण

(D) इनमें से कोई नहीं

4. तुलनात्मक विवरणों को यह भी कहते हैं :

(A) क्रियाशील विश्लेषण

(B) क्षैतिज/समानान्तर विश्लेषण

(C) लम्बवत् विश्लेषण

5. समरूप विवरणों को निम्नलिखित के नाम से भी जाना जाता है :

(C) लम्बवत्/शीर्ष विश्लेषण

6. वित्तीय विश्लेषण के लिए उपकरण सामान्यतः प्रयुक्त हैं :

(A) तुलनात्मक विवरण

(B) सामान्य-आकार विवरण

7. एक अंशधारी द्वारा वित्तीय विवरणों का विश्लेषण उदाहरण है :

(A) बाह्य विश्लेषण का

(B) आन्तरिक विश्लेषण का

(C) लम्बवत् विश्लेषण का

(D) क्षैतिज विश्लेषण का

8. प्रवृत्ति प्रतिशत की गणना के लिए किसी भी वर्ष को चुना जाता है :

(D) इनमें से कोई नहीं

9. वित्तीय विवरणों की तुलना के लिए उपकरण हैं :

(A) तुलनात्मक आर्थिक चिट्ठा

(B) तुलनात्मक आय विवरण

10. प्रवृत्ति अनुपात और प्रवृत्ति प्रतिशत प्रयोग किये जाते हैं :

(A) प्रावैगिक विश्लेषण में

(B) स्थैतिक विश्लेषण में

(C) क्षैतिज विश्लेषण में

(D) लम्बवत् विश्लेषण

11. तुलनात्मक विवरण दर्शाते हैं :

(A) एक संस्था की आर्थिक स्थिति

(B) एक संस्था की उपार्जन शक्ति

(D) उपरोक्त में से कोई नहीं

12. तुलनात्मक वित्तीय विश्लेषण प्रक्रिया किस विवरण के मदों की तुलना को दर्शाती है:

(D) इनमें से कोई नहीं

13. निम्न में से कौन-सी वित्तीय विवरण के विश्लेषण की विधि नहीं है ?

(A) अनुपात विश्लेषण

(प्रवृत्ति विश्लेषण B) तुलनात्मक विश्लेषण

(C) प्रवृत्ति विश्लेषण

14. समान आकार के विवरण प्रायः तैयार किये जाते हैं :

(A) अनुपात के रूप में

(B) प्रतिशत के रूप में

(D) इनमें से कोई नहीं

15. एक कंपनी की मूर्त सम्पत्तियाँ 4,00,000 रु. से बढ़कर 5,00,000 रु. हो गई। इनमें कितने प्रतिशत का परिवर्तन हुआ ?

16. वर्ष 2015 में कंपनी का अंशधारी कोष 8,00,000 रु. था। यह वर्ष 2016 में 12,00,000 रु, हो गया, तो कितने प्रतिशत परिवर्तन हुआ?

17. एक कंपनी के शुद्ध विक्रय 15,00,000 रु. विक्रय हुए माल की लागत 10,00,000 रु. और अप्रत्यक्ष व्यय 3,00,000 रु. तो सकल लाभ की राशि होगी:

18. विक्रय में से बेचे गये माल की लागत घटाकर ज्ञात की गई राशि होती है:

19. यदि एक प्रवृत्ति विश्लेषण फर्म की कुल सम्पत्तियाँ 12,00,000 रु. हो और गैर चालू सम्पत्तियाँ 9,00,000 रु. हों तो गैर-चालू सम्पत्तियाँ कुल सम्पत्तियों का कितने प्रतिशत होगी?

20. यदि एक फर्म की कुल सम्पत्तियाँ 10,00,000 रु. हों और गैर-चालू सम्पत्तियाँ 6,00,000 रु. हों तो चालू सम्पत्तियाँ कुल सम्पत्तियों का कितने प्रतिशत होंगी?

21. समान आकार के आर्थिक चिट्ठा में कुल समता एवं दायित्वों को किसके बराबर माना जाता है:

प्रवृत्ति विश्लेषण

7,863

8,820

12 %

Notes : BE – Budget Estimate; RE – Revised Estimate .

Sources : Union Budget 2018 - 19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS .

2018-19 में दोनों विभागों का बजट अनुमान, पिछले वर्ष (2017-18) के संशोधित अनुमानों से 12 % अधिक है। निम्नलिखित रेखाचित्र में 2009-10 से 2017-18 के दौरान व्यय की प्रवृत्ति प्रदर्शित है।

रेखाचित्र 1: व्यय की प्रवृत्ति ( 2009 - 18 ) (करोड़ रु. में)

Notes : The BE and actuals post 2014 - 15 are a combination of the Department of Social Justice and Empowerment, and the Department of Empowerment of Persons with Disabilities . 2017 - 18 .

Sources : Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS .

2009-10 से 2017-18 की अवधि में मंत्रालय के व्यय में सतत वृद्धि हुई। इसमें केवल 2012-13 एक अपवाद रहा, जब मंत्रालय के व्यय में इससे पिछले वर्ष की तुलना में 2 % की हल्की गिरावट हुई। 2009-10 से 2017-18 की अवधि में संचयी वार्षिक वृद्धि दर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट- सीएजीआर) 37 % थी। सीएजीआर एक विशिष्ट समयावधि के लिए वार्षिक वृद्धि दर होती है।

हालांकि मंत्रालय का आबंटन पिछले वर्षों में बढ़ा है, लेकिन यह मंत्रालय की अनुदान मांगों से कम रहा है। उदाहरण के लिए 2016-17 में मंत्रालय ने 10,643 करोड़ रुपए की मांग प्रवृत्ति विश्लेषण सौंपी थी, जिसकी एवज में मंत्रालय को 6,566 करोड़ रुपए आबंटित किए गए। [2] इसी प्रकार 2017-18 में मंत्रालय ने 10,356 करोड़ रुपए की मांग पेश की थी, लेकिन उसे केवल 6,908 करोड़ रुपए आबंटित किए गए।

जैसा कि रेखाचित्र 2 में प्रदर्शित है, 2009-10 से 2016-17 के दौरान मंत्रालय ने कुल आबंटित राशि का पूरा उपयोग (अंडरयूटिलाइजेशन) नहीं किया। 2013-14 में 18 % राशि का उपयोग नहीं हुआ, जोकि इस अवधि का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2016-17 में केवल 1 % राशि का उपयोग नहीं किया गया और 2017-18 में मंत्रालय के संशोधित अनुमानों में बजटीय आबंटन के 1 % से अधिक व्यय करने की उम्मीद जताई गई है।

रेखाचित्र 2: उपभोग की प्रवृत्तियां (2009-2018) (करोड़ रु. में)

Notes : The BE and actuals post 2014 - 15 are a combination of the Department of Social Justice and Empowerment, and the Department of Empowerment of Persons with Disabilities . Data for 2017 - 18 is a revised estimate .

Sources : Union Budget 2009 - 10 to 2018 - 19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS .

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने कहा कि फंड्स के उपयोग न होने के मुख्य कारणों में से एक उत्तर पूर्वी राज्यों द्वारा व्यय न करना है। 2 , [3] 1996 से सरकार ने सभी मंत्रालयों के लिए यह प्रवृत्ति विश्लेषण अनिवार्य कर दिया कि वे उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए 10 % का आबंटन करेंगे। [4] स्टैंडिंग कमिटी ने कहा कि निम्नलिखित कारण इन राज्यों द्वारा फंड्स का उपयोग न करने को स्पष्ट कर सकते हैं : ( i ) उत्तर पूर्वी राज्यों द्वारा यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स समय पर न भेजना, जिसके कारण फंड्स लैप्स हो गए, और ( ii ) इन राज्यों द्वारा फंड्स की कम मांग करना। 2

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग

2018-19 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के लिए 7,750 करोड़ आबंटित किए गए हैं। 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में विभाग के आबंटन में 12 % की वृद्धि है। तालिका 3 में मुख्य मदों के लिए विभाग को किए गए आबंटन का विवरण दिया गया है।

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